राज्य कृषि समाचार (State News)

सागर: हरे चारे के उत्पादन में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का प्रयोग

15 मई 2026, सागर: सागर: हरे चारे के उत्पादन में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का प्रयोग – प्रदेश का एकमात्र जिला जहां इसकी शुरुआत की गई, बगैर मिट्टी के खेती की जा रही हाईड्रोपोनिक्स से तैयार किया जा रहा हरा चारा, आय बढ़ी । बगैर मिट्टी के खेती करने की आधुनिक तकनीक उपयोग जिले में शुरू हो गया है, इसकों शुरुआत गोशालाओं में की है। यहां इसका उपयोग पशुचारा तैयार करने में किया जा रहा है। हाईड्रोपोनिक तकनीक से बनने वाले इस  चारे से गायों को.पोषण  मिल रहा है वहीं  इसे तैयार करने वाली गौशाला संचालनकर्ता महिलाओं की आप भी बढ़ रही है।

इसकी शुरुआत जिले में 12 गौशालाओं में की गई है। महिलाएं कमरे के अंदर केवल पानी का उपयोग करके हरा चारा तैयार कर रही हैं। इस तकनीक में एक किलो बीज से 7 किल्ली हरा चारा तैयार किया जा रहा है, यह किफायती के साथ ही गायो के लिए भरपूर पोषण देने वाला है। इस चारे में कैल्सियम, प्रोटीन के साथ ही पड़वर भी होता है। इस कारण यह गार्यों के लिए आम चारे को अपेक्षा ज्यादा पोषण देने वाला होड है। हाईड्रोपोनिक्स की शुरुआत 80 से की गई है। जिला कृषि अनूप तिवारी ने कराया कि यह आधुनिक तकनीक है, जिले में 16 गौशालाओं में इसकी शुरुआत कराई है। इसमें पौष्टिक चारा गायों को मिल रहा है।

सब्जियां, भाजी आसानी से उगाई जा सकती। इस तकनीक से पतेदार सब्जियां लेट्यूस सलाद पता जड़ी-भूरिया, पुदीना, तुलसी, धनिया, टमाटर, खरा मिर्च, शिमला मिर्च आदि आसानी से उगाई जा सकती हैं। ऐसे बढ़ रही महिलाओं की आय इस तकनीक से गौशाला में काम करने वाली महिलाओं की आप भी बढ़ रही है। एक किलो बीज से 7 किलो चारा तैयार होता है। मक्का, गेहू एवं ज्वार का बीज जो गावं में 12 से 15 रुपए तक मिल जाता है। चारा गौशाला में 5/- प्रति किलो में बिक जाता है। इस प्रकार 15/- रु लागत पर 20/- की आय प्राप्त होती है। अभी तक 16 गौशालाओं में 26880 किलो ग्राम चारा उत्पादन कर 537600/- रु की आय प्राप्त हुई है।

खेती की आधुनिक तकनीक हाइड्रोपोनिक्स – ये खेती करने की एक आधुनिक अनीक है जिसमें मिट्टी का उपयोग किए बिना पौधे उगाए जाते हैं। इसमें पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सीधे पानी के माध्यम से दिए जाते हैं। इसके लिए कमरे के अंदर ट्रे में बीज और उनमें अंकुरण पाया जाता है एवं पानी निर्धारित मात्रा में पानी की धारा छोडी जाती है। पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व ताख पानी के माध्यम में दिए जाते हैं।

यहां तैयार किया जा रहा चारा देवरी ब्लाक में रायखेडा, केसली में पटना खुर्द, रेगाझोली, रहली में बलेह व छिरारी, शाहगढ में बरायठा, दलपतपुर, बंडा में भेडाबमूरा, मालथोन में हडली व बरोदिया, खुरई में बसारी, राहतगढ में झिला और जैसीनगर ब्लाक में बासा व खामकुआं में यह खेती की जा रही है। गौशालाओं को यह फायदा गौशालाओं को सस्ता हरा चारा उपलब्ध हो रहा है। जिससे गौवंश को पर्याप्त पोषण प्राप्त होने के कारण गर्भधारण की क्षमता में वृध्दि हुई है। कृत्रिम गर्भाधान कार्य में साहीवाल, गिर उन्नत नस्ल से कराया जा रहा है।

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