जहां बंजर थी जमीन, वहां महक उठा केसर, लद्दाख ने रच दिया नया इतिहास
03 नवंबर 2026, भोपाल: जहां बंजर थी जमीन, वहां महक उठा केसर, लद्दाख ने रच दिया नया इतिहास – केसर की खेती के लिए अब तक कश्मीर की घाटियां सबसे अनुकूल और प्रसिद्ध मानी जाती रही हैं, लेकिन अब लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों में भी केसर की खुशबू फैलने लगी है। लेह जिले में बंजर पड़ी जमीन पर केसर की प्रायोगिक खेती का प्रयोग शुरुआती स्तर पर सफल होता दिखाई दे रहा है। यहां केसर के फूल महज 30 दिनों में खिल उठे, जबकि सामान्य परिस्थितियों में इन्हें खिलने में करीब दो महीने का समय लगता है। इतना ही नहीं, शुरुआती चार दिनों में लगभग 22 ग्राम शुद्ध केसर भी प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि ने लद्दाख में केसर की व्यावसायिक खेती की नई संभावनाएं पैदा कर दी हैं।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस प्रयोग की जानकारी साझा करते हुए बताया कि लेह जिले के स्पितुक फरका में पहले से अनुपयोगी और बंजर पड़ी करीब 4,000 वर्ग मीटर जमीन पर केसर की प्रायोगिक खेती शुरू की गई थी। इस परियोजना की शुरुआत 2 अक्टूबर को हुई। इसके तहत ईरान से मंगाए गए उच्च गुणवत्ता वाले लगभग 90 हजार केसर के कंद लगाए गए, जिनका कुल वजन करीब 800 किलोग्राम बताया गया है। इन कंदों का चयन लद्दाख की अधिक ऊंचाई और यहां की विशेष जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया था।
दो महीने के बजाय 30 दिन में खिल उठे फूल
इस प्रयोग की सबसे खास बात केसर के फूलों का निर्धारित समय से पहले खिलना है। उपराज्यपाल के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में केसर के फूल आने में लगभग दो महीने का समय लगता है, लेकिन लद्दाख में महज 30 दिनों के भीतर फूल दिखाई देने लगे। उन्होंने स्वयं स्पितुक फरका स्थित खेत का निरीक्षण किया और वहां खिले केसर के फूलों को देखा। शुरुआती चार दिनों में करीब 22 ग्राम शुद्ध केसर का उत्पादन भी दर्ज किया गया।
बंजर जमीन से रोजगार और आय की उम्मीद
लद्दाख में हुए इस प्रयोग को कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाओं के रूप में देखा जा रहा है। यदि यहां की मिट्टी और जलवायु में केसर की खेती लंबे समय तक सफल रहती है तो अनुपयोगी पड़ी जमीन को भी कृषि उत्पादन से जोड़ा जा सकेगा। इससे स्थानीय किसानों और युवाओं के लिए रोजगार तथा आय के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। कश्मीर के बाद अब लद्दाख में केसर की खेती की यह पहल हिमालयी क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण की नई राह खोल सकती है। हालांकि व्यावसायिक स्तर पर इसकी सफलता का आकलन उत्पादन की निरंतरता, गुणवत्ता और लागत के आधार पर ही हो सकेगा। फिलहाल शुरुआती परिणामों ने लद्दाख की बंजर जमीन में केसर की खेती की उम्मीद जरूर जगा दी है।
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