वर्षा ऋतु में फल पौध प्रसारण की विभिन्न विधियाँ
लेखक: अवधेश कुमार पटेल, के.के. देशमुख, पी.एल. अंबुलकर, कृषि विज्ञान केंद्र , डिडोरी
17 जुलाई 2026, भोपाल: वर्षा ऋतु में फल पौध प्रसारण की विभिन्न विधियाँ – वर्षा ऋतु (जून–सितंबर) पौध प्रसारण (Plant Propagation) के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान वातावरण में पर्याप्त नमी, अनुकूल तापमान तथा पौधों की सक्रिय वृद्धि होती है। इस मौसम में जड़ बनने की क्षमता अधिक होने से पौधों का जीवित रहने का प्रतिशत भी बढ़ जाता है।
1. बीज द्वारा प्रसारण (Seed Propagation)
यह लैंगिक (Sexual) प्रसारण की सबसे सामान्य विधि है। इसका उपयोग वन पौधों, सब्जियों, फूलों तथा अनेक फलदार पौधों के उत्पादन में किया जाता है। वर्षा ऋतु में मिट्टी में पर्याप्त नमी होने के कारण बीजों का अंकुरण बेहतर होता है।
उदाहरण:
नीम, करंज, अमलतास, सहजन, पपीता।
लाभ:
- कम लागत में अधिक संख्या में पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
- पौधों में जड़ तंत्र मजबूत विकसित होता है।
- बड़े स्तर पर पौध उत्पादन के लिए उपयुक्त।
हानियाँ:
- मातृ पौधे के समान गुण हमेशा प्राप्त नहीं होते।
- फल देने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है।
2. कलम द्वारा प्रसारण (Stem Cutting)
यह सबसे सरल एवं लोकप्रिय अलैंगिक (Vegetative) प्रसारण विधि है, जिसमें पौधे की शाखा से नया पौधा तैयार किया जाता है।
प्रक्रिया-
- स्वस्थ एवं परिपक्व 15–20 सेमी लंबी शाखा चुनें।
- नीचे की पत्तियाँ हटा दें।
- आवश्यकता होने पर रूटिंग हार्मोन (IBA या NAA) का प्रयोग करें।
- कलम को रेतीली या बलुई-दोमट मिट्टी में लगाएँ।
- नियमित नमी बनाए रखें तथा तेज धूप से बचाएँ।
उपयुक्त पौधे:
- अनार, अंगूर, शहतूत, गुलाब, बोगनवेलिया, गुड़हल
लाभ:
- मातृ पौधे के समान गुण प्राप्त होते हैं।
- पौधे जल्दी तैयार होते हैं।
- फल एवं फूल जल्दी प्राप्त होते हैं।
3. गूटी (Air Layering / Gootee)
वर्षा ऋतु में गूटी बाँधने की सफलता सर्वाधिक रहती है क्योंकि वातावरण में नमी अधिक होती है।
प्रक्रिया
- एक वर्ष पुरानी स्वस्थ शाखा चुनें।
- लगभग 2–3 सेमी छाल हटाएँ।
- उस स्थान पर नम काई (Moss) या नम मिट्टी लगाकर पॉलीथीन से बाँध दें।
- 30–60 दिनों में जड़ें बनने पर शाखा काटकर रोप दें।
उपयुक्त पौधे:
- लीची, अमरूद, नींबू, चीकू, अनार
लाभ:
- सफलता प्रतिशत अधिक।
- पौधे शीघ्र फल देना प्रारंभ करते हैं।
- मातृ पौधे के गुण सुरक्षित रहते हैं।
4. चश्मा चढ़ाना (Budding)
इस विधि में अच्छी किस्म की एक कली (Bud) को दूसरे पौधे (रूटस्टॉक) पर लगाया जाता है।
उपयुक्त समय: जुलाई–अगस्त
उपयुक्त फसलें:
- नींबू वर्गीय फल, गुलाब, बेर
लाभ:
- उत्कृष्ट किस्मों का गुण सुरक्षित रहता है।
- कम समय में गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार होते हैं।
- पौधों की वृद्धि एवं उत्पादन अच्छा रहता है।
5. कलम बाँधना (Grafting)
इस विधि में दो अलग-अलग पौधों के भागों (स्कायन एवं रूटस्टॉक) को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है।
प्रमुख प्रकार
- वेज ग्राफ्टिंग (Wedge Grafting)
- सॉफ्टवुड ग्राफ्टिंग (Softwood Grafting)
- एप्रोच ग्राफ्टिंग (Approach Grafting)
उपयुक्त पौधे:
- आम, कटहल, अमरूद, काजू
लाभ:
- उच्च गुणवत्ता वाले पौधे प्राप्त होते हैं।
- जल्दी फल देने वाले पौधे तैयार होते हैं।
- रोग एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति सहनशीलता बढ़ सकती है।
6. सकर एवं ऑफसेट द्वारा प्रसारण
कुछ पौधों में जड़ों या तनों के पास नए पौधे (Suckers/Offsets) निकलते हैं, जिन्हें अलग करके रोप दिया जाता है।
उदाहरण:
- केला, लेमनग्रास, पुदीना
लाभ:
- सरल एवं कम लागत वाली विधि।
- पौधे शीघ्र स्थापित हो जाते हैं।
7. राइजोम, कंद एवं बल्ब द्वारा प्रसारण
भूमिगत तनों एवं भंडारण अंगों द्वारा भी पौध प्रसारण किया जाता है।
उदाहरण:
- अदरक – राइजोम
- हल्दी – राइजोम
- अरबी – कंद
- प्याज – बल्ब
- लहसुन – कलियाँ
लाभ:
- पौधे जल्दी बढ़ते हैं।
- उत्पादन समान एवं गुणवत्तापूर्ण होता है।
वर्षा ऋतु में पौध प्रसारण हेतु आवश्यक सावधानियाँ
- केवल स्वस्थ एवं रोगमुक्त मातृ पौधों का चयन करें।
- पौधशाला में जल निकास (Drainage) की उचित व्यवस्था रखें।
- पौधशाला में लगभग 50% शेडनेट का उपयोग करें।
- अधिक वर्षा की स्थिति में जलभराव न होने दें।
- आवश्यकता अनुसार फफूंदनाशी का प्रयोग करें।
- पौधों में नियमित नमी बनाए रखें, लेकिन अत्यधिक सिंचाई से बचें।
- पौधों को तेज हवा एवं सीधे वर्षा के प्रहार से सुरक्षित रखें।
- पौधशाला को खरपतवार एवं कीटों से मुक्त रखें।
निष्कर्ष
वर्षा ऋतु पौध प्रसारण के लिए सबसे अनुकूल मौसम है। इस अवधि में बीज, कलम, गूटी, चश्मा चढ़ाना, ग्राफ्टिंग, सकर तथा राइजोम द्वारा प्रसारण अत्यधिक सफल रहता है। अनुकूल नमी, तापमान तथा तेज वृद्धि के कारण पौधों में जड़ बनने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे स्वस्थ, गुणवत्तापूर्ण एवं अधिक जीवित रहने वाली पौध तैयार की जा सकती है। उचित तकनीकों एवं सावधानियों का पालन कर किसान एवं उद्यान प्रेमी कम समय में उत्कृष्ट पौध उत्पादन कर सकते हैं।
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