नए बागों की देख-रेख
पौधों को बगीचों में लगाने के पश्चात् उनकी शीघ्र एवं उचित वृद्धि के लिए अच्छी प्रकार से देख-रेख करना आवश्यक है। जिसके लिये निम्रलिखित काम सुचारू रूप से करना चाहिये:- सिंचाई:- नये स्थापित पौधों में पानी की अधिकता व कमी
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
पौधों को बगीचों में लगाने के पश्चात् उनकी शीघ्र एवं उचित वृद्धि के लिए अच्छी प्रकार से देख-रेख करना आवश्यक है। जिसके लिये निम्रलिखित काम सुचारू रूप से करना चाहिये:- सिंचाई:- नये स्थापित पौधों में पानी की अधिकता व कमी
वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न रायसेन। कृषि विज्ञान केन्द्र, रायसेन में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में श्री एन.पी. सुमन, उपसंचालक कृषि, डॉ. पी.के. अग्रवाल, उपसंचालक पशुुपालन, डॉ. अरविन्द सक्सेना, सह प्राध्यापक, कृषि
रबी फसलों में गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों, गन्ना इत्यादि फसलों की बुआई लक्ष्य के आस-पास पहुंच चुकी है और अब समय आ गया है कि फसलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाये। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिये
गुलाब पर भी अनेक प्रकार के रोग लगते हैं, बड़े शौक और तमन्नाओं के साथ लगाए गुलाब के पौधे में मनमुताबिक फूल न लगने और छोटे व कम फूल लगने या पौधों में बीमारी लगने पर खीज और निराशा होने
नई दिल्ली। अपोलो टायर्स ने इंडियन चेम्बर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर (आईसीएफए) के साथ मिलकर फार्म पावर इण्डस्टी में उत्कृष्टता को पहचानने के लिए अपोलो फार्म पावर अवाड्र्स की स्थापना की। इंडियन चेम्बर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर द्वारा आयोजित एग्रो
आलू की अनुशंसित उन्नत जातियां किस्म परिपक्वता (दिन) उत्पादन क्विं/हे. रिमार्क अगेती किस्म कुफरी जवाहर 60-90 250-300 अगेती झुलसा एवं फेमा रोग प्रतिरोधी किस्म है कुफरी चंद्रमुखी 80-90 200-250 पिछेती अंगमारी के प्रति संवेदनशील कुफरी आनंद 90-110 350-400 पिछेती अंगमारी
प्रजातियों का विकास: अधिक उत्पादकता, शीघ्र पकने वाली तथा सूखारोधी प्रजातियों का विकास। – अनुमोदित तकनीकों के मूल्यांकन एवं पुनस्थापन द्वारा उत्पादन लागत कम करना। – खरीफ फसल कटाई के बाद खेत की सीमित जुताई। – अधिक जल-उपयोग क्षमता वाली
किसान को मिलेगा 43200 रु. प्रति एकड़ का अनुदान भोपाल। प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण को बढ़ावा देने के लिये आम की तोतापरी किस्म के पौध-रोपण को प्रोत्साहित किया जाएगा। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा योजना के प्रथम चरण में होशंगाबाद,
मटर रबी में बोई जाने वाली महत्वपूर्ण दलहनी फसल है। मटर की खेती सब्जियों के लिये हरी फलियों एवं सूखे दानों के लिये की जाती है। सूखे दाने के वजन 0.1 से 0.36 ग्राम होता है। तना खोखला, पत्तियां तितलीनुमा