राज्य कृषि समाचार (State News)

कपास आयात पर शुल्क खत्म: उद्योग को राहत, किसानों की बढ़ी चिंता

लेखक: सचिन बोन्द्रिया

31 मई 2026, इंदौर: कपास आयात पर शुल्क खत्म: उद्योग को राहत, किसानों की बढ़ी चिंता – केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर लगने वाला सीमा शुल्क और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) पूरी तरह समाप्त कर दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार यह छूट 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने इसे जनहित में लिया गया फैसला बताया है। 

अधिसूचना के मुताबिक सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम की हेडिंग 5201 के तहत आने वाले आयातित कपास को इस अवधि में पूरी तरह शुल्क मुक्त रखा जाएगा। केंद्र सरकार के इस फैसले को कपड़ा और स्पिनिंग उद्योग के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। उद्योग जगत का कहना है कि पिछले कुछ समय से कच्चे माल की उपलब्धता और कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह निर्णय मिलों के लिए सहायक साबित होगा।

इंदौर सहित मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कपास व्यापारियों के अनुसार शुल्क हटने से आयात आसान होगा और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। इससे टेक्सटाइल उद्योग को कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर दबाव कम पड़ सकता है।

दूसरी ओर कपास उत्पादक किसानों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की तैयारी के बीच आयात को छूट मिलने से नई फसल आने पर स्थानीय बाजार भाव प्रभावित हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य मध्यम रेशा के लिए ₹8,267 प्रति क्विंटल और लंबा रेशा के लिए ₹8,667 प्रति क्विंटल तय किया है।

मध्यप्रदेश की प्रमुख मंडियों में फिलहाल कपास के भाव MSP के आसपास हैं। खरगोन कृषि उपज मंडी में कपास के भाव ₹7,915 से ₹8,800 प्रति क्विंटल, खेतिया (बड़वानी) में ₹8,565 से ₹9,100, कुक्षी (धार) में करीब ₹8,450 से ₹9,000, जबकि जोबट (अलीराजपुर) में करीब ₹7,500 प्रति क्विंटल दर्ज किए गए हैं।

किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि जिन मंडियों में भाव समर्थन मूल्य से ऊपर हैं, वहां किसानों को राहत है, लेकिन आयातित कपास की आवक बढ़ने पर बाजार में दबाव बन सकता है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि आयात को छूट देने के साथ मंडियों में समर्थन मूल्य पर प्रभावी खरीदी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि नई फसल आने पर किसानों को उचित दाम मिल सके।

कृषि और व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मानसून, घरेलू उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल कपास के भाव तय करेगी। फिलहाल केंद्र के इस फैसले से उद्योग को राहत जरूर मिली है, लेकिन किसानों की नजर अब इस बात पर है कि नई फसल तक बाजार का रुख किस दिशा में जाता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global

Advertisements