बीज विक्रय लाइसेंस ‘निरस्तीकरण’

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बीज- बीज दो वर्णों के संयोजन से बना शब्द है। परंतु प्रकृति वनस्पति मानव, पशु, पक्षी या यूं कहेें कि सम्पूर्ण चराचर जगत की उत्पत्ति का केन्द्र बिन्दु है। बीज खेती का भी मुख्य आदान है कृषि उत्पादन बढ़ाने तथा भुखमरी की विभीषिका का नाश करने के लिये अमोघ अस्त्र है। कृषि के अति महत्वपूर्ण अस्त्र के उत्पादन, विकास तथा गुणवत्ता के लिये भारत सरकार एवं राज्य सरकारें कटिबद्ध हैं। बीज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भारत सरकार ने बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 तथा कालान्तर में बीज नियंत्रण आदेश 1983 लागू किये। उपरोक्त नियामकों में बीज गुणवत्ता निर्धारण हेतु बीज निरीक्षक को असीम शक्तियां प्रदान की गई हैं।
बीज बिक्री – सभी राज्यों में बीज की बिक्री बीज नियंत्रण आदेश 1983 के उपरोक्त प्रावधानों के अनुसार लाइसेंस लेकर की जाती है। लाइसेंस का समय पर नवीनीकरण तथा लाइसेंस में संधोन कराया जाता है। बीज क्रेता को विधि अनुसार कैश मैमों, बिल के साथ बीज दिया जाता है। कृषि विभाग के द्वारा दर्शाये रिकॉर्ड बनाए जाते हैं और उन्हें कृषि विभाग से सत्यापित कराया जाता है। परंतु हरियाणा राज्य में बीज विक्रेताओं, बीज वितरकों तथा बीज उत्पादकों द्वारा अपने विक्रय पटल सेल काउन्टर पर रोजाना बीज की स्टाक तथा दर प्रतिशत कराने का नियम तो है परंतु रिवाज नहीं। साथ की क्लाज 18 के अनुसार प्रत्येक माह की विक्रय की रिपोर्ट देने की आदत भी बीज उद्योग की नहीं है। राजस्थान में इस बात का पालन होता है।
लाइसेंस निरस्त करना- प्रत्येक राज्य में बीज नियंत्रण आदेश 1983 के क्लाज 11 के अनुसार लाइसेंस स्वीकृत करने वाले अधिकारी को बीज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिये बीज नियंत्रण आदेश की शर्तों का उल्लंघन करने तथा धोखाधड़ी करके लाइसेंस प्राप्त करने पर लाइसेंस निरस्त/कैंसल या निलम्बित करने का अधिकार है। लाईसेंस की शर्तों में मुख्य उल्लंघन स्वीकृत लाइसेंस का विक्रय स्थल पर समुचित जगत पर प्रदर्शन न करना, स्वीकृत स्थल के अलावा अन्य जगह पर लाइसेंस में संशोधन कराये बिना विक्रय करना, लाइसेंस धारी के नाम में परिवर्तन होने पर बिना संशोधन के जारी रखना, क्रेता को कैश मैमों न देना, विक्रय स्थल के बाहर विक्रय दरों का प्रदर्शन न करना तथा प्रत्येक माह की 5 तारीख तक पिछले माह की आवक-जावक तथा विक्रय का विवरण न देना ऐसे विषय हैं जिनकी पालना न होने पर लाइसेंस कैंसिल या सस्पेंड किया जा सकता है। बीज नियंत्रण  आदेश को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 से लिया गया जिसका मुख्य उद्देश्य बीज के विक्रय को नियमित करना तथा कालाबाजारी को रोकना है। बीज नियंत्रण आदेश में गुणवत्ता हेतु भी कुछ प्रावधान है जिसके आधार पर बीज निरीक्षक बीज के नमूने लेकर टेस्ट कराता है और अंकुरण कम आने पर लाइसेंस निरस्त कर देते हैं। इतना ही नहीं दूसरे जिले/राज्य के बीज उत्पादकों को उनके द्वारा उत्पादित कोई भी बीज जिले में बेचने पर प्रतिबंध लगा देते हैं जो अनुचित ही नहीं बल्कि नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है और बीज उत्पादकों को हतोत्साहित करने का अपराध है। बीज उत्पादक की एक किस्म के एक लॉट का सैम्पल निरस्त होने पर भी सभी किस्मों के बीजों को उनके जिले में न बेचने का नादिरशाही हुक्म गलत है।
अपील- बीज नियंत्रण आदेश 1983 की धारा भाग 16 में किसी लाइसेंस के निरस्त या निलंबन के विरूद्ध अपील करने का प्रावधान है पीडि़त बीज व्यवहारी लाइसेंस निलम्बन के विरूद्ध अपीलीय प्राधिकरण को आदेश की प्राप्ति होने के 60 दिन के अन्दर 100 रु. अदा कर अपने तथ्यों के आधार पर अपील कर सकते हैं। विगत में हरियाणा में दो दर्जन के लगभग बीज विक्रेताओं के लाइसेंस इस आधार पर निरस्त किये गये कि उनके सैम्पल बीज परीक्षणशाला में फेल हो गये और उन्होंने अपीलीय प्राधिकारी- कृषि निदेशक के यहां अपील की और अपीलीय प्राधिकारी ने निर्णय देते हुए बताया कि बीज विक्रेता को सुनवाई का मौका दिये बिना ही लाइसेंस निरस्त किये गये तथा बीज अधिनियम 1966 के अनुसार बीज विक्रेता पर निम्न गुणवत्ता का बीज बेचने का आरोप लगा है तब बीज अधिनियम के अनुसार बीज विक्रेता को निर्दोष सिद्ध करना है। वह स्वयं को निर्दोष तब कर पायेगा जब न्यायालय में वाद दायर किया जाये और बीज विक्रेता अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकें क्योंकि जो दोष निरीक्षक ने लगाया है उसको न्यायालय ही सिद्ध करेगा। अत: लाइसेंस देने वाले अधिकारी ने न्यायोचित कदम नहीं। उठाए बीज निरीक्षक को न्यायालय में वाद बीज नियम 23 के अंतर्गत दायर करना चाहिए थे। अपीलीय प्राधिकृत अधिकारी ने उल्लेख किया कि दोषी को लाइसेंस निरस्त करने से पहले बीज विक्रेता को सुनवाई के लिये अवसर देना चाहिए था। उपरोक्त दोनों कारणों से लाइसेंस बहाल कर दिये गये।

बीज विक्रय के प्रावधान- बीज नियंत्रण आदेश 1983 के अनुसार बीज विक्रय को सुविधाजनक और संगत चलाने के लिये निम्न मुख्य प्रावधान है-
क्लाज-3     बीज विक्रय हेतु विक्रेता को लाइसेंस प्राप्त करना।
क्लाज-4    शर्तों के साथ लाईसेंस की स्वीकृति।
क्लाज-7     लाइसेंस पुन: वैध करना।
क्लाज-8  बीज विक्रेता द्वारा स्टाक तथा विक्रय दरों का प्रदर्शन।
क्लाज-9     बीज के खरीदार को कैस मैमो, बिल, बीजक देना।
क्लाज-13    निरीक्षक परीक्षण एवं दंड के प्रावधान।
क्लाज-15    लाइसेंस का निलम्बन एवं निरस्तीकरण।
क्लाज-16    अपील।
क्लाज-18    रिकॉर्ड रखना और प्रत्येक माह की बीज की आवक जावक एवं विक्रय की रिपोर्ट अगले माह की 5 तारीख तक देना।

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