बीजोपचार की दवाई से सोयाबीन फसल प्रभावित, किसान ने कीटनाशक पीया
संबंधित डीलर और कंपनी संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज़
11 जुलाई 2026, इंदौर: बीजोपचार की दवाई से सोयाबीन फसल प्रभावित, किसान ने कीटनाशक पीया – कृषि आदानों को लेकर किसानों को हर फसल के दौरान अग्निपरीक्षा देनी पड़ती है। कहीं अमानक / नकली उर्वरक मिलता है , तो कहीं कृषि दवाइयां। ऐसा ही एक ताज़ा मामला धार जिले की बदनावर तहसील का सामने आया है , जहां वरदान नामक बीजोपचार दवाई से सोयाबीन के बीजों का उपचार करने पर बुवाई के बाद कानवन क्षेत्र के आसपास अंकुरित सोयाबीन की वृद्धि रुक गई। इस दौरान 10 बीघा में फसल का अंकुरण नहीं होने पर ग्राम दत्तीगारा के घबराए किसान श्री प्रह्लाद सिंह राठौर ने कानवन के संबंधित कृषि आदान विक्रेता फर्म महावीर इंटरप्राइजेस की दुकान पर ही कीटनाशक पी लिया। इस घटना के बाद कृषि विभाग की टीम ने फर्म महावीर इंटरप्राइजेस, कानवन का निरीक्षण किया और नमूने एकत्रित कर जांच के लिए भेजे ,साथ ही अन्य अनियमितताएं भी पाए जाने पर संबंधित फर्म एवं कम्पनी गुजरात बायो इन्सेक्टीसाइड, पीथमपुर ,दोनों के प्रोप्राइटर के खिलाफ थाना कानवन में एफआईआर दर्ज़ कराई गई ।
इस संबंध में श्री घनश्याम बग्गड़ , वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं कीटनाशी निरीक्षक , बदनावर ने कृषक जगत को बताया कि विभाग को जानकारी मिली कि गुजरात बायो इन्सेक्टीसाइड, पीथमपुर कम्पनी की दवाई AZOXYSTROBIN 2.50 %, W /W THIOPHANATE METHYL 11.2 %, W /W THIMETHOXAM 25 % FS ब्रांड नेम वरदान से कानवन क्षेत्र के आसपास सोयाबीन बीजोपचार करके बुवाई करने पर अंकुरित सोयाबीन की वृद्धि रुक गई। यह बीजोपचार दवाई फर्म महावीर इंटरप्राइजेस, प्रोप्राइटर दिनेश पिता हस्तीमल जैन , कानवन द्वारा बेची गई। इस पर उक्त फर्म का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में पदस्थ कृषि विस्तार अधिकारी (प्रदाय ) श्री रजनीश गिरवाल उपस्थित थे। 6 जुलाई को निरीक्षण के दौरान नमूने एकत्रित कर जांच के लिए भेजे गए। इसके साथ ही फर्म की कई त्रुटियां पाई गई , जिसमें डिस्प्ले बोर्ड का प्रदर्शन नहीं करना ,नकद -उधार केश मेमो जारी नहीं करना , कीटनाशक स्टॉक पंजी का संधारण नहीं करना, केश मेमो पर दवाई का तकनीकी नाम उल्लेख नहीं करना ,फर्म के लाइसेंस में अधिकार पत्र इंद्राज करने के पूर्व ही उक्त औषधि का अवैध भंडारण कर विक्रय किया जाकर किसानों से धोखाधड़ी कर राशि हड़पी जाना पाया गया। जो कि कीटनाशी नियम 1971 की धारा 10 ( लाइसेंस की शर्तें ) का स्पष्ट उल्लंघन है। फर्म और कम्पनी की मिलीभगत से किसानों को अवैध रूप से बीजोपचार औषधि का विक्रय किया गया। इस पर कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत एवं कीटनाशी नियम 1971 की धारा 10 ( 4 ),15 , 10 (डी ) एवं कीटनाशी अधिनियम 1968 की धारा 29 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318 में निहित प्रावधानों के तहत थाना कानवन में महावीर इंटरप्राइजेस के प्रोप्राइटर दिनेश पिता हस्तीमल जैन , निवासी कानवन और कम्पनी गुजरात बायो इन्सेक्टीसाइड, पीथमपुर के प्रोप्राइटर राम कुमार पिता रामसिंह चौधरी , निवासी बिचौली हप्सी रोड़, इंदौर के खिलाफ थाना कानवन में एफआईआर दर्ज़ कराई गई ।
उल्लेखनीय है कि धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम दत्तीगारा के किसान श्री प्रह्लाद सिंह राठौर एवं उनके भाई श्री सुमेर सिंह ने 10 बीघा ज़मीन किराए पर लेकर उसमें सोयाबीन की बुवाई की थी। बोनी से पहले कम्पनी गुजरात बायो इन्सेक्टीसाइड, पीथमपुर के वरदान नामक उत्पाद जिसे महावीर इंटरप्राइजेस, कानवन से खरीदकर बीजोपचार किया था। लेकिन फसल का अंकुरण नहीं हुआ। इससे चिंतित दोनों किसान भाई प्रह्लाद और सुमेर सिंह राठौर कानवन पहुंचे और दुकानदार को अपनी समस्या बताई , लेकिन संचालक ने संतोषजनक ज़वाब नहीं दिया । इससे आहत होकर किसान श्री प्रह्लाद सिंह राठौर ने दुकान पर ही कीटनाशक पी लिया। जिसे उपचार के लिए धार ले जाया गया। इस घटना से हड़कंप मच गया।
सावधान किसान : खरीफ सीजन में बरतें ये सावधानियां
- लंबी वर्षा खेंच के बाद किसान तेजी से खरीफ फसलों की बुआई कर रहे हैं। ऐसे समय कृषि आदानों की खरीद में विशेष सतर्कता आवश्यक है।
- हमेशा उन्हीं कंपनियों के बीज, कीटनाशक और उर्वरक खरीदें जिनका पूर्व में उपयोग कर चुके हों या जिनकी बाजार में विश्वसनीय पहचान हो।
- ऐसी कंपनियों के उत्पादों को प्राथमिकता दें, जिनकी तकनीकी टीम नियमित रूप से खेतों में किसानों का मार्गदर्शन करती हो और समस्या आने पर सहायता उपलब्ध कराती हो।
- किसी भी स्थिति में पक्का जीएसटी बिल अवश्य लें। बिल में उत्पाद का बैच नंबर, निर्माण तिथि, अवसान (Expiry) दिनांक, मात्रा और मूल्य स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
- उत्पाद का लेबल, पैकेट और खाली डिब्बा/बोतल सुरक्षित रखें। विवाद या फसल नुकसान की स्थिति में यही सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं।
- बिना बिल, खुले या संदिग्ध स्रोत से कृषि आदान खरीदने से बचें, क्योंकि बाद में शिकायत या मुआवजे का दावा करना कठिन हो जाता है।
- यदि उत्पाद की गुणवत्ता या विक्रेता के व्यवहार पर संदेह हो तो तत्काल कृषि विभाग के कीटनाशी निरीक्षक या संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत करें।
- कृषक जगत की अपील: थोड़ी सी सावधानी आपकी पूरी फसल और मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है। खरीद के समय जागरूकता ही किसान का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
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