ओडिशा में धान पर केस वर्म और ब्लास्ट रोग का खतरा, वैज्ञानिकों ने बताई दवा की सटीक मात्रा
20 सितंबर 2026, भुवनेश्वर (ओडिशा): ओडिशा में धान पर केस वर्म और ब्लास्ट रोग का खतरा, वैज्ञानिकों ने बताई दवा की सटीक मात्रा – ओडिशा के पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी तटीय मैदानी इलाकों और उत्तर-पूर्वी घाट क्षेत्र में धान की फसल पर केस वर्म (केस कीड़ा) और ब्लास्ट रोग का खतरा मंडरा रहा है। ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (OUAT) के तहत काम करने वाली एग्रोमेट फील्ड यूनिट (AMFU), भुवनेश्वर ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसम केंद्र, भुवनेश्वर के साथ मिलकर 15 सितंबर 2026 को जारी अपने बुलेटिन नंबर 74/2026 में यह चेतावनी दी है। यह एडवाइजरी 16 से 20 सितंबर 2026 तक की अवधि के लिए जारी की गई है।
कैसे करें बचाव
केस वर्म से बचाव के लिए एडवाइजरी में इमिडाक्लोप्रिड की 60 मिलीलीटर प्रति एकड़ मात्रा में छिड़काव की सलाह दी गई है, साथ ही छिड़काव के बाद पौधों के ऊपर रस्सी खींचने की परंपरागत विधि अपनाने को कहा गया है।
ब्लास्ट रोग के नियंत्रण के लिए तीन विकल्प सुझाए गए हैं — हेक्साकोनाजोल 5% एससी की 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ मात्रा, या एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2% + डाइफेनोकोनाजोल 11.4% एससी की 200 मिलीलीटर प्रति एकड़ मात्रा, या टेबुकोनाजोल 50% + ट्राईफ्लोक्सीस्ट्रोबिन 25% डब्ल्यूजी की 80 ग्राम प्रति एकड़ मात्रा। एडवाइजरी में स्पष्ट कहा गया है कि छिड़काव बारिश रुकने के बाद ही करें, ताकि दवा बह न जाए।
यह बुलेटिन देशभर में चलने वाली ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (GKMS) के तहत जारी होता है, जिसमें भारत मौसम विज्ञान विभाग हर राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर हर सप्ताह दो बार मौसम आधारित फसल सलाह जारी करता है। इसी नेटवर्क के तहत ओडिशा में AMFU भुवनेश्वर और जी. उदयगिरी केंद्रों से यह एडवाइजरी जारी की गई है।
कृषि विशेषज्ञ सुझाते हैं कि किसी भी कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव करते समय दस्ताने, मास्क और चश्मे जैसे सुरक्षा उपकरण जरूर पहनें, और स्प्रेयर को छिड़काव से पहले साफ पानी से जांच लें ताकि मात्रा में गड़बड़ी न हो। तेज हवा में छिड़काव से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दवा बर्बाद होने के साथ आसपास की फसलों पर भी असर पड़ सकता है।
अन्य फसलों के लिए भी सलाह
बुलेटिन में गन्ने की फसल में इंटरनोड बोरर की समस्या के लिए फिप्रोनिल की 600 मिलीलीटर प्रति एकड़ या क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी की 80 मिलीलीटर प्रति एकड़ मात्रा सुझाई गई है। अरहर की फसल में ब्लिस्टर बीटल की समस्या के लिए नीम आधारित एजाडिरेक्टिन 300 पीपीएम की 1000 से 2000 मिलीलीटर प्रति एकड़ मात्रा में छिड़काव की सलाह दी गई है।
सितंबर के इस समय खरीफ धान की फसल बालियां बनने की अहम अवस्था में है, इसलिए केस वर्म और ब्लास्ट रोग जैसी समस्याएं समय पर न रोकी जाएं तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र और विश्वविद्यालयों की आधिकारिक एडवाइजरी में बताई गई सटीक दवा और मात्रा का पालन करने से न सिर्फ फसल बचती है, बल्कि जरूरत से ज्यादा या गलत दवा के इस्तेमाल से बचकर किसान अपनी लागत भी नियंत्रित रख सकते हैं। कृषि-इनपुट विक्रेताओं के लिए भी यह जानकारी अहम है ताकि वे किसानों को सही सलाह के साथ सही उत्पाद उपलब्ध करा सकें।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार बादल छाए रहने, नमी अधिक होने और खेत में जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन खाद डालने से ब्लास्ट रोग फैलने का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में खेत का नियमित निरीक्षण करना और शुरुआती लक्षण दिखते ही एडवाइजरी के अनुसार छिड़काव करना सबसे कारगर उपाय माना जाता है।
चूंकि सितंबर के महीने में मानसून की बारिश अनियमित रहती है, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि छिड़काव से पहले मौसम पूर्वानुमान जरूर देखें और बारिश की संभावना के दौरान छिड़काव करने से बचें, ताकि दवा असर करने से पहले ही धुल न जाए।
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