झाबुआ में कपास पर कीट और पत्ती मरोड़ वायरस का हमला, थायमेथोक्साम छिड़काव की सलाह
04 नवंबर 2026, झाबुआ: झाबुआ में कपास पर कीट और पत्ती मरोड़ वायरस का हमला, थायमेथोक्साम छिड़काव की सलाह – मध्य प्रदेश के झाबुआ पहाड़ी क्षेत्र में कपास की फसल पर रस चूसने वाले कीट और पत्ती मरोड़ वायरस का प्रकोप बढ़ गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की कृषि मौसम एडवाइजरी में किसानों को तुरंत दवा छिड़काव की सलाह दी गई है। बुलेटिन के अनुसार यह समस्या अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में खेतों में साफ देखी गई है।
एडवाइजरी में बताया गया है कि कपास के पौधों पर सफेद मक्खी और अन्य रस चूसने वाले कीट पत्तियों का रस चूस रहे हैं। इसी वजह से कई खेतों में पत्ती मरोड़ वायरस के लक्षण भी दिखने लगे हैं। समय पर उपचार न होने पर उपज में भारी नुकसान हो सकता है।
कपास के साथ ही इस क्षेत्र में सब्जियों की फसलों पर भी कीट का असर देखा गया है। टमाटर, बैंगन, मिर्च और भिंडी में प्ररोह और फल छेदक कीट सक्रिय पाए गए हैं। बेर और अमरूद के पेड़ों पर फल मक्खी की समस्या भी सामने आई है।
किस दवा का कितना छिड़काव करें
कपास में रस चूसने वाले कीट और पत्ती मरोड़ वायरस की रोकथाम के लिए थायमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी दवा की 150 मिलीलीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर छिड़कने की सलाह दी गई है। यह मात्रा पानी में घोलकर पूरे खेत पर एक समान छिड़काव के लिए बताई गई है।
टमाटर, बैंगन, मिर्च और भिंडी में प्ररोह व फल छेदक कीट के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट दवा की 10 मिलीलीटर मात्रा प्रति पंप इस्तेमाल करने को कहा गया है। बेर और अमरूद में फल मक्खी की समस्या पर भी यही दवा और मात्रा कारगर बताई गई है।
विंध्यन पठार क्षेत्र में बेर और अमरूद में फल मक्खी के लिए नुवान दवा की 2 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह है। वयस्क फल मक्खी को आकर्षित कर मारने के लिए डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी की 0.05 प्रतिशत मात्रा गुड़ या चीनी के साथ, 10 ग्राम प्रति लीटर की दर से, पेड़ों की निचली छतरी पर छिड़कने को कहा गया है।
दूसरे जिलों के लिए भी सलाह
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मुरैना इलाके में अरहर की फसल में फली छेदक कीट का प्रकोप बताया गया है। इसके लिए ट्रायज़ोफॉस दवा की 750 मिलीलीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर, 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़कने की सलाह दी गई है।
इसी इलाके में मिर्च और टमाटर में पत्ती मरोड़ की समस्या के लिए थायमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 100 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर, 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़कने को कहा गया है। बैंगन और टमाटर में तना छेदक व फल छेदक के लिए न्यूवाक्रॉन दवा की 1 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर इतनी ही पानी में घोलकर इस्तेमाल करने की सलाह है।
बुंदेलखंड क्षेत्र के छतरपुर इलाके में कद्दू वर्गीय फसलों में फल मक्खी और लाल कद्दू भृंग की समस्या देखी गई है। इसके लिए क्विनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी की 1.5 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने को कहा गया है।
खरगौन-बड़वानी क्षेत्र में टमाटर, मिर्च, बैंगन और भिंडी में डायमंड बैक मॉथ कीट के साथ फल व तना छेदक कीट भी सक्रिय पाए गए हैं। किसानों को पहले फेरोमोन ट्रैप, लगभग तीन से चार प्रति एकड़, खेत में लगाने की सलाह दी गई है। प्रकोप अधिक होने पर स्पिनोसैड दवा की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति 4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कने को कहा गया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की इस एडवाइजरी की वैधता अवधि 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक है। अगला बुलेटिन 3 नवंबर को जारी होगा। किसानों से कहा गया है कि छिड़काव करने से पहले एक बार स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से भी सलाह ले लें।
किसानों को यह भी सुझाव दिया गया है कि छिड़काव सुबह या शाम के ठंडे समय में करें ताकि दवा का असर बेहतर रहे।
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