राज्य कृषि समाचार (State News)

क्या ई-टोकन की आड़ में किसानों से अधिक वसूली हुई..?

लेखक: सचिन बोन्द्रिया, मो.: 9826021837

पांढुर्ना के डबल लॉक केंद्र से शुरू हुआ विवाद

27 जून 2026, (कृषक जगत), भोपाल: क्या ई-टोकन की आड़ में किसानों से अधिक वसूली हुई..? –  यदि कोई निजी विक्रेता किसानों से खाद की बोरी पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक राशि वसूलता है, तो यह उर्वरक नियंत्रण संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। लेकिन जब ऐसे आरोप सरकारी नियंत्रण वाले मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर सामने आएं, तो सवाल केवल एक केंद्र की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरी वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठते हैं।

एमआरपी से अधिक वसूली का किसानों का आरोप

पांढुर्ना में किसानों ने आरोप लगाया है कि पुराने स्टॉक की खाद नई दरों पर बेची गई, भुगतान केंद्र प्रभारी के निजी यूपीआई खाते में लिया गया और रसीद भी नहीं दी गई। जबकि मार्कफेड के मूल्य संशोधन आदेश में स्पष्ट निर्देश थे कि मूल्य वृद्धि से पहले उपलब्ध स्टॉक का विक्रय पूर्व निर्धारित दर अथवा बोरी पर अंकित एमआरपी पर ही किया जाए।

यदि फर्टिलाइजर मॉनिटरिंग सिस्टम (एफएमएस), ई-टोकन और डिजिटल निगरानी व्यवस्था के बावजूद जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल पांढुर्ना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की उर्वरक वितरण व्यवस्था की प्रभावशीलता और निगरानी तंत्र पर व्यापक सवाल खड़े करेगा।

निजी यूपीआई खाते में भुगतान और रसीद का सवाल

कृषि विभाग के सचिव श्री निशांत वरवड़े द्वारा हाल ही में जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के अनुसार कोई भी डीलर, निर्माता अथवा आयातक निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर उर्वरक नहीं बेच सकता। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि उर्वरक बैग पर अंकित मूल्य, ई-विकास पोर्टल अथवा पीओएस मशीन में प्रदर्शित मूल्य में अंतर हो तो किसानों को कम मूल्य पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।

उर्वरकों की बढ़ी हुई कीमतों के बीच पांढुर्ना से सामने आया यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है। अनुदानित उर्वरकों की बिक्री में अनियमितताओं के आरोप प्राय: निजी विक्रेताओं तक सीमित रहे हैं, लेकिन इस बार आरोप मार्कफेड के डबल लॉक केंद्र से जुड़े हैं। किसानों के बयान और उपलब्ध दस्तावेज संकेत देते हैं कि मूल्य वृद्धि के बाद पुराने स्टॉक की खाद भी नई दरों पर बेची गई हो सकती है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल एक केंद्र की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं रहेगा।

कृषक जगत के पांढुर्ना संवाददाता के अनुसार, पांढुर्ना स्थित मार्कफेड डबल लॉक केंद्र से किसान श्री रोशन कालंबे, श्री मानसाराम खोड़े, श्री हरिदास झुड़े एवं अन्य किसानों ने पोटाश (ढ्ढक्करु रूह्रक्क) खाद खरीदी थी। किसान श्री रोशन कालंबे द्वारा चार बोरियों का भुगतान 1,975 रुपये प्रति बोरी की दर से किया गया, जिसका भुगतान केंद्र प्रभारी के निजी यूपीआई खाते में लिया गया। किसान के पास उपलब्ध ई-टोकन में भी 1,975 रुपये प्रति बोरी की राशि अंकित है, जबकि संबंधित पोटाश खाद का पूर्व निर्धारित मूल्य 1,800 रुपये था तथा बोरी पर 1,850 रुपये एमआरपी अंकित थी। इस प्रकार एक ही बोरी पर 175 रुपये अधिक वसूले जाने का मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि पुराने स्टॉक की खाद की बोरियां नए बढ़े हुए मूल्य पर बेची जा रही हैं तथा विधिवत रसीद भी नहीं दी जा रही।

निरीक्षण के बाद भी क्यों उठे नए सवाल?

गौरतलब है कि  इस प्रकरण के सामने आने से लगभग दो दिन पूर्व तत्कालीन प्रभारी कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार सुश्री प्रेक्षा पाठक एवं वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी श्री विनोद लोखंडे को डबल लॉक केंद्र के निरीक्षण के लिए भेजा गया था। निरीक्षण के दौरान किसानों ने ई-टोकन, सर्वर समस्या और खाद वितरण से जुड़ी परेशानियों की शिकायतें की थीं। इसके बावजूद पुराने स्टॉक पर नई दर से विक्रय, निजी खाते में भुगतान और बिना रसीद खाद वितरण जैसे गंभीर आरोप सामने आना कई सवाल खड़े करता है। निरीक्षण के बाद भी कथित अनियमितताएं सामने आने से निगरानी तंत्र पर प्रश्न उठ रहे हैं ।

किसानों का कहना है कि जब उन्होंने बोरी पर अंकित मूल्य और ई-टोकन की राशि में अंतर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई तो केंद्र प्रभारी द्वारा कहा गया कि ‘बोरी वापस ले आओ और नई एमआरपी वाली बोरी ले जाओ।’ उल्लेखनीय है कि किसान के ई-टोकन, भुगतान संबंधी स्क्रीन शॉट तथा अन्य दस्तावेजों की प्रतियां कृषक जगत के पास उपलब्ध हैं।

मार्कफेड के आदेश में क्या थे स्पष्ट निर्देश?- मार्कफेड द्वारा 26 मई 2026 को जारी मूल्य संशोधन आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि मूल्य वृद्धि लागू होने से पहले उपलब्ध पुराना स्टॉक पूर्व निर्धारित दर अथवा बोरी पर अंकित एमआरपी पर ही विक्रय किया जाएगा।
मूल्य वृद्धि के बाद पुराने स्टॉक की बिक्री पर विवाद- उल्लेखनीय है कि इस वर्ष यूरिया और डीएपी को छोड़कर लगभग सभी कॉम्प्लेक्स उर्वरकों, पोटाश तथा एसएसपी की कीमतों में 100 रुपये से 550 रुपये प्रति बोरी तक वृद्धि की गई थी। यह नई दरें 26 मई 2026 से लागू हुई थीं। उर्वरक समन्वय समिति द्वारा मूल्य वृद्धि का निर्णय देर से लिया गया, जिसके कारण खरीफ सीजन के लिए बड़ी मात्रा में पुराना स्टॉक पहले ही गोदामों तक पहुंच चुका था। ऐसे में यदि पुराने स्टॉक पर नई दरें वसूली गईं तो प्रदेशभर में लाखों बोरियों पर किसानों से अतिरिक्त राशि वसूली जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

जिला विपणन अधिकारी ने जांच का दिया आश्वासन- मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए छिंदवाड़ा-पांढुर्ना की जिला विपणन अधिकारी (मार्कफेड) सुश्री अंकिता गुरनानी ने कृषक जगत को बताया कि 26 मई के बाद किए गए उर्वरक विक्रय की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि ली गई है, तो उसे वापस कराया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डबल लॉक केंद्रों पर ऑनलाइन भुगतान की कोई अधिकृत व्यवस्था नहीं है तथा उर्वरकों का विक्रय नकद भुगतान के माध्यम से किया जाता है।

एफएमएस और ई-विकास पोर्टल से कैसे हो सकती है जांच?- इस मामले की जांच के लिए शासन के पास पर्याप्त डिजिटल साधन उपलब्ध हैं। इंटीग्रेटेड उर्वरक मॉनिटरिंग सिस्टम (आईएफएमएस) और ई-विकास पोर्टल के रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि मूल्य वृद्धि संबंधी आदेश जारी होने के समय किस केंद्र पर कितना पुराना स्टॉक उपलब्ध था। इसके बाद संबंधित किसानों के खरीद रिकॉर्ड का सत्यापन कर यह जांच की जा सकती है कि कहीं पुराने स्टॉक के उर्वरकों पर नई दरें तो नहीं वसूली गईं।

क्या यह एक जिले तक सीमित मामला है या व्यापक समस्या?- बढ़ती उत्पादन लागत, मौसमीय अनिश्चितताओं और सुपर अल नीनो की संभावित चुनौतियों के बीच किसान पहले ही आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में उर्वरकों की कीमतों और वितरण प्रक्रिया को लेकर उठने वाला हर सवाल सीधे उनकी लागत और आजीविका से जुड़ जाता है। यही कारण है कि पांढुर्ना का मामला केवल स्थानीय विवाद नहीं  बल्कि यह पूरे प्रदेश में उर्वरक वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन जाता है।

ई-टोकन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठते प्रश्न- मध्यप्रदेश में लागू ई-टोकन व्यवस्था उर्वरक वितरण में पारदर्शिता और सुगमता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को निष्पक्ष एवं व्यवस्थित वितरण व्यवस्था उपलब्ध कराना है, न कि मूल्य निर्धारण संबंधी भ्रम की स्थिति उत्पन्न करना। जिस स्टॉक का जो मूल्य निर्धारित है, ई-टोकन पर वही मूल्य प्रदर्शित होना चाहिए। यदि गोदाम में पुराना स्टॉक उपलब्ध है, तो उसका विक्रय भी उसी निर्धारित मूल्य पर होना चाहिए। अन्यथा तकनीक किसानों की सुविधा का साधन नहीं बल्कि भ्रम और संभावित अतिरिक्त वसूली का उपकरण बन जाएगी। इस व्यवस्था में आईएफएमएस के तहत ई-टोकन पर मूल्य अंकित होना चाहिए।

साथ ही किसानों को भी खाद खरीदते समय बोरी पर अंकित एमआरपी, प्रचलित दर और ई-टोकन पर दर्ज राशि का मिलान अवश्य करना चाहिए।

मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्षÓ घोषित किया है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए ई-टोकन, पीओएस मशीन, फर्टिलाइजर मॉनिटरिंग सिस्टम (एफएमएस) और डिजिटल निगरानी जैसी व्यवस्थाओं का खूब प्रचार किया जा रहा है। लेकिन पांढुर्ना से सामने आया एक मामला, जिसमें किसानों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले ई-टोकन पर पुरानी एमआरपी की खाद नई दरों पर बेची जा रही हो, निजी यूपीआई खातों में भुगतान लिया जा रहा हो और रसीद तक नहीं दी जा रही हो, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि किसान कल्याण के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। पांढुर्ना का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आशंका पैदा करता है कि कहीं मूल्य वृद्धि की आड़ में प्रदेशभर के किसानों से करोड़ों रुपये की अतिरिक्त वसूली तो नहीं की गई।

– 26 मई 2026 : उर्वरकों की नई दरें लागू
– 26 मई 2026 : मार्कफेड ने पुराना स्टॉक पुरानी दर पर बेचने के निर्देश दिए
– पांढुर्ना डबल लॉक केंद्र पर किसानों ने अधिक मूल्य वसूली का आरोप लगाया
– किसानों ने निजी यूपीआई खाते में भुगतान के प्रमाण प्रस्तुत किए
– जिला विपणन अधिकारी ने जांच का आश्वासन दिया

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisements