राज्य कृषि समाचार (State News)

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रचार-प्रसार के लिए कलेक्टर ने दिखाई हरी झंडी

07 अगस्त 2026, पांढुर्नाप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रचार-प्रसार के लिए कलेक्टर ने दिखाई हरी झंडी –  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर पांढुर्णा से कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल बीमा प्रचार वाहन अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री विनोद लोखंडे, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के जिला प्रतिनिधि श्री सोनू वड़ोले सहित कृषि विभाग एवं बीमा कंपनी के अधिकारी उपस्थित रहे।

 प्रचार वाहन जिले के दोनों विकासखंडों पांढुर्णा एवं सौसर के विभिन्न अधिसूचित हल्कों का भ्रमण कर ऋणी एवं अऋणी किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी देगा तथा अधिसूचित फसलों का पंजीयन कराने के लिए प्रेरित करेगा। खरीफ मौसम 2026 के दौरान यह वाहन व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाते हुए किसानों को योजना के लाभ एवं बीमा प्रक्रिया से अवगत कराएगा।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2026-27 में मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली एवं कपास जैसी अधिसूचित फसलों का बीमा कराया जा सकता है। योजना का उद्देश्य अल नीनो सहित प्राकृतिक आपदाओं, अतिवृष्टि, सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़ एवं कीट प्रकोप से फसलों को होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा एवं मुआवजा उपलब्ध कराना है।

कृषि विभाग एवं कृषि बीमा कंपनी ने किसानों से अपील की है कि वे 17 अगस्त 2026 तक अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा अनिवार्य रूप से करा लें तथा अंतिम तिथि का इंतजार न करें। समय पर बीमा कराने से प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली फसल क्षति की स्थिति में आर्थिक सहायता प्राप्त की जा सकेगी। ऋणी किसान अपने संबंधित बैंक अथवा पैक्स (PACS) के माध्यम से फसल बीमा करा सकते हैं। वहीं अऋणी किसानों को बीमा कराने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि संबंधी दस्तावेज (खसरा, बी-1 अथवा पटवारी प्रतिवेदन) तथा आवश्यक होने पर स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा।

श्री विनोद लोखंडे , वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी , पांढुर्ना ने  कृषक जगत को बताया कि  प्रचार वाहन 4  से 9  अगस्त तक पांढुर्ना तहसील एवं 10  अगस्त से 17 अगस्त तक सौंसर तहसील के  विभिन्न गांवों में भ्रमण कर किसानों को फसल बीमा करने के लिए जागरूक करेगा। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान अपने निकटतम कृषि विभाग, कृषि विस्तार अधिकारी, बैंक, पैक्स अथवा कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से संपर्क कर सकते हैं। कृषि विभाग ने किसानों से “छोटा सा प्रीमियम, बड़ी सुरक्षा” के संदेश के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है।

 उल्लेखनीय है कि गत 19 जुलाई को जगदीशपुर में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राज्य के 10. 54  लाख किसानों के खातों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2025 की दावा राशि 1460. 25 करोड़ रु  ट्रांसफर  किए थे । इस संबंध में  एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के पांढुर्ना  जिला प्रतिनिधि श्री सोनू वड़ोले से पांढुर्ना जिले के किसानों के दावा राशि वितरण के संबंध में जानकारी चाही, तो वे टालमटोल करने लगे। कृषि विभाग का कहना है कि दावा राशि के संबंध में जानकारी बीमा कम्पनी द्वारा ही दी जाएगी। जबकि  पड़ोसी जिले छिंदवाड़ा में  किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2025  के कुल लाभान्वित आवेदन और कुल दावा राशि का खुलासा कर दिया है , लेकिन पांढुर्ना जिले में अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है।  किसानों का कहना है कि वर्ष 2016  से 2018 तक बीमा दावा राशि की सूची कृषि विभाग , बैंक एवं  सहकारी समितियों में चस्पा की जाती थी , उसे पुनः शुरू कर दावा राशि की सूचियां  संबंधित कार्यालयों के सूचना पटल पर चस्पा की जाएं , ताकि किसानों को अपनी दावा राशि देखने में आसानी हो। इसी तरह किसानों ने 2018 तक जारी उद्यानिकी फसलों   संतरा , मिर्च , टमाटर , गोभी  आदि के  फसल बीमा  को पुनः शुरू करने की भी मांग की है।

 जवाहर वार्ड , पांढुर्ना के पार्षद श्री दुर्गेश उइके ने किसानों की समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए कहा है कि किसानों के खातों से  फसल बीमा का प्रीमियम तो बैंकों और सहकारी समितियों द्वारा हर साल काट लिया जाता है , लेकिन बीमा किस कम्पनी ने किया है,इसका पता किसानों को नहीं रहता , क्योंकि उनके हाथों में न तो पॉलिसी होती है और न ही कोई पावती । ऐसे में फसल में प्राकृतिक आपदा होने पर मुआवजा दावे के लिए किसानों को बहुत परेशानी होती है।  बीमा पॉलिसी का किसानों को व्यक्तिशः वितरण नहीं होना संबंधित बीमा कम्पनी /बैंक और सहकारी समिति की घोर प्रशासनिक लापरवाही है। फसल बीमा से संबंधित दस्तावेज किसानों को देना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

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