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राज्य कृषि समाचार (State News)

धान-गेहूं छोड़ा, अब रजनीगंधा के फूलों से रोज हो रही मोटी कमाई

03 नवंबर 2026, फरीदाबाद (हरियाणा): धान-गेहूं छोड़ा, अब रजनीगंधा के फूलों से रोज हो रही मोटी कमाई – फरीदाबाद जिले के किसान प्रदीप सैनी ने परंपरागत धान-गेहूं की खेती छोड़कर रजनीगंधा के फूलों की खेती अपनाई है। उनका दावा है कि इससे उन्हें रोजाना 20 से 30 हजार रुपये तक की कमाई हो रही है, जो गेहूं-धान की तुलना में कहीं ज्यादा है।

प्रदीप का परिवार 1983 से यह खेती कर रहा है। यानी यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि तीन दशक से चली आ रही पुश्तैनी परंपरा है। उनके गांव में उनके जैसे लगभग 250 किसान फूलों की खेती से जुड़े हैं और इसी तरह का मुनाफा कमाने का दावा करते हैं।

फूलों की ग्रेडिंग से होती है असली कमाई

रजनीगंधा के फूलों को खेत से काटने के बाद उनकी ग्रेडिंग की जाती है। बड़े और अच्छी क्वालिटी के फूल ऊंचे दाम पर बिकते हैं, जबकि छोटे फूलों का दाम कम मिलता है। हर दिन ताजे फूल गाजीपुर मंडी भेजे जाते हैं, जहां से इनकी बिक्री होती है।

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रजनीगंधा की मांग सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। यह फूल थाईलैंड तक जाता है, जिससे किसानों को अच्छा भाव मिलने में मदद मिलती है। बाजार में मांग बनी रहने से किसान फूलों की खेती में बने हुए हैं।

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सरकारी मदद से बढ़ रहा रुझान

हरियाणा सरकार नए किसानों को फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। नए किसानों को प्रति एकड़ 24 हजार रुपये तक की सरकारी मदद और प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे शुरुआती लागत का बोझ कुछ कम हो जाता है।

प्रदीप सैनी के मुताबिक सरकारी विभाग का सहयोग भी इस खेती को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। उनके शब्दों में, “हॉर्टिकल्चर विभाग से बहुत योगदान मिलता है।”

धान-गेहूं जैसी परंपरागत फसलों में मौसम और दाम का जोखिम हमेशा बना रहता है। प्रदीप और उनके जैसे किसानों का अनुभव बताता है कि सही बाजार और सरकारी सहयोग मिलने पर फूलों की खेती एक टिकाऊ विकल्प बन सकती है। हालांकि आय के ये आंकड़े किसानों के अपने दावे पर आधारित हैं और इनकी किसी सरकारी या स्वतंत्र स्रोत से अलग से पुष्टि नहीं हो सकी है।

जिन किसानों के पास सिंचाई और मंडी तक पहुंच की सुविधा है, उनके लिए यह मॉडल एक नई राह खोल सकता है। बाकी किसानों को भी सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर फूलों की खेती में संभावनाएं तलाशने की सलाह दी जा रही है।

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