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पशुपालन (Animal Husbandry)

देशभर में गौसॉर्ट तकनीक से बढ़ रही है मादा बछड़ों की संख्या, डेयरी क्षेत्र में आ रहा बड़ा बदलाव

08 मई 2026, नई दिल्ली: देशभर में गौसॉर्ट तकनीक से बढ़ रही है मादा बछड़ों की संख्या, डेयरी क्षेत्र में आ रहा बड़ा बदलाव – देशभर में गौसॉर्ट नामक स्वदेशी लिंग चयन वीर्य तकनीक के उपयोग से मादा बछड़ों के जन्म में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जिससे डेयरी क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अक्टूबर २०२४ में शुरू की गई यह तकनीक पशु प्रजनन के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रही है।

इस तकनीक का विकास राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सहयोग से किया गया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड डेयरी सेवाओं द्वारा इसे लागू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बेहतर नस्ल के पशुओं का विकास करना, दूध उत्पादन बढ़ाना तथा किसानों की आय को लंबे समय तक स्थिर बनाना है।

गौसॉर्ट तकनीक का उपयोग अब कई राज्यों में बड़े स्तर पर किया जा रहा है। इसके माध्यम से किसानों को अधिक सटीक और प्रभावी प्रजनन सेवाएं मिल रही हैं, जिससे पशुओं की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और डेयरी व्यवसाय अधिक व्यवस्थित, भरोसेमंद तथा लाभकारी बन रहा है।

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गिर वाराणसी परियोजना के अंतर्गत इस तकनीक से अत्यंत उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं, जहां अब तक लगभग ९१ प्रतिशत मादा बछड़ों का जन्म दर्ज किया गया है। यह परिणाम इस तकनीक की प्रभावशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। जैसे-जैसे ये बछियां बड़ी होंगी, उनसे किसानों की डेयरी आधारित आजीविका मजबूत होगी और अतिरिक्त आय के नए अवसर पैदा होंगे।

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इस विषय पर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनश शाह ने कहा, “गौसॉर्ट केवल एक तकनीक नहीं है, बल्कि यह भारत के डेयरी क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाला एक सशक्त माध्यम है। यह कम लागत वाली तकनीक अधिक संख्या में मादा बछड़ों के जन्म में सहायता कर रही है, जिससे उत्पादकता और किसानों की आय दोनों में स्थिरता आएगी। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत इसका विस्तार देश में नई डेयरी क्रांति की नींव रख रहा है। गिर वाराणसी परियोजना के परिणाम यह स्पष्ट करते हैं कि जब आधुनिक तकनीक प्रभावी ढंग से ग्रामीण भारत तक पहुंचती है, तब वह केवल उत्पादन ही नहीं बढ़ाती बल्कि किसानों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव भी लाती है।”

गौसॉर्ट तकनीक का प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बुलंदशहर, हापुड़ और शामली जिलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इन जिलों में इस तकनीक के माध्यम से जन्म लेने वाले लगभग ९१ प्रतिशत बछड़े मादा हैं। यह आंकड़ा इस तकनीक की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है तथा यह दर्शाता है कि यह नवाचार दूध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

गौसॉर्ट तकनीक अपनाने वाले किसान इसके प्रत्यक्ष लाभ भी देख रहे हैं। वाराणसी के डेयरी किसान राजवीर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “गौसॉर्ट तकनीक की मदद से मैंने कई मादा बछड़ों का जन्म देखा है। पहले हमें बछड़े के लिंग को लेकर निश्चित जानकारी नहीं होती थी, लेकिन अब इस तकनीक से हमें विश्वास हो गया है कि मादा बछड़ों के जन्म की संभावना बहुत अधिक है। इससे दूध देने वाले पशुओं की संख्या बढ़ेगी और हमारी आय में सुधार होगा। अब डेयरी व्यवसाय इस तकनीक के कारण अधिक लाभकारी बन जाएगा।”


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