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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत का खाद्यान्न उत्पादन 2025-26 में 376.56 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर

29 मई 2026, नई दिल्ली: भारत का खाद्यान्न उत्पादन 2025-26 में 376.56 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर –  भारत ने वर्ष 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 सम्मेलन के दौरान बताया कि देश का कुल अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 376.56 मिलियन टन (3,765.63 लाख टन) तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18.8 मिलियन टन (188 लाख टन) अधिक है।

नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में कृषि मंत्री ने कहा कि देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय में सुधार करना और नागरिकों को पौष्टिक खाद्य उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा और आगामी रणनीति तय करने के लिए केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधि दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

खाद्यान्न उत्पादन में ऐतिहासिक उपलब्धि

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 2025-26 में देश ने खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में अब तक का सर्वाधिक स्तर हासिल किया है। उन्होंने बताया कि धान उत्पादन 154.02 मिलियन टन (1,540.24 लाख टन) तक पहुंचने का अनुमान है, जो देश के लिए नया रिकॉर्ड है।

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इसी प्रकार गेहूं उत्पादन 120.66 मिलियन टन (1,206.57 लाख टन) तथा मक्का उत्पादन 55.09 मिलियन टन (550.92 लाख टन) रहने का अनुमान है। कृषि मंत्री ने कहा कि इन प्रमुख फसलों के उत्पादन में वृद्धि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान, नई विकसित किस्मों और कृषि क्षेत्र में लागू सरकारी योजनाओं का परिणाम है।

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तिलहन उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर

खाद्यान्न के साथ-साथ तिलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार के अनुसार वर्ष 2025-26 में कुल तिलहन उत्पादन 43.06 मिलियन टन (430.59 लाख टन) रहने का अनुमान है।

मूंगफली उत्पादन 13.07 मिलियन टन (130.74 लाख टन) और सरसों-राई उत्पादन 13.77 मिलियन टन (137.68 लाख टन) रहने का अनुमान है। कृषि मंत्री ने कहा कि दलहन उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है तथा आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की संभावना है।

खरीफ 2026 की तैयारियों पर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन

राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के प्रतिनिधि तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने इसे ‘टीम एग्रीकल्चर’ का सम्मेलन बताते हुए कहा कि कृषि राज्य का विषय है और बेहतर परिणाम तभी प्राप्त हो सकते हैं जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करें। सम्मेलन में खरीफ और रबी फसलों की तैयारी, बीज उपलब्धता, कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और राज्यों की आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन से पहले राज्यों के साथ वर्चुअल बैठकें आयोजित की गई थीं, जिसके आधार पर प्रत्येक राज्य अपनी तैयारियों और चुनौतियों के साथ इस मंथन में भाग ले रहा है।

क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि देश की कृषि परिस्थितियां और जलवायु विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हैं। इसी कारण राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ-साथ क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों की शुरुआत भी की गई है।

अब तक जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत के लिए दो और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा निर्धारित कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर भी सम्मेलन आयोजित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

दलहन, तिलहन और बागवानी पर विशेष फोकस

सम्मेलन में दलहन और तिलहन मिशनों की प्रगति, बेहतर बीजों की उपलब्धता, बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ाने, प्रदर्शन कार्यक्रमों और प्रसंस्करण सुविधाओं को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।

इसके अलावा मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर तथा कॉटन मिशन की प्रगति और भविष्य की रणनीतियों की भी समीक्षा की जा रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि बागवानी क्षेत्र में विकास की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं और यह किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ कृषि पर चर्चा

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। बदलते मौसम, अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान का प्रभाव खेती पर पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित उर्वरक उपयोग और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के उपायों पर भी चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में कई किसान उर्वरकों का असंतुलित उपयोग करते हैं, इसलिए संतुलित पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देना आवश्यक है।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि देश में अधिकांश जोतें छोटी और सीमांत श्रेणी की हैं। ऐसे में एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कृषि ऋण की उपलब्धता में राज्यों के बीच मौजूद असमानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध कराना आवश्यक है। सम्मेलन में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि अवसंरचना कोष (Agri Infrastructure Fund), पीएम-आशा योजना, डिजिटल कृषि, किसान आईडी तथा किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हो रही है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार सम्मेलन के दौरान राज्यों को विभिन्न समूहों में विभाजित कर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद राज्य कृषि मंत्रियों की उपस्थिति में प्रस्तुतियां दी जाएंगी और खरीफ 2026 के लिए केंद्र एवं राज्यों का संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ पर भी विस्तार से चर्चा होगी और केंद्र तथा राज्य सरकारें मिलकर निर्धारित कृषि लक्ष्यों को हासिल करने के लिए समन्वित प्रयास करेंगी।

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