रासायनिक खेती छोड़ी, जैविक गेंदे की खेती से सालाना लाखों की कमाई
04 नवंबर 2026, सीकर (राजस्थान): रासायनिक खेती छोड़ी, जैविक गेंदे की खेती से सालाना लाखों की कमाई – सीकर जिले के किसान सुरेंद्र कुमार ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों का रास्ता छोड़कर जैविक खेती अपनाई है। आज वे गेंदे के फूलों समेत कई फसलों से सालाना 30 लाख रुपये से ज्यादा का कुल कारोबार कर रहे हैं।
सुरेंद्र करीब 10 साल से खेती कर रहे हैं। शुरुआत में वे परंपरागत तरीके से खेती करते थे, लेकिन करीब चार साल पहले उन्होंने देखा कि लगातार रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है।
इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर रुख किया। उन्होंने जैविक उत्पादों का इस्तेमाल शुरू किया और सिंचाई के लिए ड्रिप पद्धति अपनाई, जिससे पानी की जरूरत लगभग आधी रह गई। पहले हर दूसरे दिन सिंचाई करनी पड़ती थी, अब यह जरूरत हर चौथे दिन की रह गई है।
फूलों से बढ़ी अतिरिक्त कमाई
सुरेंद्र की चार हेक्टेयर जमीन में से एक हेक्टेयर में वे जैविक गेंदा उगाते हैं। बाकी जमीन पर मूंग, मूंगफली, बाजरा और ग्वार की खेती होती है, साथ ही सर्दियों में गुलदाउदी जैसे फूल भी लगाए जाते हैं।
गेंदे की बुवाई मई और अक्टूबर में होती है और फूल लगभग छह महीने तक आते रहते हैं। फूल रोजाना सीकर और जयपुर की मंडियों में बेचे जाते हैं, जहां मांग और त्योहारों के हिसाब से भाव ऊपर-नीचे होता रहता है।
सुरेंद्र का दावा है कि गेंदे की खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है, हालांकि लागत का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है, इसलिए इस दावे को स्वतंत्र रूप से परखा नहीं जा सकता। सभी फसलों और फूलों को मिलाकर उनका सालाना कुल टर्नओवर 30 लाख रुपये से अधिक बताया गया है, जो ज्यादा भरोसेमंद आंकड़ा है।
सुरेंद्र का अनुभव बताता है कि एक ही खेत में परंपरागत फसलों के साथ फूलों की खेती जोड़ने से किसान की कुल आमदनी में इजाफा हो सकता है। मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए उठाया गया यह कदम लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है।
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