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राज्य कृषि समाचार (State News)

सरसों में रोएंदार इल्ली का खतरा, कानपुर मंडल के किसानों को IMD की चेतावनी

04 नवंबर 2026, कानपुर: सरसों में रोएंदार इल्ली का खतरा, कानपुर मंडल के किसानों को IMD की चेतावनी – उत्तर प्रदेश के कानपुर मंडल में सरसों की फसल पर रोएंदार इल्ली का खतरा बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के प्रादेशिक मौसम केंद्र, लखनऊ ने किसानों को इसे लेकर सलाह जारी की है। यह सलाह बुलेटिन संख्या 87/26 में दी गई है, जो 30 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ और 3 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।

यह सलाह कानपुर नोडल क्षेत्र के किसानों के लिए है। इसमें कन्नौज, हाथरस, मथुरा, आगरा, एटा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर-खीरी, कासगंज और सीतापुर जिले शामिल हैं। इन सभी जिलों में सरसों की बोआई इन दिनों जोरों पर है।

दवा और मात्रा की सटीक जानकारी

सरसों की फसल में रोएंदार इल्ली लगने पर इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी दवा का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। किसानों को यह दवा 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से लेनी है। इसे 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर पूरे खेत में छिड़कना चाहिए।

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मौसम केंद्र ने यह भी बताया कि सरसों में आरी मक्खी यानी सॉ फ्लाई का खतरा भी बना हुआ है। इसके लिए मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत, मैलाथियान 5 प्रतिशत या कार्बराइल 5 प्रतिशत पाउडर में से कोई एक दवा चुनी जा सकती है। इसकी मात्रा 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी गई है और सुबह या शाम के समय छिड़काव करना बेहतर रहता है।

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बारिश से बढ़ी इल्ली के पनपने की आशंका

बुलेटिन के अनुसार उत्तर प्रदेश में बीते तीन दिनों में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश हुई है। पूरे प्रदेश में औसतन 7.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस समय सामान्य वर्षा सिर्फ 0.3 मिलीमीटर होती है। इस अतिरिक्त नमी से खेतों में कीट पनपने के हालात बन गए हैं।

न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज हुआ है। पिछले चार दिनों का औसत न्यूनतम तापमान 17.4 से 20.4 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। मौसम केंद्र ने आगामी दिनों में तापमान सामान्य के आसपास रहने और बारिश की संभावना कम रहने का अनुमान जताया है।

बुलेटिन में किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेत का नियमित निरीक्षण करते रहें। इल्ली या आरी मक्खी का असर दिखते ही तुरंत छिड़काव करना चाहिए, ताकि नुकसान सीमित रहे। दवा के इस्तेमाल से पहले पैकेट पर दिए गए निर्देशों को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए।

शुरुआती अवस्था में कीट लगने से सरसों के पौधों की बढ़वार रुक सकती है, इसलिए समय पर नियंत्रण करना जरूरी माना जा रहा है। जरूरत पड़ने पर किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से भी सलाह ले सकते हैं।

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