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राज्य कृषि समाचार (State News)

सीहोर: फलदार पौधे लगाने के लिए अगस्त माह उपयुक्त 

26 अगस्त 2026, सीहोर: सीहोर: फलदार पौधे लगाने के लिए अगस्त माह उपयुक्त – किसान भाई फलदार पौधे आम, अमरूद, आंवला, नींबू, वेर, पपीता आदि लगाने के लिए अगस्त माह उपयुक्त समय है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार गर्मी के दिनों में किये गये गड्ढे में वर्षा प्रारंभ के पूर्व गोबर की खाद 15-20 किग्रा, सुपर फास्फेट 100 ग्राम व क्लोरोपायरीफॉस 50 ग्राम व नीम की खली 1 किग्रा प्रति गड्ढा में मिलाकर भर दें। फलदार पौधे का चयन क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी का प्रकार, औसत वर्षा, सड़क, साधन व बाजार व्यवस्था आदि के आधार पर करें। फलदार पौधे कलमी व मध्यम बढ़वाकर का हो। जिले में स्थित सहायक संचालक उद्यानिकी कार्यालय से सम्पर्क कर फलदार बगीचा में अनुदान सम्बन्धी एवं तकनीकी जानकारी प्राप्त करें।

आम-फलदार पौधों की नवीनतम किस्म– कृषि वैज्ञानिक के अनुसार दशहरी, लंगड़ा, आम्रपाली, हापुस, केसर, चौंसा। आंवला एन.ए.-7, एन.ए.-8, चकैया, कृष्णा, कंचन। अमरूद एल.-49, इलाहाबादी सफेदा, चित्तीदार, व्ही. एन. आर.-7 अनार भगवा, गणेश, सिंदूरी बेर गोला, उमराव नींबू- कागजी लाईम, साई सरबती संतरा नागपुर संतरा, किञ् सीताफल- अर्काश्यान, बालानगर। फलदार पौध लगाते समय सावधानी-फलदार पौध रोपण हमेशा शाम के समय करें, पौध लगाने के बाद हल्की सिंचाई अवश्य करें एवं पौध लगाने के पूर्व लिपटी हुई घास व पॉलिथीन के थैली अवश्य निकालें, निराई-गुड़ाई एवं जल निकास की उपयुक्त व्यवस्था करें। बाड़ लगाना- फलदार पौधे लगाने के पूर्व उसकी सुरक्षा हेतु खेत के चारों ओर बाड़ लगाना उपयुक्त होगा। बाड़ लगाने के लिये खेत के चारों ओर कटीले तार या कटीली झाड़ियां, करौंदा, निगुर्णी, मेहंदी, नागफनी आदि की चारदीवारी लगायी जा सकती है।

कृषि वैज्ञानिक के अनुसार वायुरोधक पेड़-फलदार पौधे लगाने के पूर्व बगीचे के उत्तर पश्चिम दिशा में लम्बे व शीघ्र बढ़ाने वाले वायुरोधी वृक्ष शीशम, जामुन, बेल, लडोसा, शहतूत, खिरनी, इमली, करौंदा आदि लगायें। प्रो-ट्रे तकनीक से सब्जी पौध उत्पादन- सब्जियों टमाटर, भटा, मिर्च, बैंगन आदि की पौध तैयार करने के लिए प्रो-ट्रे का उपयोग करें। प्रो-ट्रे में बीज का जमाव व अंकुरण अच्छा होता है एवं पौधे की बढ़वार भी अच्छी होती है। प्रो-ट्रे के लिये कोकोपिट, वर्मी कुलाइट, वर्मी कम्पोस्ट, बालू इत्यादि के बीजों को लगाने के प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार एक प्रो-ट्रे का 4-5 बार प्रयोग किया जा सकता है।

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