कीट नियंत्रण से होगा भरपूर कपास
कपास पर संपूर्ण विश्व में लगभग 1326 कीट प्रजातियां पाई गई हैं जिनमें से 162 प्रजातियां हमारे देश में भी कपास उत्पादक क्षेत्रों में पायी गई हैं। इन 162 कीट प्रजातियों में से 9 कीट प्रजातियां लगभग 50 प्रतिशत कपास
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
कपास पर संपूर्ण विश्व में लगभग 1326 कीट प्रजातियां पाई गई हैं जिनमें से 162 प्रजातियां हमारे देश में भी कपास उत्पादक क्षेत्रों में पायी गई हैं। इन 162 कीट प्रजातियों में से 9 कीट प्रजातियां लगभग 50 प्रतिशत कपास
कुष्मांडकुल को कद्दूवर्गीय सब्जियों के नाम से भी पुकारा जाता है। इस कुल की सभी सब्जियों का उपयोग आहार के रूप में किया जाता है अधिकांश कद्दूवर्गीय सब्जियों का उत्पत्ति स्थान भारत हैं। इस वर्ग की सब्जियों में खीरा, ककड़ी
”मृदा के स्वास्थ्य को सुधारना है। फसलों के उत्पादन को बढ़ाना है।।” जिप्सम के उपयोग से तिलहनी, दलहनी व अनाज वाली फसलों के उत्पादन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी के साथ-साथ भूमि का स्वास्थ्य भी बना रहता है। जिप्सम पोषक तत्व
सोयाबीन -गेहूं फसल चक्र अपनाने से गेहूं की पैदावार में काफी बढ़ोतरी पाई गई है। सोयाबीन के बाद गेहूं लगाने पर गेहूं फसल को सोयाबीन फसल द्वारा छोड़ी गई नत्रजन एवं अन्य तत्व फायदा पहुँचाते हैं जिससे फसल उत्पादन बढ़
खेत की तैयारी अच्छे निथार वाले बालू भूमि की तैयारी एक या दो बार बक्खर चलाकर मिट्टी भुरभुरी कर लें। आखिरी बार बखरनी के पहले एक हेक्टेयर में 20 किलो फाली डाल डस्ट डालकर मिला लें और 15 टन गोबर
भूमि का चुनाव:- हल्की रेतीली दोमट या मध्यम प्रकार की भूमि जिसका पी.एच. 7- 8 के मध्य हो व पानी का निकास की समुचित व्यवस्था हो वह उड़द के लिये उपयुक्त है। खेतों को ट्रैक्टर या देशी हल से दो-तीन
धान (चावल) महत्वपूर्ण खाद्य स्रोत है और धान (चावल) आधारित पद्धति खाद्य गरीबी उम्मूलन और बेहतर आजीविका के लिए जरूरी है। विश्व में धान (चावल) के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कम आय वाले देशों में छोटे स्तर
ककोड़ा (खेख्सा) एक बहुवर्षीय कद्दूवर्गीय भारत के कुछ क्षेत्रों में उगाया जाता है। विशेषकर जंगली क्षेत्रों में खेख्सा स्वयं उगते हुए देखे जा सकते हैं, इसलिए इन क्षेत्रों के आस-पास के लोग इसकी सब्जी के रूप में बहुतायत से उपयोग
भूमि का चुनाव हल्दी की खेती सामान्यत: सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है। उचित जलनिकास वाली बलुई दोमट या चिकनी दोमट मिट्टी जिसमें जीवांश की अच्छी मात्रा हो, हल्दी के लिये उपयुक्त होती है। इसकी अच्छी पैदावार
भूमि की तैयारी:- उड़द सभी प्रकार की भूमि मेंं (अधिक रेतीली भूमि को छोड़कर) सफलता पूर्वक पैदा की जा सकती है। परन्तु हल्की रेतीली, दोमट या मध्यम प्रकार की भूमि में जिसमें पानी का निकास अच्छा हो, उड़द के लिये