राज्य कृषि समाचार (State News)

नागपुर के वैज्ञानिकों ने किया कपास फसल का निरीक्षण

20 सितंबर 2026, (उमेश खोड़े, कृषक जगत, पांढुर्ना): नागपुर के वैज्ञानिकों ने किया कपास फसल का निरीक्षण – पांढुर्णा जिले के सौसर ब्लॉक में कपास की फसल में दिख रहे असामान्य रोग लक्षणों का केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR), नागपुर के वैज्ञानिकों  पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. दिलीप तुकाराम नगराले एवं डॉ. प्रियंक म्हात्रे एवं विशेषज्ञों की टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर कपास के खेतों का निरीक्षण किया गया। टीम ने छत्रापुर, गंगातवाडा एवं पिपलानारायणवार ग्रामों में पहुंचकर प्रभावित फसलों की खेत स्तर पर स्थिति का जायजा लिया तथा किसानों से प्रत्यक्ष संवाद कर फसल प्रबंधन एवं रोग संबंधी जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी, सौंसर सुश्री अर्चना डोंगरे, कृषि विस्तार अधिकारी श्री कैलाश धुर्वे एवं श्रीमती अंकिता शर्मा, किसान संघ सौंसर के अध्यक्ष श्री आशीष पराडकर, कृषक श्री खुशाल पराडकर, श्री दिनेश गोरे सहित अन्य कृषकगण उपस्थित थे ।

 वैज्ञानिकों ने रोगग्रस्त पौधों की जड़, तना तथा अन्य भागों में दिखाई दे रहे लक्षणों का बारीकी से अवलोकन किया। साथ ही प्रभावित खेतों की स्थिति, रोग के फैलाव तथा फसल की वर्तमान अवस्था का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने किसानों से कपास की बुवाई से लेकर अब तक किए गए कीटनाशक, फफूंदनाशक एवं अन्य कृषि रसायनों के प्रयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। वैज्ञानिकों के प्रारंभिक अवलोकन में खेतों में दिखाई दे रहे लक्षण मृदा जनित रोगजनकों से संबंधित प्रतीत हो रहे हैं। प्रभावित पौधों में मुख्य रूप से जड़ सड़न (Root Rot) तथा फफूंद जनित म्लानि/मुरझान (Fungal Wilt) जैसे लक्षण पाए गए। हालांकि रोग के वास्तविक कारण वैज्ञानिक परीक्षण एवं प्रयोगशाला जांच के बाद ही सामने आएंगे। वैज्ञानिकों ने किसानों को प्रभावित फसलों की नियमित निगरानी करने तथा बिना वैज्ञानिक सलाह के किसी भी प्रकार के कृषि रसायन का अनावश्यक प्रयोग नहीं करने की सलाह दी।

 ग्राम  पंधराखेड़ी  के किसान श्री दुर्गादास किनकर ने कृषक जगत को बताया कि करीब 16  एकड़ में कपास की फसल लगाई है , जिसमें से 5  एकड़ की फसल पूरी तरह खराब हो गई है। जबकि किसान राजा की ढाई एकड़ में से एक एकड़ से अधिक की कपास की फसल खराब हो गई है। वैज्ञानिकों ने खेत से सैम्पल एकत्रित किए हैं। किसानों ने सरकार से फसल नुकसानी का मुआवजा देने की मांग की है। श्री आशीष  पंवार , अध्यक्ष भाकिसं , तहसील सौसर ने कहा कि फसल खराब  होने के जो भी कारण हों , उसके बारे में यदि वैज्ञानिक हमें पहले बता देंगे, तो आगामी सीजन में उसका ध्यान रखते हुए बुवाई करेंगे और दवाइयों का प्रयोग करेंगे। इस वर्ष  कपास फसल का जो नुकसान हुआ है , उसकी भरपाई के लिए सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए। कई किसानों ने कर्ज़ लेकर फसल बोई है।

वैज्ञानिक  डॉ. दिलीप नगराले ने कृषक जगत को बताया कि कपास फसल में  उकठा रोग से पत्ते पीले पड़कर सूख रहे हैं। विल्ट भी दिख रहा है।  मिट्टी और पौधों के सैम्पल लिए हैं। परीक्षण करके उसका विश्लेषण करेंगे। जांच परिणामों के बाद अगले सीजन में किसानों को क्या करना है और क्या सावधानियां रखना है, इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। सौसर अनुभाग में किसानों को लगातार दो सीजन सावधानी रखने की ज़रूरत है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture