राज्य कृषि समाचार (State News)

उज्जैन: खरीफ फसल बुआई के अंतर्गत किसानों को सलाह

27 जून 2026, उज्जैन: उज्जैन: खरीफ फसल बुआई के अंतर्गत किसानों को सलाह – उपसंचालक कृषि श्री यू.एस. तोमर ने बताया कि खरीफ मौसम की फसल बुवाई का समय आ गया है। क्षेत्र से प्राप्त सूचना के अनुसार कहीं-कहीं बुवाई लायक वर्षा भी हो चुकी है। अतः किसानों द्वारा बुवाई का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। चूंकि जिले में खरीफ मौसम में सोयाबीन फसल की बुवाई मुख्य रूप से की जाती है।

 कृषि विभाग द्वारा निम्नानुसार सलाह दी जा रही है।  मानसून की वर्षा के आगमन पर सोयाबीन की बुवाई हेतु मध्य जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक का उपयुक्त समय है। नियमित मानसून के प्रवाह में लगभग 4 इंच वर्षा होने के बाद ही बुवाई उचित होती है। मानसून पूर्व वर्षा के आधार पर बुवाई करने से सूखे का सामना करना पड़ सकता है जिससे फसल को नुकसान हो सकता है। बीज व्यवस्था स्वयं के पास उपलब्ध बीज का अंकुरण परीक्षण कर लेवें। कम से कम 70 प्रतिशत अंकुरण क्षमता वाला बीज ही बुवाई के लिए रखें। यदि बाहर से उन्नत बीज लाते हैं तो विश्वसनीय/विश्वासपात्र संस्थान से ही खरीदें।

 किसान भाई अपनी जोत के अनुसार कम से कम 2-3 किलोमीटर की दूरी पर बुवाई करें। जिले में अनुशंसित किस्में निम्न हैं—    RVSM-2011-35, JS 20-34, JS 20-29, RVS 2001-04, NRC-86, NRC-138, NRC-127, NRC-142, नवीन किस्में JS-2172, JS-2433, JS-2303, NRC-150 आदि। बीज उपचारबुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य करें।

बीजोपचार हेतु निम्न दवाओं का प्रयोग करें—    – पूर्वनिर्मित फफूंदनाशक और कीटनाशक दवा (एजोक्सिस्ट्रोबिन 2.5% + थायोमिथॉक्साम 25%) @ 5 मिली./किग्रा. बीज    – अथवा थायोफिनेट मिथाइल 45% + पायराक्लोस्ट्रोबिन 5% @ 2.5 मिली./किग्रा. बीज    – अथवा कार्बेन्डाजिम 37.5% + थायरम 37.5% @ 3 ग्राम/किग्रा. बीज    – अथवा कार्बेन्डाजिम 25% + मेंकोजेब 50% @ 3 ग्राम/किग्रा. बीज    उपचारित बीज को थोड़ी देर छाया में सुखाकर तत्पश्चात कीटनाशक थायोमिथॉक्साम 30% @ 5 मिली./किग्रा. बीज अथवा इमिडाक्लोप्रिड 70% @ 5 ग्राम/किग्रा. बीज से उपचारित करें।  

 इसके बाद एन.पी.के. तरल जैव उर्वरक कंसोर्टिया से भी (5-10 मिली./किग्रा. बीज) बीजोपचार करके बीज सूखने दें तथा तत्पश्चात बुवाई करें।    गत वर्ष जहां पीला मोजेक की समस्या रही है, वहां पीला मोजेक रोग की रोकथाम हेतु अनुशंसित कीटनाशक थायोमिथॉक्साम 30% @ 10 मिली./किग्रा. बीज अथवा इमिडाक्लोप्रिड 48% @ 1.2 मिली./किग्रा. बीज से अवश्य उपचारित करें। इसके बाद जैव उर्वरक (राइजोबियम एवं पी.एस.बी. कल्चर) 5 से 10 ग्राम/किग्रा. बीज के मान से अनिवार्य रूप से उपयोग करें।बीज दर अनुशंसित बीज दर 70-75 किग्रा./हेक्टेयर है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 4 लाख पौधे संख्या होनी चाहिए। कतार से कतार की दूरी कम से कम 14-18 इंच रखें। इस वर्ष कम वर्षा की संभावना को देखते हुए यदि संभव हो तो रेज्ड बेड/ब्रॉड बेड विधि से फसल की बुवाई करें। इस विधि से फसल बुवाई करने से कम वर्षा एवं अधिक वर्षा दोनों स्थितियों में फसल को नुकसान नहीं होता है।

 खाद/उर्वरक   नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं सल्फर की मात्रा क्रमशः 25:60:40:20 किग्रा./हेक्टेयर के मान से उपयोग करें। इस हेतु निम्नानुसार विकल्पों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं –  1. एन.पी.के. (12:32:16) 200 किग्रा. + 25 किग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर    2. 56 किग्रा. यूरिया, 375 किग्रा. सुपर फास्फेट, 67 किग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश, + 25 किग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर    3. डी.ए.पी. 133 किग्रा. एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किग्रा. + 25 किग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर। फसल बुवाई यदि (डबल पेटी) सीड कम फर्टिलाइजर सीड ड्रिल से करते हैं तो बहुत अच्छा है, जिसमें उर्वरक एवं बीज अलग-अलग रहता है और उर्वरक बीज के नीचे गिरता है तो लगभग 60 से 70 प्रतिशत उपयोग हो जाता है। डबल पेटी वाली मशीन न हो तो अंतिम जुताई के समय पर अनुशंसित उर्वरक का उपयोग करें।अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय या संबंधित क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें।

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