मिट्टी की जाँच जरूरी

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20 मई 2022,  मिट्टी की जाँच जरूरी –

मिट्टी परीक्षण क्या है ?

खेत मी मिट्टी में पौधों की समुचित वृद्धि एवं विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्ध मात्राओं की रसायनिक परीक्षणों द्वारा आकलन करना साथ ही विभिन्न मिट्टी-विकास जैसे लवणीयता, क्षारीयता एवं अम्लीयता की जांच करना मिट्टी परीक्षण कहलाता है।

मिट्टी परीक्षण की आवश्यकता क्यों ?

पौधों की समुचित वृद्धि एवं विकास के लिए सर्वमान्य रुप से सोलह पोषक तत्व आवश्यक पाये गये हैं, यह अनिवार्य पोषक तत्व है, कार्बन, हाईड्रोजन, आक्सीजन, नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्सियम, मैंग्रीशियम, सल्फर (मुख्य या अधिक मात्रा में आवश्यक पोषक तत्व) लोहा, जस्ता, मैंग्रीज, बोरोन, तांबा, मोलिब्डेनम व क्लोरीन (सूक्ष्म या कम मात्रा में लगने वाले आवश्यक पोषक तत्व)इन पोषक तत्वों में से प्रथम तीन तत्वों को पौधे प्राय: वायु व पानी से प्राप्त करते हैं तथा शेष तेरह पोषक तत्वों के लिए ये भूमि पर निर्भर होते हैं, सामान्यतया ये सभी पोषक तत्व भूमि में प्राकृतिक रुप से उपलब्ध रहते हैं। आज खेती का नया दौर चल रहा है जिसके कारण फसल सघनता 200 से लेकर आंशिक क्षेत्रों में 300 प्रतिशत तक बढ़ गई है तीन-तीन फसलों के दवाब से भूमि में जमा तत्वों का खनन शीघ्रता से फसलों के द्वारा हो रहा है, बैंक डिपाजिट शनै:-शनै: कम होता जा रहा है क्योंकि जिस तादात से निकाली हो रही है उसकी तुलना में जमा नहीं हो पा रहा है। धान-गेहंूं फसल चक्र में जस्ते की कमी, सोयाबीन-गेहूं फसल चक्र में सल्फर की कमी आम बात है पर उर्वरक/सूक्ष्म तत्व की औसत खपत आज भी दूसरे प्रदेशों की तुलना में आधी से भी कम है यही कारण है कि उत्पादन के आंकडे भी सिकुड़े-सिमटे हैं जबकि उसके बढ़ाने की अपार संभावनायें एवं संसाधन भी हैं। यह सब तब संभव है जब मिट्टी परीक्षण कर विस्तार ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों में हो।

कृषकों को सलाह दी जाती है कि अधिक से अधिक नमूने भेज कर अपनी मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों के खजाने की पड़ताल करा लें ताकि कितना जमा करने पर संतुलन हो पायेगा यह बात निर्धारित हो सके। परंतु , खेत में लगातार फसल उगाते रहने के कारण मिट्टी से इन सभी आवश्यक तत्वों का ख्ंिाचाव निरंतर हो रहा है तथा बदलें में खाद एवं उर्वरकों द्वारा कम एवं असंतुलित मात्रा में पोषक तत्व मिट्टी में मिलायें जा रहे हैं जिससे भूमि में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है, असंतुलित पौध पोषण की दशा में फसलों की वृद्धि समुचित नहीं हो पाती तथा पौधों के कमजोर एवं रोग व्याधि कीट आदि से ग्रसित होने की संभावना अधिक रहती है परिणाम-स्वरुप फसल उत्पादन कम होता है, इसके अतिरिक्त उर्वरक भी काफी मंहगे होते जा रहे हैं, अत: इनका पोषक तत्वों की खेत में जरुरत के मुताबिक ही उपयोग करना हमारी खेती को लाभदायक बना सकता हैं,

मिट्टी नमूना एकत्र करना

मिट्टी परीक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है मिट्टी का सही नमूना एकत्र करना। इसके लिए यह जरुरी होता है कि मिट्टी नमूना एकत्री करण इस प्रकार किया जाए जिससे कि वह जिस खेत या क्षेत्र से लिया गया हो उसका पूर्ण प्रतिनिधित्व करता हो। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु मिट्टी के प्रतिनिधि नमूने एक किये जाते हैं। प्रतिनिधि नमूना लेने के लिए इस बात पर ध्यान दें के नमूने लेने से पूर्व खेत में ली गई फसल की बढ़वार यदि एक सी रही हो, उसमें एक समान उर्वरक उपयोग किये गये हो, जमीन समतल व एक सी हो तो ऐसी स्थिति में पूरे खेत से एक ही संयुक्त या प्रतिनिधि नमूना ले सकते हैं तथा इसके विपरीत यदि खेत में अलग-अलग फसल ली गई हो, भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग उर्वरक मात्रा डाली गई हो फसल बढ़वार कहीं कम कहीं ज्यादा रही हो, जमीन समतल न होकर ढालू हो तो इन परिस्थितियों में खेत को समान गुणों वाले, संभव इकाइयों में बांटकर हर इकाई से अलग-अलग प्रति निधि नमूना लेना चाहिए। नमूना सामान्यत: फसल बोने के एक माह पहले लेकर परीक्षण हेतु भेजना चाहिए ताकि समय पर परिणाम प्राप्त हो जाये एवं सिफारिशानुसार खाद-उर्वरक उपयोग किये जा सकें।

नमूना एकत्रीकरण की सामग्री

खुलपी, फावड़ा, बाल्टी या ट्रे, कपड़े एवंं प्लास्टिक की थैलियां, पेन, धागा, सूचना पत्रक कार्ड आदि।

नमूनों की जांच नि:शुल्क

कृषकों को स्वाईल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने के लिए नि:शुल्क मिल्टी परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में प्रदेश में 50 कृषि विभाग की एवं कृषि विश्व विद्यालय तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों की 28 मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इन प्रयोगशालाओं में खेतों से लिए गए मिट्टी के नमूनों की जांच कर स्वाईल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिससे कृषकों को पता चलता है कि उनके खेत की मिट्टी में कौन-कौन से तत्वों की कमी है। उसके मुताबिक उर्वरक प्रबंधन किया जाता है।

मिट्टी जांच संबंधी सूचना पत्रक

निम्र जानकारी लिखा हुआ सूचना पत्रक नमूनों के साथ रखें एवं ऊपर बाधें –

कृषक ………………………………………………….
पिता …………………………………………………..
ग्राम ………………. डाकघर………………………..
विकासखंड/तहसील……………….जिला……………………
खेत का खसरा नं./पहचान……………………………………
सिंचित/असिंचित………………………………………………
पहले ली गई फसल………………………………………….
आगे ली जाने वाली फसल…………………………………..
नमूना लेने वाले का नाम/हस्ताक्षर……………………………
मिट्टी संबंधी अन्य विशेष समस्या……………………………

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