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राज्य कृषि समाचार (State News)

जबलपुर के विश्वविद्यालय में हुआ ‘कृषि मंथन 2026’, 40+ आधुनिक मॉडल का प्रदर्शन; AI ‘प्लांट डॉक्टर’ व ड्रोन तकनीक ने खींचा ध्यान

12 अप्रैल 2026, भोपाल: जबलपुर के विश्वविद्यालय में हुआ ‘कृषि मंथन 2026’, 40+ आधुनिक मॉडल का प्रदर्शन; AI ‘प्लांट डॉक्टर’ व ड्रोन तकनीक ने खींचा ध्यान – जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित ‘कृषि मंथन 2026’ कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीक का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम में 40 से अधिक उन्नत कृषि मॉडल प्रस्तुत किए गए, जिनमें प्राकृतिक खेती, ड्रोन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में प्रदर्शित मॉडलों का अवलोकन किया और कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचारों की सराहना की।

कृषि नवाचारों का प्रदर्शन

कार्यक्रम में कृषि सखी प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण मॉडल, ड्रोन हाईटेक हब, पराली कटिंग हार्वेस्टर, बैटरी ऑपरेटेड रिच प्लांटर और ड्रिप लाइन इंस्टालर जैसे कई उपयोगी मॉडल प्रदर्शित किए गए। इन तकनीकों का उद्देश्य किसानों की उत्पादन लागत कम करना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।

AI आधारित ‘प्लांट डॉक्टर’ बना आकर्षण

कृषि विश्वविद्यालय के एमटेक अंतिम वर्ष के छात्र आर्यन चंद्र द्वारा विकसित ‘प्लांट डॉक्टर’ डिवाइस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। यह एक मल्टी क्रॉप डिजीज डिटेक्शन सिस्टम है, जो 10 से अधिक फसलों और 45 से ज्यादा पौधों की बीमारियों की पहचान कर सकता है।

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यह डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक पर काम करता है और पौधों की बीमारी का विश्लेषण कर तुरंत रिपोर्ट तैयार करता है। इसमें रोग के प्रकार और उसके बचाव के उपायों की जानकारी भी दी जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम लागत, पोर्टेबल डिजाइन और ऑफलाइन व रियल टाइम उपयोग की सुविधा है।

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बायो डाइजेस्ट यूनिट और प्राकृतिक खेती मॉडल

पनागर विकासखंड के कृषक अनिल पटेल द्वारा बायो डाइजेस्ट यूनिट का प्रदर्शन किया गया, जिसमें गोबर, गोमूत्र और जैविक अपशिष्ट से लगभग 45 दिनों में 200 लीटर जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई। यह मॉडल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ड्रोन तकनीक और आधुनिक कृषि

‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के तहत प्रशिक्षित सपना काची ने ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि ड्रोन के माध्यम से फसलों में दवाई, खाद और पानी का छिड़काव कम समय और कम लागत में किया जा सकता है, जिससे खेती अधिक कुशल और आधुनिक बनती है।

एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल

कार्यक्रम में पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि को जोड़कर तैयार किया गया एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल भी प्रस्तुत किया गया। इस मॉडल के माध्यम से बताया गया कि कैसे जैविक अपशिष्ट का उपयोग कर उत्पादन लागत कम की जा सकती है और भूमि की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है।

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