दलहन और तिलहन के लिए अलग मिशन बनाए गए, खरीफ 2026 रणनीति पर भारत का राष्ट्रीय मंथन
बीज उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन, कृषि ऋण, डिजिटल कृषि और छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित चर्चा
ग्लोबल एग्रीकल्चर न्यूज़ डेस्क
29 मई 2026, नई दिल्ली: दलहन और तिलहन के लिए अलग मिशन बनाए गए, खरीफ 2026 रणनीति पर भारत का राष्ट्रीय मंथन – भारत सरकार ने दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय मिशन स्थापित किए हैं। इन मिशनों पर राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 सम्मेलन में विशेष रूप से चर्चा की जा रही है, जहां केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक तथा नीति-निर्माता आगामी खरीफ सीजन की रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्यों के साथ बेहतर बीज उपलब्धता, बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ाने, प्रदर्शन कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा प्रसंस्करण अवसंरचना विकसित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इन मिशनों का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना, किसानों को बेहतर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना तथा देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करना है।
बीज गुणवत्ता और उत्पादन वृद्धि पर जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि सम्मेलन में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उन्नत किस्मों को किसानों तक पहुंचाने की रणनीतियों पर चर्चा की जा रही है। राज्यों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने वाले कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन की सफलता के लिए समय पर बीज उपलब्धता और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का विस्तार महत्वपूर्ण है।
बागवानी और कपास क्षेत्र भी चर्चा के केंद्र में
सम्मेलन में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर तथा कॉटन मिशन की भी समीक्षा की जा रही है।
कृषि मंत्रालय बागवानी क्षेत्र में विकास की संभावनाओं और कपास उत्पादन को मजबूत बनाने के उपायों पर राज्यों के साथ चर्चा कर रहा है। इन क्षेत्रों को कृषि विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन कृषि के सामने बड़ी चुनौती
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए एक प्रमुख चुनौती बनता जा रहा है। अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और बदलते मौसम चक्र खेती की परिस्थितियों को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में ऐसे उपायों पर विचार किया जा रहा है जिनसे कृषि को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाया जा सके तथा किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों से बेहतर सुरक्षा मिल सके।
प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि जानकारी के अभाव में कई किसान आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का उपयोग करते हैं, जिससे लागत बढ़ती है और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस कारण मृदा स्वास्थ्य कार्ड और वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति
भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) पर चर्चा की जा रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सीमित भूमि पर अधिक आय प्राप्त करने के लिए फसल, पशुपालन और अन्य कृषि गतिविधियों को जोड़ने वाले मॉडल विकसित करना आवश्यक है। इससे किसानों की आय के स्रोतों में विविधता आएगी और जोखिम भी कम होगा।
कृषि ऋण और अवसंरचना विकास पर चर्चा
कृषि क्षेत्र में पर्याप्त निवेश और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना भी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल है।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को केवल खेती के लिए ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद प्रबंधन और जोखिम प्रबंधन के लिए भी वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में कृषि ऋण वितरण में अभी भी असमानता मौजूद है।
सम्मेलन में कृषि अवसंरचना कोष (Agri Infrastructure Fund), प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA), डिजिटल कृषि कार्यक्रमों, किसान आईडी और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा की जा रही है।
खरीफ 2026 के लिए संयुक्त रोडमैप तैयार होगा
सम्मेलन के दौरान राज्यों को विभिन्न कार्य समूहों में विभाजित कर कृषि से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। इन चर्चाओं के निष्कर्ष राज्य कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
कृषि मंत्रालय के अनुसार इन विचार-विमर्शों के आधार पर खरीफ 2026 के लिए केंद्र और राज्य सरकारों का एक संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिसमें उत्पादन वृद्धि, संसाधन प्रबंधन और किसानों को बेहतर सहायता प्रदान करने की रणनीतियां शामिल होंगी।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सम्मेलन में “खेत बचाओ अभियान” पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसके माध्यम से कृषि उत्पादन लक्ष्यों की प्राप्ति और कृषि संसाधनों के संरक्षण के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

