AGRICULTURE MODEL: खेती के इस मॉडल से किसान कमा सकते हैं ₹80 हजार महीना, कृषि मंथन में छाया तन्मय का फॉर्मूला
12 अप्रैल 2026, भोपाल: AGRICULTURE MODEL: खेती के इस मॉडल से किसान कमा सकते हैं ₹80 हजार महीना, कृषि मंथन में छाया तन्मय का फॉर्मूला – जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित राज्य स्तरीय ‘कृषि मंथन-2026’ में एक युवा किसान का मॉडल खास चर्चा का विषय बन गया। कृषि विभाग के निर्देशन में युवा कृषक तन्मय दास द्वारा प्रस्तुत सतत एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) ने न केवल अधिकारियों और विशेषज्ञों का ध्यान खींचा, बल्कि इसे किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी तरीका भी बताया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों ने इस मॉडल का अवलोकन कर इसकी सराहना की।
तन्मय दास, जो जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र हैं, ने पाटन विकासखंड के ग्राम लम्हेटा स्थित अपनी लगभग साढ़े तीन एकड़ भूमि पर इस मॉडल को सफलतापूर्वक अपनाया है। इस प्रणाली के माध्यम से वे हर महीने करीब 80 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, जो अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
क्या है सतत एकीकृत कृषि प्रणाली?
सतत एकीकृत कृषि प्रणाली एक वैज्ञानिक पद्धति है, जिसमें खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को एक ही स्थान पर जोड़ा जाता है। इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक गतिविधि से निकलने वाला अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए संसाधन बन जाता है, जिससे खेती का पूरा चक्र आत्मनिर्भर बनता है।
शून्य अपशिष्ट और कम लागत
इस मॉडल में पशुओं के गोबर से बायोगैस और जैविक खाद तैयार की जाती है, जिसका उपयोग खेतों में किया जाता है। वहीं फसल के अवशेष पशुओं के चारे के रूप में काम आते हैं। इससे बाजार से खाद और कीटनाशक खरीदने की जरूरत काफी कम हो जाती है, जिससे लागत में भारी कमी आती है।
सालभर होती है आमदनी
इस प्रणाली की एक बड़ी विशेषता यह है कि किसान केवल फसल पर निर्भर नहीं रहता। दूध, अंडे, मछली, फल और सब्जियों के माध्यम से उसे नियमित आय मिलती रहती है। इससे किसान को सालभर आर्थिक स्थिरता मिलती है।
पर्यावरण और मिट्टी के लिए फायदेमंद
यह मॉडल पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देता है। रासायनिक खादों के बजाय जैविक संसाधनों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
जोखिम में कमी और आत्मनिर्भरता
यदि किसी कारण से एक फसल खराब हो जाती है, तो अन्य गतिविधियों जैसे पशुपालन या मत्स्य पालन से आय जारी रहती है। साथ ही किसान को बीज, खाद और चारे के लिए बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे वह आत्मनिर्भर बनता है।
कृषि मंथन में सराहा गया मॉडल
कृषि मंथन-2026 में इस मॉडल को कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम ने तैयार किया। इसके सफल क्रियान्वयन में संयुक्त संचालक कृषि एस. नेताम और उप संचालक कृषि डॉ. एस. के. निगम का मार्गदर्शन रहा। वहीं अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पंकज शर्मा तथा कृषि विस्तार अधिकारी हितेश ख्यालिया और दीपांशु सोनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस मॉडल की खास बात अन्तर्विभागीय समन्वय भी रही, जिसमें पशुपालन और मत्स्य विभाग ने मिलकर एक पूर्ण कृषि चक्र का प्रभावी प्रदर्शन किया।
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