मध्यप्रदेश में चार सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी, ₹3,076.37 करोड़ खर्च होंगे
20 अक्टूबर 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में चार सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी, ₹3,076.37 करोड़ खर्च होंगे – मध्यप्रदेश कैबिनेट ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली जिलों में चार सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 3,076.37 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक में इन चार जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के साथ कई अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।
बुरहानपुर में झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना, रायसेन में बारना वृहद सिंचाई परियोजना की नहरों का विस्तार और आधुनिकीकरण, मंदसौर में कयामपुर-सीतामऊ सिंचाई परियोजना और सिंगरौली में चितरंगी सिंचाई परियोजना को हरी झंडी दी गई है। इन चार जिलों में रबी और खरीफ दोनों सीजन में सिंचाई की सुविधा बढ़ने की उम्मीद है।
नहरों के आधुनिकीकरण पर जोर
बारना वृहद सिंचाई परियोजना के मामले में नहरों के पुराने नेटवर्क का आधुनिकीकरण किया जाना है, जिससे पानी की बर्बादी कम होने की उम्मीद है। वहीं मंदसौर और सिंगरौली जैसे जिलों में नई परियोजनाएं क्षेत्र के किसानों के लिए पहली बड़ी सिंचाई सुविधा साबित हो सकती हैं।
मध्यप्रदेश में सिंचित क्षेत्र बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में रहा है, क्योंकि राज्य के कई हिस्सों में अब भी खेती बारिश पर निर्भर है। बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के जिलों में सिंचाई परियोजनाओं को लेकर किसान लंबे समय से मांग करते रहे हैं, और सिंगरौली व मंदसौर जैसे जिलों में नई परियोजनाओं की मंजूरी को इसी कड़ी में देखा जा रहा है।
कैबिनेट ने इन परियोजनाओं के लिए अलग से बजट प्रावधान का भी जिक्र किया है, ताकि काम में देरी न हो। राज्य सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
निर्माण में देरी रोकने पर जोर
सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नहरों के निर्माण और मरम्मत का काम अक्सर समय पर पूरा नहीं होता, जिसकी वजह से किसानों को परियोजना मंजूर होने के बाद भी कई साल इंतजार करना पड़ता है। इसी वजह से इन चार परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है।
राज्य के जल संसाधन विभाग को इन परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से सरकार को सौंपनी होगी। स्थानीय किसान संगठनों ने भी मांग की है कि निर्माण कार्य में देरी होने पर जवाबदेही तय की जाए, ताकि मंजूर हुई राशि का सही इस्तेमाल हो सके।
बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली के किसानों का कहना है कि अगर ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो सिंचाई पर निर्भर खेती का रकबा बढ़ेगा और फसल उत्पादन में भी सुधार आ सकता है।
मध्यप्रदेश में बड़ा हिस्सा सिंचाई के लिए नहरों, तालाबों और ट्यूबवेल पर निर्भर है, लेकिन कई जिलों में अब भी बारिश ही खेती का मुख्य सहारा बनी हुई है। जिन इलाकों में सिंचाई सुविधा पहुंचती है, वहां किसान अक्सर परंपरागत फसलों के साथ सब्जी, दलहन और तिलहन जैसी ज्यादा मुनाफे वाली फसलों की तरफ भी रुख करते हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पक्की नहरों से पानी की बचत के साथ-साथ दूर-दराज के खेतों तक भी पानी पहुंचाना आसान हो जाता है। रायसेन जैसे जिलों में बारना परियोजना की नहरों का जाल पहले से बड़ा है, इसलिए वहां आधुनिकीकरण का काम मौजूदा ढांचे को बेहतर बनाने पर केंद्रित रहेगा, जबकि सिंगरौली और मंदसौर में नई परियोजनाएं सिरे से सिंचाई सुविधा लाएंगी।
राज्य सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में इसी तरह की और सिंचाई परियोजनाओं पर भी काम किया जाएगा, ताकि प्रदेश में सिंचित क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ता रहे।
फसल विविधीकरण में भी मिलेगी मदद
जिन इलाकों में सिंचाई सुविधा पहुंचती है, वहां किसान अक्सर परंपरागत फसलों के साथ सब्जी, दलहन और तिलहन जैसी ज्यादा मुनाफे वाली फसलों की तरफ भी रुख करते हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पक्की नहरों से पानी की बचत के साथ दूर-दराज के खेतों तक भी पानी पहुंचाना आसान हो जाता है।
रायसेन जैसे जिलों में बारना परियोजना की नहरों का जाल पहले से बड़ा है, इसलिए वहां आधुनिकीकरण का काम मौजूदा ढांचे को बेहतर बनाने पर केंद्रित रहेगा, जबकि सिंगरौली और मंदसौर में नई परियोजनाएं सिरे से सिंचाई सुविधा लाएंगी। इन इलाकों के किसान लंबे समय से सिंचाई सुविधा की मांग करते रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि असिंचित इलाकों में एक बार भरोसेमंद सिंचाई सुविधा मिल जाने के बाद किसान धीरे-धीरे ज्यादा पानी और देखभाल चाहने वाली फसलें भी आजमाने लगते हैं, जिससे प्रति एकड़ आमदनी में सुधार की गुंजाइश बनती है। राज्य सरकार का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन चार जिलों में सिंचित क्षेत्र का आंकड़ा अलग से जारी किया जाएगा।
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