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राज्य कृषि समाचार (State News)

धान की 25-30 दिन की फसल में सफेद माहू का प्रकोप, वैज्ञानिकों ने बताए नियंत्रण के उपाय  

09 सितंबर 2026, भोपाल: धान की 25-30 दिन की फसल में सफेद माहू का प्रकोप, वैज्ञानिकों ने बताए नियंत्रण के उपाय – मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में धान की फसल में सफेद माहू के प्रकोप की स्थिति सामने आ रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने तथा प्रारंभिक अवस्था में ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। जिले में धान की फसल में मुख्य रूप से हरा माहू, सफेद माहू और भूरा माहू पाया जाता है। वर्तमान में जिन खेतों में धान की रोपाई को 25 से 30 दिन हुए हैं, वहां सफेद माहू का प्रकोप देखा जा रहा है।कृषि महाविद्यालय मुरझड़ के कीट वैज्ञानिक डॉ. आर.के. पांसे ने बताया कि वर्तमान में दिखाई दे रहा माहू सफेद माहू है, जिसका वैज्ञानिक नाम Sogatella furcifera है।

कृषि महाविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. उत्तम बिसेन एवं डॉ. रमेश अमुले ने किसानों के खेतों का भ्रमण कर फसल की स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान धान के पौधों के तनों पर सफेद माहू का प्रकोप पाया गया। इसके प्रभाव से पौधों की पत्तियां सुनहरे-पीले रंग की दिखाई दे रही हैं तथा पौधों की वृद्धि प्रभावित हो रही है।

समय पर उपचार से प्रकोप को किया जा सकता है नियंत्रित

वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन किसानों ने समय रहते उचित कीटनाशी का छिड़काव किया है, उनके खेतों में सफेद माहू का प्रकोप नियंत्रित होता दिखाई दे रहा है। पूर्व वर्षों में भी सफेद माहू का प्रकोप देखा गया है, लेकिन आर्थिक नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा है। इस वर्ष मौसम की अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए कीट की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे में किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण कर प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

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जैविक एवं देसी उपायों के उपयोग की भी सलाह

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सफेद माहू की रोकथाम के लिए किसान देशी काढ़ा, ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक एवं देसी उपायों का उपयोग कर सकते हैं। नीम के तेल का लगभग 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से उचित मात्रा में पानी के साथ मिलाकर छिड़काव भी किया जा सकता है।

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अधिक प्रकोप होने पर अनुशंसित कीटनाशी का करें उपयोग

सफेद माहू का प्रकोप अधिक होने पर इमिडाक्लोप्रिड 100 मिलीलीटर प्रति एकड़, थायमेथोक्साम 100 ग्राम प्रति एकड़, ब्यूप्रोफेजिन 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ अथवा पाइमेट्रोजिन 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से इनमें से किसी एक कीटनाशी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। एक समय में केवल किसी एक कीटनाशी का ही छिड़काव करें तथा उत्पाद के लेबल पर दी गई मात्रा एवं सावधानियों का पालन करें।

तना छेदक एवं तना गलन पर भी रखें नजर

धान की फसल में सफेद माहू के साथ तना छेदक का प्रकोप दिखाई देने पर क्लोरपाइरीफॉस 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से तथा तना गलन के लक्षण दिखाई देने पर हेक्साकोनाजोल 300 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है। कीटनाशी एवं फफूंदनाशी का उपयोग स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह तथा उत्पाद के पंजीकृत लेबल के अनुसार ही करने को कहा गया है। दवा का छिड़काव करते समय खेत में पर्याप्त पानी का स्तर बनाए रखने, हवा की दिशा का ध्यान रखने तथा दवा का पक्का बिल लेने की भी सलाह दी गई है।

भूरे माहू से अलग है सफेद माहू की स्थिति

वैज्ञानिकों ने बताया कि भूरा माहू सामान्यतः धान में बालियां बनने से लेकर कटाई तक अधिक प्रकोप करता है। गंभीर प्रकोप की स्थिति में प्रभावित पौधों की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। वहीं वर्तमान में दिखाई दे रहा सफेद माहू धान की प्रारंभिक अवस्था की फसल में भी पाया जा रहा है। समय रहते इसकी पहचान कर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

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