संपूर्ण देश में लागू होगी उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली
लेखक: सचिन बोंद्रिया
30 मई 2026, इंदौर: संपूर्ण देश में लागू होगी उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली – देश में उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान-केंद्रित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ई-टोकन आधारित नई उर्वरक वितरण प्रणाली को सम्पूर्ण देश में लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग ने 29 मई 2026 को सभी लीड फर्टिलाइजर सप्लायर्स (LFS) को पत्र जारी कर नई व्यवस्था के संचालन, तकनीकी तैयारियों और फील्ड स्तर पर समन्वय के निर्देश दिए हैं।
विभाग के पत्र क्रमांक F.No.17011/06/2026-DBT (E.41525) के अनुसार किसान मोबाइल ऐप के जरिए अपनी फसल और भूमि का विवरण दर्ज कर उर्वरक की अग्रिम बुकिंग कर सकेंगे। इसके बाद किसान को QR कोड अथवा बुकिंग आईडी जारी होगी। खुदरा विक्रेता पीओएस मशीन के माध्यम से QR कोड स्कैन कर उपलब्ध स्टॉक के आधार पर उर्वरक वितरण करेंगे। इससे बुकिंग से लेकर वितरण तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन निगरानी में रहेगी और किसानों को तय मात्रा में समय पर खाद उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।
उर्वरक विभाग के अनुसार इस नई व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट देश के 31 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 62 जिलों में शुरू किया जा रहा है। विशेष बात यह है कि मध्यप्रदेश को इसमें पूरे राज्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना सहित अन्य राज्यों के चयनित जिलों को भी पायलट में शामिल किया गया है। विभाग ने उर्वरक कंपनियों को प्रत्येक जिले में जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करने, खुदरा विक्रेताओं के लाइसेंस और पीओएस पंजीयन सुनिश्चित करने तथा पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं।
नई ई-टोकन प्रणाली का उद्देश्य किसानों की वास्तविक जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराना, वितरण व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना और भीड़ व अनिश्चितता को कम करना है। किसान पहले से बुकिंग कर अपनी सुविधा के अनुसार चयनित विक्रेता के यहां उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इससे स्टॉक की वास्तविक जानकारी भी सामने रहेगी और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। पूर्व से ही मध्य प्रदेश में लागू इस व्यवस्था के क्रियान्वयन में कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं, जिनके तेज़ी से निराकरण के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
व्यावसायिक सूत्रों के अनुसार यह योजना उर्वरक सब्सिडी बचाने, विदेशी मुद्रा संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग बढ़ाने के साथ-साथ नकली खाद की रोकथाम में भी मददगार साबित हो सकती है। QR कोड आधारित ट्रैकिंग और पीओएस सत्यापन से असली उर्वरक की पहचान आसान होगी तथा किसानों तक प्रमाणित और निर्धारित मूल्य पर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इससे किसानों के हिस्से का उर्वरक अन्य उपयोगों में जाने पर भी रोक लगेगी।
हालांकि जमीनी स्तर पर अभी गिरदावरी की विसंगतियां, सर्वर ब्लॉक होने की शिकायतें और तकनीकी आधुनिकीकरण का पूरी तरह प्रभावी स्वरूप सामने आना बाकी है। खरीफ सीजन के दौरान इन चुनौतियों का समय रहते समाधान होने पर ही इस नई व्यवस्था का वास्तविक लाभ किसानों तक सुचारू रूप से पहुंच सकेगा। किसानों और उर्वरक व्यवसाय से जुड़े लोगों की नजर अब इस बात पर है कि केंद्र और राज्य स्तर पर तकनीकी अड़चनों का समाधान कितनी तेजी से होता है और नई व्यवस्था व्यवहार में कितनी सरल बन पाती है।
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