राज्य कृषि समाचार (State News)

शाजापुर: दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन

07 अगस्त 2026, शाजापुर: शाजापुर: दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन – कृषि विज्ञान केन्द्र शाजापुर द्वारा गत दिनों   राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन NMEO-OS अंतर्गत कृषि विभाग शाजापुर के सहयोग से दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन ग्राम कुड़ाना विकासखण्ड-मोहन बड़ोदिया में किया गया।कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.एस.एस.धाकड़, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ.जी.आर.अम्बावतिया, वैज्ञानिक डॉ. गायत्री वर्मा रावल, डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. डी. के.तिवारी के साथ प्राकृतिक खेती कृषक मास्टर ट्रेनर श्री अशोक शर्मा एवं 60 से अधिक प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ.जी.आर.अम्बावतिया द्वारा  किसानों  को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये तिलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाना समय की आवश्यकता है एवं फसल विविधीकरण में तिलहनी फसलों को शामिल करने का आग्रह किया।

 इस दौरान केंद्र प्रमुख डॉ एस.एस धाकड द्वारा तिलहन फसलों के लिए उन्नत कृषि यंत्रो की उपयोगिता विशेषकर फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही कृषकों को विभिन्न कृषि यंत्रों के उपयोग अंतर्गत मिट्टी पलट हल, रोटावेटर, भूमि समतलीकरण के लिए लेजर लेवल कर वर्षा जल संचयीकरण एवं समुचित उपयोग संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई। भूमि एवं जल संरक्षण के लिये सामुहिक प्रयास करने के लिये प्रेरित किया, जिससे बोई गयी फसलों की उत्पादकता बढ़ सके।

डॉ. गायत्री वर्मा रावल द्वारा तिलहनी फसलों का उत्पादन प्रसंस्करण आधारित स्वरोजगार स्थानीय स्तर पर प्रारंभ किये जाने पर प्रकाश डाला एवं सलाह दी। साथ ही किसानों को तिलहनी फसलों के प्रसंस्करण अंतर्गत-सोयाबीन, मूंगफली, कुसुम, सरसों इत्यादि के स्वास्थ्य लाभ एवं प्रसंस्करण सह स्वरोजगार संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। डॉ. मुकेश सिंह ने बताया कृषक फसल की आवश्यकतानुसार पोषक तत्वों का प्रयोग मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार करें एवं खरीफ फसलो मे सन्वित कीट प्रबंधन की जानकारी दी साथ ही तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा मधुमक्खी पालन हेतु प्रेरित किया गया।

डॉ. डी.के. तिवारी द्वारा बताया गया कि वर्तमान में अधिकांश किसान अंधाधुंध रसायनों का छिड़काव कर रहे हैं इससे किसानों का आर्थिक नुकसान हो रहा हैं। तिलहनी फसलों के साथ फसल चक्र अंतवर्ती फसल अपनाने की जानकारी दी। साथ ही प्राकृतिक एवं जैविक खेती की विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया गया। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती कृषक मास्टर ट्रेनर श्री अशोक शर्मा जी ने भी किसान भाईयों को प्राकृतिक खेती पर अपना अनुभव साझा किया।

किसानों को सम सामयिक  सलाह देते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि सोयाबीन की फसल में इस समय तना मक्खी/सफेद मक्खी का देखा जा रहा हैं. अतः इसके नियंत्रण हेतु लक्षण दिखाई देने पर बाजार में उपलब्ध पूर्व मिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम 12.60%+लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 09.50% जेड.सी. @125 मिली./हे. या पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) या आइसोसायक्लोसरम 9.2 WW.DC (10% W/V) DC (600 मिली/हे.) का छिड़काव करें।

सेमीलूपर इल्ली के नियंत्रण हेतु निम्न में से किसी भी एक रसायन का छिडकाब करें:क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी, (150 मि.ली./हे) या इमामेक्टिन बेंजोएट 01.90 (425 मि.ली./हे), या फ्लूबेंडियामाइड 20डब्ल्यू.जी (250-300 ग्राम/हे) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35एस.सी (150 मि.ली.) या इंडोक्साकार्ब 15.8एस .सी (333 मि.ली/हे), या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 04.90 सी. एस. (300 मिली/हे) या प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी.(1 ली/हे) या नोवाल्युरोन + इन्डोक्साकार्ब 04.50 % एस. सी. (825-875 मिली/हे) का छिडकाव करें।

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