फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
ज्वार बीज उत्पादक कम्पनियों की संकर एवं उन्नत किस्में कंपनी किस्म महिको एमएसएच-51,एमएफएसएच-3,4,15, एमआरएस 4094 नाथ बायोजीन अमरनाथ -251, 2000, सेमे जे.के.एग्री जेनेटिक्स जेकेएसएच-22,234, जेके ज्योति गंगा कावेरी जीके-4009,4030,4013, 4034 बायर क्राप साइंस 8320,8340, 8450, 8568, 8712 विभा सीड्स
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंअल्टरनेरिया झुलसा: सरसों का यह रोग बहुत ही महत्वपूर्ण है और इस रोग के लगने से 15-71 प्रतिशत तक उत्पादन में कमी हो जाती है। इस रोग का मुख्य लक्षण पौधे के पूरे भाग में दिखाई देता है तथा सबसे
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंहमारे देश का एक बड़ा भाग कृषि उत्पादन पर निर्भर करता है। रबी सब्जियों में एकीकृत कीट प्रबंधन की आवशकता हैै। अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए रसायनिक उर्वरकों का अधिक एवं अनियमित प्रयोग किया जाता रहा हैै। रसायनिक उर्वरक
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंगेहूं में यूरिया आधार खाद के रूप में 40 किग्रा./हे. बुवाई के समय दें एवं शेष बची मात्रा को दो भाग करके प्रथम दो सिंचाई में दें। प्रथम सिंचाई अथवा बुवाई के 21 दिन के पश्चात् यूरिया 25 किलो/बीघा दें
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंआलू विश्व में सबसे ज्यादा लोकप्रिय और प्रयोग किया जाता है आलू की खेती लगभग पूरे विश्व में की जाती है, इसका जनक अमेरिका है भारत में इसकी उत्पति 16वीं सदी में पुर्तगालियों द्वारा मानी जाती है आलू पौष्टिक तत्वों
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंगेहूं की फसल पर जड़ माहू का नियंत्रण भारत जैसे विशाल देश में खाद्य समस्या को सुलझाने में गेहूं महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। गेहूं के प्रमुख कीटों से नुकसान के कारण इसकी उत्पादकता कम हो जाती है। कभी-कभी फसल
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंमसूर की खेती भारतवर्ष में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं झारखण्ड में मुख्य रूप से होती है। उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 611 किग्रा है। म.प्र. में मसूर का क्षेत्रफल 6.2 लाख हेक्टेयर है परन्तु उत्पादकता 371 किग्रा है। म.प्र. में अशोक
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