भारत का कुल खाद्य उत्पादन 376 मिलियन टन पहुंचा
13 जून 2026, इंदौर: भारत का कुल खाद्य उत्पादन 376 मिलियन टन पहुंचा – भारत के कृषि क्षेत्र ने पिछले एक दशक में औसतन 4.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की है और देश का कुल खाद्य उत्पादन लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र में यह जानकारी दी।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह उपलब्धि देश के किसानों की मेहनत, कृषि क्षेत्र में बढ़ते निवेश, तकनीकी प्रगति तथा सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि भारत में गेहूं उत्पादन लगभग 118 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन का आंकड़ा पार कर चुका है। इसके अलावा देश का मत्स्य उत्पादन भी 19 मिलियन टन से अधिक हो गया है, जो कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में व्यापक प्रगति को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां भारत की खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि विकास के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करती हैं।
कृषि और संबद्ध क्षेत्र आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं। देश के लगभग 43 प्रतिशत लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। चौहान ने कहा कि बेहतर बीजों के विकास, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल सेवाओं और किसान कल्याण योजनाओं ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की कृषि विकास रणनीति के केंद्र में छोटे और सीमांत किसान हैं। देश के लगभग 87 प्रतिशत किसान इसी वर्ग से आते हैं, इसलिए उनकी आर्थिक मजबूती और सशक्तिकरण समावेशी विकास और खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।टिकाऊ कृषि पर जोर देते हुए चौहान ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए उर्वरकों का संतुलित उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता को सुरक्षित रखना और रासायनिक इनपुट पर अत्यधिक निर्भरता कम करना दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण पर ब्रिक्स देशों का मंथन
ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने सदस्य देशों के बीच कृषि सहयोग को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।
प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक कृषि साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को आगे बढ़ा रहा है।
चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव, कृषि लागत में वृद्धि और बाजार की अनिश्चितताएं आज सभी देशों के किसानों के सामने समान चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा।
उन्होंने कहा, “यदि छोटे और सीमांत किसान आर्थिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनते हैं, तो दुनिया की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत और लचीली होगी।
”केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स देशों से तकनीकी सहयोग, नीति संवाद और सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि ब्रिक्स देशों के सामूहिक प्रयास वैश्विक कृषि को अधिक टिकाऊ, समावेशी और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बैठक में खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि, नवाचार, टिकाऊ खेती और छोटे किसानों के सशक्तिकरण जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा की जा रही है।
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