पराली अब बनेगी कमाई का जरिया, पंजाब में शुरू हुआ ऐसा प्लांट जो बदलेगा किसानों की तस्वीर
03 नवंबर 2026, भोपाल: पराली अब बनेगी कमाई का जरिया, पंजाब में शुरू हुआ ऐसा प्लांट जो बदलेगा किसानों की तस्वीर – धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली लंबे समय से किसानों के लिए बड़ी समस्या रही है। इसके निस्तारण के लिए कई बार किसान इसे खेतों में ही जला देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। अब इसी पराली को कमाई का साधन बनाने की पहल की गई है। पंजाब के तरनतारन जिले में स्थापित एक प्लांट इस दिशा में नई राह दिखा रहा है। यहां खेतों से पराली एकत्रित कर उसकी गांठें बनाई जा रही हैं, जिन्हें बिजली संयंत्रों, थर्मल प्लांट और ईंट-भट्ठों तक पहुंचाया जा रहा है।
तरनतारन जिले के कोट धरम चंद कलां गांव में स्थापित इस प्लांट में बेलर मशीनों की मदद से खेतों से पराली इकट्ठा की जाती है। इसके बाद मशीनों के जरिए उसकी गांठें तैयार की जाती हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, प्लांट में प्रतिदिन लगभग 100 टन पराली की गांठें बनाने की क्षमता है। इसकी सालाना क्षमता करीब 35 हजार मीट्रिक टन बताई गई है। यह प्लांट 15 से 18 हजार एकड़ क्षेत्र में धान की खेती के बाद बचने वाली पराली के प्रबंधन में सक्षम है।
इस पहल की खास बात यह है कि पराली की गांठों को आगे बायोमास पेलेट्स में बदला जाएगा। इन पेलेट्स का इस्तेमाल बॉयलर और थर्मल प्लांट में कोयले के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। इससे फसल अवशेषों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में होगा और पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
किसान और बेलर मशीन संचालक मुख्तियार सिंह के अनुसार, उन्होंने भी इस वर्ष से पराली प्रबंधन के काम की शुरुआत की है। उनके पास 8 से 10 बेलर मशीनें इस काम में लगी हैं। उनका कहना है कि इन मशीनों की मदद से खेतों से पराली एकत्रित कर गांठें बनाई जा रही हैं। इससे किसानों को फसल कटाई के बाद खेत साफ करने में सुविधा मिल रही है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर भी तैयार कर रही है। यदि ऐसे प्लांट दूसरे कृषि क्षेत्रों में भी स्थापित किए जाते हैं, तो पराली को समस्या के बजाय उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।
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