Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

अंडमान के दुर्लभ फल से महिला उद्यमियों ने खड़ा किया नया कारोबार

20 अक्टूबर 2026, श्री विजय पुरम (अंडमान-निकोबार): अंडमान के दुर्लभ फल से महिला उद्यमियों ने खड़ा किया नया कारोबार – अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पाए जाने वाले एक दुर्लभ और स्थानीय फल से दो युवा महिलाओं ने नया कारोबार खड़ा किया है। श्री विजय पुरम की स्नेहा होरो और उनकी सहेली एम. वेनी ने “आईलैंड्स रस एंड रूट” नाम की फर्म शुरू की है, जो “अंडमान कोकम” नाम के फल से सिरप, कैंडी और सूखा छिलका जैसे उत्पाद बना रही है।

यह फल वानस्पतिक रूप से गार्सिनिया धनिखारिएंसिस कहलाता है, जो अंडमान द्वीप समूह में ही पाया जाने वाला दुर्लभ और स्थानिक फल है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीआईएआरआई) ने इस फल को स्थानीय स्तर पर “अंडमान कोकम” नाम दिया है।

स्नेहा होरो को दिसंबर 2025 में आईसीएआर-सीआईएआरआई से इस फल पर प्रोसेसिंग की तकनीकी जानकारी मिली थी। संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. पूजा बोहरा और डॉ. अजित अरुण वामन ने इस फल पर काम किया है, और संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. जय सुंदर की अगुवाई में इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

एक ही सीजन में हुई ₹47,255 की कमाई

स्नेहा और वेनी की फर्म उद्यम (UDYAM) और FSSAI के तहत पंजीकृत है। फरवरी 2026 में इनके उत्पादों को पहली बार आईसीएआर-सीआईएआरआई के किसान मेले में और फिर द्वीप खाद्य महोत्सव 2026 में प्रदर्शित किया गया।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

संस्थान के मुताबिक इन महिलाओं को एक ही फलन सीजन में 47,255 रुपये की आमदनी हुई, और उनका लागत-लाभ अनुपात 1.71 रहा, यानी हर एक रुपये की लागत पर करीब 1.71 रुपये की वापसी मिली। संस्थान का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस कारोबार से होने वाली आमदनी और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि फल के पेड़ जितने पुराने होते जाएंगे, उपज भी उतनी बढ़ेगी।

आईसीएआर-सीआईएआरआई अब इस दुर्लभ फल के पौधे अंडमान-निकोबार के दूसरे किसानों को भी उपलब्ध करा रहा है, ताकि ज्यादा लोग इस स्थानीय फल की खेती और प्रोसेसिंग से जुड़ सकें।

द्वीप के किसानों के लिए नया मौका

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में खेती की जमीन सीमित है, और यहां के किसान ज्यादातर नारियल, सुपारी और मसालों की पारंपरिक खेती करते रहे हैं। ऐसे में स्थानीय और दुर्लभ फलों पर आधारित छोटे कारोबार किसानों और खासकर महिलाओं के लिए आय का नया जरिया बन सकते हैं।

अंडमान-निकोबार में समुद्री रास्ते से सामान लाना-ले जाना महंगा और समय लेने वाला काम है, इसलिए यहां के किसानों के लिए मुख्य भूमि की मंडियों तक सीधे पहुंच बना पाना मुश्किल रहता है। सिरप और कैंडी जैसे उत्पाद ताजे फल की तुलना में काफी ज्यादा समय तक खराब नहीं होते, जिससे इन्हें द्वीप के बाहर भेजना भी आसान हो जाता है।

स्नेहा होरो और वेनी की तरह द्वीप पर कई और शिक्षित युवा अब खेती और प्रोसेसिंग को रोजगार के विकल्प के तौर पर अपना रहे हैं। संस्थान के मुताबिक ऐसे उत्पादों को आगे द्वीप के बाहर के बाजारों तक पहुंचाने की भी योजना है, ताकि इन्हें बड़े स्तर पर पहचान मिल सके। संस्थान का यह भी कहना है कि इस तरह की छोटी इकाइयां द्वीप की दुर्लभ जैव विविधता के संरक्षण में भी मदद करती हैं, क्योंकि किसानों को इन पेड़ों को बचाने और बढ़ाने के लिए सीधा आर्थिक कारण मिल जाता है।

गार्सिनिया प्रजाति के पेड़ आमतौर पर धीमी गति से बढ़ते हैं और फल आने में कई साल लग जाते हैं, इसलिए इन्हें व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल में लाने के लिए किसानों को शुरुआत में कुछ साल इंतजार करना पड़ता है। आईसीएआर-सीआईएआरआई इसी वजह से किसानों को पौध के साथ-साथ प्रोसेसिंग की जानकारी भी साथ दे रहा है, ताकि पेड़ तैयार होने के बाद उपज बर्बाद न हो और किसानों को सीधा फायदा मिल सके।

अंडमान-निकोबार प्रशासन और कृषि विभाग इस तरह के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए किसान मेलों और खाद्य महोत्सवों का नियमित आयोजन करते हैं, जहां नए उद्यमियों को सीधे ग्राहकों और व्यापारियों से जुड़ने का मौका मिलता है। स्नेहा और वेनी जैसे उद्यमियों के लिए ऐसे मंच शुरुआती पहचान बनाने में काफी मददगार साबित हुए हैं।

संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में अंडमान कोकम के अलावा द्वीप पर पाए जाने वाले दूसरे दुर्लभ फलों पर भी इसी तरह काम किया जाएगा, ताकि स्थानीय किसानों के पास आमदनी के ज्यादा विकल्प मौजूद रहें।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture