टमाटर का रस
टमाटर रस तैयार करने के लिए केवल पौधे पर पका हुआ लाल टमाटर का उपयोग करें धब्बे युक्त हरे तथा अधिक पके हुए पिलपिले टमाटर को अलग कर दें, क्योंकि इसके कारण रस की गुणवत्ता खराब हो सकती है। जूस
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंनवीनतम फसल की खेती (Crop Cultivation) की जानकारी और कृषि पद्धतियों में नवाचार, बुआई का समय, बीज उपचार, खरपतवार नियन्तारन, रोग नियन्तारन, कीटो और संक्रमण से सुरक्षा, बीमरियो का नियन्तारन। गेहू, चना, मूंग, सोयाबीन, धान, मक्का, आलू, कपास, जीरा, अनार, केला, प्याज़, टमाटर की फसल की खेती (Crop Cultivation) की जानकारी और नई किस्मे। गेहू, चना, मूंग, सोयाबीन, धान, मक्का, आलू, कपास, जीरा, अनार, केला, प्याज़, टमाटर की फसल में कीट नियंतरण एवं रोग नियंतरण। सोयाबीन में बीज उपचार कैसे करे, गेहूँ मैं बीज उपचार कैसे करे, धान मैं बीज उपचार कैसे करे, प्याज मैं बीज उपचार कैसे करे, बीज उपचार का सही तरीका। मशरुम की खेती, जिमीकंद की खेती, प्याज़ की उपज कैसे बढ़ाए, औषदि फसलों की खेती, जुकिनी की खेती, ड्रैगन फ्रूट की खेती, बैंगन की खेती, भिंडी की खेती, टमाटर की खेती, गर्मी में मूंग की खेती, आम की खेती, नीबू की खेती, अमरुद की खेती, पूसा अरहर 16 अरहर क़िस्म, स्ट्रॉबेरी की खेती, पपीते की खेती, मटर की खेती, शक्ति वर्धक हाइब्रिड सीड्स, लहसुन की खेती। मूंग के प्रमुख कीट एवं रोकथाम, सरसों की स्टार 10-15 किस्म स्टार एग्रीसीड्स, अफीम की खेती, अफीम का पत्ता कैसे मिलता है?
टमाटर रस तैयार करने के लिए केवल पौधे पर पका हुआ लाल टमाटर का उपयोग करें धब्बे युक्त हरे तथा अधिक पके हुए पिलपिले टमाटर को अलग कर दें, क्योंकि इसके कारण रस की गुणवत्ता खराब हो सकती है। जूस
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंप्रत्येक अंचल की अपनी एक खास खुशबू होती है जो वहीं कि आबो-हवा से बनती और संवरती है किसी भी प्रदेश की संस्कृति मनुष्य की तीन मूलभूत आवश्यकताओं के आधार पर ही विकसित होती है। ये तीन मूलभूत आवश्यकता है।
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंशाजापुर। कृषि विज्ञान केन्द्र, शाजापुर द्वारा गत दिनों ग्राम बज्जाहेड़ा में अरहर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. एन.एस. सिकरवार, उपसंचालक पशु पालन, केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जी. आर. अम्बावतिया, श्री आर.एस. तोमर,
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंखरीफ मौसम में रबी मौसम की तुलना में खरपतवारों का प्रकोप अधिक होता है। सब्जियों में उगने वाले खरपतवारों को मुख्यत: चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है। खरपतवारों से हानियां: खरपतवार जहां एक ओर फसल के साथ प्रतिस्पर्धा करके
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंओरोबैंकी:- ओरोबैंकी या आग्या या बादा या हड्डा (बु्रमरेप) की जातियां पूर्ण रूप से मूल परजीवी होती हैंं। यह विभिन्न फसलों पर आक्रमण करती हैं जिसमें सरसों, बैंगन, टमाटर, तम्बाकू, फूलगोभी, पत्तागोभी, शलजम और कई सोलोनेसी तथा क्रुसीफेरी कुल के
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंखेत का चुनाव व तैयारी : मध्यम तथा भारी किस्म की भूमि चने के लिए अधिक उपयुक्त होती है। खेत को तैयार करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि मध्यम आकर के ढेले अवश्य बुआई के समय रहें। भूमि की
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंप्रमुख नाशीजीव ( प्रमुख कीट एवं रोग) चेपा/माहू – यह कीट छोटा, कोमल, सफेद-हरे रंग का होता है। इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ दोनों पौधों के विभिन्न भागों से रस चूसते हैं। यह प्राय: दिसम्बर के अन्त से लेकर
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंचना प्रयोगों द्वारा सिद्ध हो चुका है कि बुआई के 45 दिन (फूल आने के पहले) या 75 दिन के बाद एक सिंचाई करने से चने की उपज 30 से 35 प्रतिशत अधिक होती है। अगर रबी मौसम में सर्दियों
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंपौधों के लिये जल की आवश्यकता – छोटे बढ़ते हुए पौधों में 85 से 90 प्रतिशत भाग केवल जल ही होता है। जल ही पौधों को कोशिकाओं में विद्यमान जीवद्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) का एक आवश्यक अंग है। जीव द्रव्य में जल
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंमनुस्मृति में कहा गया है – अक्षेत्रे बीजमुत्सृष्टमन्तरैव विनश्यति। अबीजकमपि क्षेत्रं केवलं स्थण्डिलं भवत्।। सुबीजम् सुक्षेत्रे जायते संवर्धते उपरोक्त श्लोक द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अनुपयुक्त भूमि में बीज बोने से बीज नष्ट हो जाते हैं
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें