राज्य कृषि समाचार (State News)

विदिशा: लखपत यादव के पशुपालन ने लिया लाभकारी उद्यम का रूप

पशुपालन से तीन लाख तक पहुंची मासिक आय

23 जून 2026, विदिशा: विदिशा: लखपत यादव के पशुपालन ने लिया लाभकारी उद्यम का रूप – शमशाबाद विकासखंड के ग्राम वेरखेड़ी घाट निवासी श्री लखपत यादव (पुत्र श्री पूरण सिंह) ने अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता के बल पर पशुपालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी कहानी ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों से भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं।

मात्र 9वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करने वाले लखपत यादव ने लगभग एक दशक पहले केवल 1-2 भैंसों के साथ पशुपालन की शुरुआत की थी। उस समय उनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन लगभग 30 बीघा कृषि भूमि और मेहनत के प्रति अटूट विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। खेती के साथ-साथ उन्होंने पशुपालन को आय का अतिरिक्त साधन बनाया और धीरे-धीरे इसे अपने मुख्य व्यवसाय के रूप में विकसित कर लिया।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा प्रदान की गई कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सुविधाओं का लाभ उठाकर उन्होंने अपने पशुधन की नस्ल और स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार किया। परिणामस्वरूप आज उनके डेयरी फार्म में 25 मुर्रा भैंस, 23 पड़िया, 5 एचएफ गाय तथा 5 बछिया हैं। यह उपलब्धि उनके निरंतर प्रयासों और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

लखपत यादव अपने पशुओं के संतुलित आहार पर विशेष ध्यान देते हैं। वे चुनी, दलिया, तारा फीड और तिवाना जैसे पोषक आहार के साथ-साथ हरे चारे के रूप में बरसीम और गेहूं की खेती भी करते हैं। बेहतर पोषण और प्रबंधन के कारण उनके फार्म से प्रतिदिन लगभग 175 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध को वे विदिशा स्थित सुंदर डेयरी को विक्रय करते हैं, जहां उन्हें औसतन 60 रुपये प्रति लीटर का मूल्य प्राप्त होता है।

उनकी मेहनत और सुव्यवस्थित डेयरी प्रबंधन का ही परिणाम है कि आज उनकी मासिक आय लगभग तीन लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ उन्होंने अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक आदर्श स्थापित किया है। अपने डेयरी व्यवसाय को और अधिक विस्तारित करने के उद्देश्य से उन्होंने कामधेनु योजना तथा मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत आवेदन भी किया है।

लखपत यादव की सफलता की यह कहानी दर्शाती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हुए खेती के साथ पशुपालन को जोड़ें, तो कम संसाधनों से शुरू किया गया कार्य भी बड़े और लाभकारी उद्यम का रूप ले सकता है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

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