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राज्य कृषि समाचार (State News)

देसी गायों के संरक्षण को मिलेगा प्रोत्साहन, पशुपालकों को सालाना 10,800 रुपये तक सहायता

03 नवंबर 2026, भोपाल: देसी गायों के संरक्षण को मिलेगा प्रोत्साहन, पशुपालकों को सालाना 10,800 रुपये तक सहायता – मध्यप्रदेश में देसी गायों के संरक्षण और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार नई आर्थिक सहायता योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस योजना के माध्यम से देसी नस्ल की गायों का पालन करने वाले चयनित पशुपालकों को प्रतिमाह अधिकतम 900 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अनुसार एक पशुपालक को सालभर में अधिकतम 10,800 रुपये तक की सहायता मिल सकेगी। सरकार का उद्देश्य आर्थिक सहयोग के माध्यम से देसी गायों के पालन को बढ़ावा देना और पशुपालकों को उनके रखरखाव में मदद पहुंचाना है।

प्रस्तावित योजना के लिए सरकार सालाना लगभग 40 करोड़ रुपये का बजट रखने की तैयारी कर रही है। इस राशि का उपयोग पात्र पशुपालकों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में किया जाएगा। पशुपालकों को मिलने वाली सहायता से गायों के लिए पौष्टिक आहार, पशुचारा और देखभाल संबंधी आवश्यकताओं पर खर्च करने में मदद मिल सकेगी। इससे देसी नस्ल की गायों के संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को आजीविका के बेहतर माध्यम के रूप में विकसित करने की उम्मीद है।

पहले चरण में 100 गांवों का चयन

योजना को शुरुआती दौर में सीमित स्तर पर लागू करने की तैयारी है। इसके पहले चरण के लिए प्रदेश के 100 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों के चयन में देसी नस्ल की गायों की संख्या को प्रमुख आधार बनाया गया है। योजना के तहत प्रत्येक चयनित गांव से पांच पशुपालकों को लाभार्थी बनाने की योजना है। इस प्रकार शुरुआती चरण में कुल 500 पशुपालकों को आर्थिक सहायता का लाभ मिल सकेगा।

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पशुपालन को आर्थिक रूप से मजबूत करने की पहल

मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन खेती के साथ आय का महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। अनेक किसान परिवार दूध उत्पादन और गायों के पालन के माध्यम से अपनी अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं। हालांकि पशु चारे की बढ़ती कीमत, देखभाल और रखरखाव का खर्च कई बार पशुपालकों के सामने आर्थिक चुनौती बन जाता है। ऐसे में सरकार की प्रस्तावित सहायता योजना छोटे पशुपालकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

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देसी गायों की नस्लों का संरक्षण भी इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसके लिए केवल आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पशु चिकित्सा सुविधाओं, नस्ल सुधार, चारे की उपलब्धता और दूध के उचित बाजार की व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा। योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका लाभ वास्तविक पशुपालकों तक नियमित रूप से पहुंचे और देसी गायों के संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके।

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