राज्य कृषि समाचार (State News)

छतरपुर में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

13 जून 2026, छतरपुर: छतरपुर में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित – कलेक्टर पार्थ जैसवाल के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिला खनिज प्रतिष्ठान मद से नवाचार समेकित खेती के विकल्प के रूप में मधुमक्खी पालन गतिविधि को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, नौगांव में गत दिनों  तीन दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

 कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नमः शिवाय अरजरिया, जनपद पंचायत अध्यक्ष हेमलता पाठक एवं शशिकांत अग्निहोत्री ने कृषि सखी महिलाओं, किसानों और अधिकारियों को संबोधित किया। जिला पंचायत सीईओ श्री अरजरिया ने कहा कि मधुमक्खी पालन ग्रामीण आजीविका संवर्धन और स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम है, जिससे किसानों और महिला समूहों की आय में वृद्धि हो सकती है।

जनपद अध्यक्ष श्रीमती हेमलता पाठक ने इसे कृषि के साथ किया जाने वाला लाभकारी पूरक व्यवसाय बताते हुए किसानों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया। वहीं शशिकांत अग्निहोत्री ने विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है।

 जिला परियोजना प्रबंधक श्याम गौतम ने कृषि सखी महिलाओं को मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन एवं विपणन की जानकारी देते हुए इसे महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बताया। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने आधुनिक तकनीकों के उपयोग से गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन और बेहतर आय की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

 कार्यक्रम के समापन सत्र में वैज्ञानिक (उद्यानिकी) डॉ. कमलेश अहिरवार ने कहा कि मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फसलों के परागण के माध्यम से कृषि उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने किसानों से फसल उत्पादन के साथ मधुमक्खी पालन अपनाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मधुमक्खी कॉलोनी प्रबंधन, रानी मधुमक्खी की पहचान, शहद निष्कर्षण, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा विपणन संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। स्रोत संस्था एसके एग्रो के मास्टर ट्रेनर जय प्रकाश ने प्रशिक्षण की विषयवस्तु की जानकारी दी।

महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया अवसर –  यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि सखी महिलाओं और किसानों को मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों से जोड़कर स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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