फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
लाख फसल तो ऐसे करें लाख की खेती – भारत में कुसमी और रंगीनी दो प्रकार की लाख फसल होती है। कुसमी लाख कुसुम के पौधों पर होती है जबकि रंगीनी लाख मुख्यत: पलाश बेर के पौधे पर पाले जाते
देशी वनस्पतियां औषधीय गुणों से भरपूर – वर्तमान समय में कोरोना जैसी महामारियों के दौर को देखते हुए राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में आसानी से पाए जाने वाले औषधीय पादपों एवं उनके उपयोग के बारे में जानकारी होना अत्यंत आवश्यक
रबी फसलों के विषाणु जनित रोग व उनका समेकित नियंत्रण – विषाणु अति सूक्ष्मदर्शी अविकल्पी परजीवी होते हैं जो कि अत्यधिक संक्रामक एवं परपोषी विशिष्ट होते हैं। फसलों में विषाणु रोगों के प्रकोप से काफी नुकसान होता है। विषाणु रोगों
क्षेत्रीय केंद्र इंदौर की गेहूं किसानों को सलाह 5 जनवरी 2021, इंदौर। गेहूं में जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें – भा.कृ.अनु.परिषद,भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर द्वारा गेहूं उत्पादक किसानों को सिंचाई, खाद, खरपतवार नियंत्रण एवं कीट नियंत्रण
यूं करें गन्ने से आय में बढ़ौत्री – भारत में कृषि मे लाभ की कमी के कारण कृषि में युवाओं की रूचि में लगातार कमी देखी जा रही है। ऐसी स्तिथि में किसानों को अपनी कृषि पद्धति में आधुनिक तकनीकी
सर्दी और पाले से फसलों को बचायें – किसानों को बढ़ती सर्दी से चिंता सताने लगी है कि फसलों को कैसे बचाये जल्द ही शीतलहर और पाले का प्रकोप दिखाई देने लगेगा। जब सर्दी चरम पर होती है तो उस
पर्ण सुरंगक (लीफ माइनर) पहचान एवं क्षति के लक्षण:- प्रौढ़ मक्खी चमकीली, गहरे, हरे रंग या काली होती है। इसका वक्ष काले रंग का होता है तथा किनारों पर पीले निशान होते है। अगले पंख पारदर्शक होते है। पिछले पंख
पोषकीय सुरक्षा हेतु खाद्य फसलों का बायो फोर्टिफिकेशन – आहार में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी या असंतुलित अनुपात शरीर को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करती है जिसे दूसरे शब्दों में कुपोषण भी कहते हैं जो कि दैनिक आहार में
रोग को कैसे पहचानें? – रोग के लक्षण तना, पत्तियों व फलियों पर देखे जा सकते हैं। लक्षण के आधार पर इसे तना गलन, श्वेत अंगमारी, तना कैंकर इत्यादि नाम दिये गये हैं। रोग के आरम्भिक लक्षण पौधे के तना