Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

सीधी : जैविक संसाधन केंद्र से किसानों को मिला सहज समाधान

11 सितंबर 2026, सीधी: सीधी : जैविक संसाधन केंद्र से किसानों को मिला सहज समाधान – मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला सीधी अंतर्गत विकासखंड मझौली के एकीकृत कृषि संकुल क्रमांक-01, छूही में स्थापित संकुल स्तरीय संगठन गुलाब सागर के अंतर्गत आईएफएससी जैविक संसाधन केंद्र की स्थापना वर्ष 2025 में की गई। केंद्र का उद्देश्य ग्रामीण किसानों को स्थानीय स्तर पर जैविक कृषि के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उन्हें जैविक खेती की तकनीकों से प्रशिक्षित करना है।

जैविक संसाधन केंद्र में अग्नियास्त्र, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र सहित विभिन्न जैविक कीटनाशक, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) तथा जैविक संसाधनों से संबंधित अन्य उत्पाद तैयार कर विक्रय किए जाते हैं। केंद्र के माध्यम से अब तक आसपास के लगभग 250 किसानों को लाभान्वित किया जा चुका है। इनमें से 90 किसानों ने केंद्र पर जैविक खेती से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रशिक्षित किसानों द्वारा अपनी लगभग आधा-आधा एकड़ भूमि में जैविक खेती को अपनाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में किसान फसलों में वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने के साथ कीट नियंत्रण के लिए अग्निस्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं।

अब किसानों को घर पर जैविक कीटनाशक बनाने की बाध्यता नहीं – जैविक संसाधन केंद्र की स्थापना से किसानों की एक बड़ी समस्या का समाधान हुआ है। पहले किसानों को जैविक कीटनाशक स्वयं तैयार करने पड़ते थे, जिसके लिए समय और संसाधन की आवश्यकता होती थी। अब केंद्र पर जैविक कीटनाशक एवं खाद उपलब्ध होने से किसान इन्हें आसानी से स्थानीय स्तर पर खरीदकर उपयोग कर पा रहे हैं। केंद्र किसानों के लिए केवल बिक्री केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि सेवा प्रदाता के रूप में भी कार्य कर रहा है। केंद्र का संचालन प्रेमवती सिंह के सहयोग से किया जा रहा है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

कृषि एवं पशुपालन संबंधी जानकारी भी उपलब्ध – किसानों को खेती एवं पशुपालन से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जैविक संसाधन केंद्र पर नियमित गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। प्रत्येक माह के तीसरे एवं चौथे बुधवार को कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा किसानों को कृषि संबंधी जानकारी एवं मार्गदर्शन दिया जाता है। वहीं दूसरे एवं चौथे मंगलवार को पशुपालन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी पशुओं के टीकाकरण सहित पशुपालन से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

64 हजार रुपये की जैविक उत्पादों की बिक्री – जैविक संसाधन केंद्र की गतिविधियों से किसानों को लाभ मिलने के साथ केंद्र भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष में अग्निस्त्र, ब्रह्मास्त्र सहित अन्य जैविक कीटनाशक एवं वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री से लगभग 64 हजार रुपये का व्यवसाय किया गया है। इससे जैविक संसाधन केंद्र एक आत्मनिर्भर एवं सेवा आधारित संस्थान के रूप में विकसित हो रहा है।

महिला किसानों को प्रशिक्षण देकर बढ़ाया जा रहा जैविक उत्पादन – जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए आईएफएससी के अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग गांवों में महिला किसानों के साथ बैठक आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में किसानों को जैविक खेती, जैविक कीटनाशकों के उपयोग और जैविक उत्पादन बढ़ाने के संबंध में प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया जाता है। वर्तमान में आईएफएससी से जुड़े लगभग 50 किसान सब्जी उत्पादन का कार्य कर रहे हैं और इनके द्वारा सब्जियों में जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जा रहा है। इससे सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है।

इस पूरी पहल को धरातल पर प्रभावी रूप से संचालित करने में एंकर, वरिष्ठ सीआरपी एवं सीआरपी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इनके द्वारा किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं जैविक संसाधनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। एकीकृत कृषि संकुल की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जिला परियोजना प्रबंधक पुष्पेंद्र सिंह एवं जिला प्रबंधक कृषि विजय शंकर गिरी गोस्वामी का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

जैविक संसाधन केंद्र ने किसानों के लिए जैविक खेती को आसान और सुलभ बनाया है। स्थानीय स्तर पर जैविक खाद एवं कीटनाशकों की उपलब्धता, नियमित प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से किसान धीरे-धीरे रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। आईएफएससी की यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ एकीकृत कृषि संकुल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture