राज्य कृषि समाचार (State News)

महिला किसानों ने कर दिखाया कमाल! 100% अंकुरण से 10 एकड़ में लहलहाई जीराफूल धान, अब बनेगा ‘हसदेव ब्रांड’

31 जुलाई 2026, रायपुर: महिला किसानों ने कर दिखाया कमाल! 100% अंकुरण से 10 एकड़ में लहलहाई जीराफूल धान, अब बनेगा ‘हसदेव ब्रांड’ – छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की महिलाओं ने आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। सिद्धबाबा महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) से जुड़ी महिला किसानों ने वैज्ञानिक खेती और सामूहिक प्रयासों के दम पर सुगंधित जीराफूल धान की सफल खेती कर न सिर्फ कृषि में नई पहचान बनाई है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। अब एफपीओ का लक्ष्य ‘हसदेव ब्रांड’ के तहत जीराफूल चावल को देशभर के बाजारों तक पहुंचाना है।

वैज्ञानिक खेती से मिली बड़ी सफलता

महिला शेयरधारकों द्वारा गठित इस एफपीओ ने उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन कर वैज्ञानिक पद्धति से नर्सरी तैयार की। कृषि विशेषज्ञों की निगरानी में बीज उपचार और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 100 प्रतिशत अंकुरण हासिल हुआ। इस उपलब्धि ने महिला किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें बड़े स्तर पर खेती के लिए प्रेरित किया।

10 एकड़ में लहलहा रही जीराफूल धान की फसल

सफल अंकुरण के बाद महिला किसानों ने सामूहिक रूप से 10 एकड़ क्षेत्र में जीराफूल धान की खेती का विस्तार किया। समय पर रोपाई, संतुलित पोषण प्रबंधन, नियमित सिंचाई और फसल की लगातार निगरानी के कारण खेतों में फसल बेहतर स्थिति में है। लहलहाते धान के खेत आज महिला किसानों की मेहनत, अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व की पहचान बन चुके हैं।

खेती की हर जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाली

इस पहल की खास बात यह रही कि महिलाएं केवल खेतों में श्रम करने तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने बीज चयन, नर्सरी प्रबंधन, रोपाई, फसल संरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन प्रबंधन जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी खुद संभाली। इससे महिलाओं का खेती के प्रति नजरिया बदला है और कृषि उनके लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनकर उभरी है।

‘हसदेव ब्रांड’ के जरिए मिलेगा बड़ा बाजार

एफपीओ अब ‘हसदेव ब्रांड’ के नाम से उच्च गुणवत्ता वाले सुगंधित जीराफूल चावल को प्रदेश और देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए गुणवत्ता सुधार, प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और बेहतर विपणन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि महिला किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिल सके।

एफपीओ मॉडल से बढ़ रही किसानों की आय

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, एफपीओ मॉडल किसानों को सामूहिक रूप से संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और बाजार में बेहतर दाम प्राप्त करने का अवसर देता है। यही कारण है कि सिद्धबाबा महिला एफपीओ की यह सफलता अब केवल एमसीबी जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की अन्य महिला किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

महिलाओं के सामूहिक नेतृत्व, वैज्ञानिक खेती और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन का यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। 100 प्रतिशत अंकुरण से शुरू हुई यह यात्रा आज 10 एकड़ में लहलहाती जीराफूल धान की फसल के रूप में महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और आत्मनिर्भर गांवों की नई पहचान बन चुकी है।

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