ककड़ी, करेला, कद्दू, टिंडे की पौध कैसे तैयार करें
प्रतिकूल मौसम जैसे वर्षा ऋतु में तेज हवा बारिश एवं ठंडी तथा बहुत गर्मी में बीजों की बुवाई सीधे खेतों में करना संभव नहीं हो पाता है। कभी-कभी बारिश के मौसम में खेत की तैयारी के लिए समय कम पड़
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
प्रतिकूल मौसम जैसे वर्षा ऋतु में तेज हवा बारिश एवं ठंडी तथा बहुत गर्मी में बीजों की बुवाई सीधे खेतों में करना संभव नहीं हो पाता है। कभी-कभी बारिश के मौसम में खेत की तैयारी के लिए समय कम पड़
धान की फसल मध्यप्रदेश की एक महत्वपूर्ण फसल है। पिछले कुछ सालों से धान के रकबे में निरंतर वृद्धि हुई है। इस साल भी धान के रकबे में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। खरपतवारों की समस्या
कद्दूवर्गीय सब्जियों को मानव आहार का एक अभिन्न अंग माना गया है। एक आदमी को रोजाना 300 ग्राम सब्जियां खानी चाहिए परन्तु भारत में इसका 1/9वां भाग ही मिल पाता है। कद्दूवर्गीय सब्जियों की उपलब्धता साल में आठ से दस
वर्मी कंपोस्ट में कई प्रकार के एग्जाइम तथा हार्मोन्स पाए जाते हैं जैविक पद्धति में किसी भी प्रकार की रासायनिक खादों व कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता है। औषधीय पौंधों के दूसरी खादों की तुलना में इससे कम मात्रा में
आम के बागों में कीट प्रबंधन आम में नर्सरी से लेकर भण्डारण तक हर स्तर पर विभिन्न कीटों तथा बीमारियों का प्रकोप होता है इनके द्वारा आम के उत्पादन को लगभग 30 प्रतिशत हानि होती है। जिनका समय रहते रोकथाम
भूमि एवं जलवायु सर्पगंधा बालुई जलोढ़ से लेकर लाल लैटराइट दोमट जैसी अनेक प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है। इसके लिये उचित जल निकास वाली भूमि उपयुक्त रहती हैं। प्रजातियां जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्व विद्यालय के इंदौर कृषि
भिंडी को बचायें कीटों से विश्व में सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भारत प्रमुख स्थान रखता है। भारतीय कृषि का एक चौथाई भाग औद्योगिक फसलों के अंतर्गत आता है जिसमें सब्जियों का एक अहम स्थान है। भिंडी भारत वर्ष की
आया मौसम करेला, ककड़ी लगाने का जलवायु एवं भूमि: इनकी बेलों की अच्छी वृद्धि 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर होती है। इनके लिए उपजाऊ दोमट भूमि जहां पानी का निकास अच्छा हो वह मृदा उत्तम रहती है। इनकी
रजनीगंधा की खेती रजनीगंधा एक व्यावसायिक एवं बहुवर्षीय कंद वाला फूल है। इसका प्रसारण कंद से किया जाता है। फूल चिकने, सुगंधित एवं रंग सफेद होता है। फूल को अच्छी किस्म के इत्र बनाने में प्रयोग किया जाता है। भारत
भूमि की तैयारी : खेत तैयार करने के लिये विभिन्न कृषि क्रियाओं की मात्रा मुख्य रूप से भूमि को किस्म फसल चक्र एवं उपलब्ध सुविधाओं पर निर्भर रहती है। उन स्थानों पर जहां गेहूं की खेती वर्षा के आधार पर