Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ.श्रॉफ पंचतत्व में विलीन

01 जून 2026, इंदौर: प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ.श्रॉफ पंचतत्व में विलीन – देश के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद और कृषि नवाचारों के प्रेरणास्रोत डॉ. विनोद लाल श्रॉफ का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। गत दिनों इंदौर में हुए अंतिम संस्कार में उनके पुत्र, प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मनीष श्रॉफ ने मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के अवसर पर बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक, छात्र-छात्राएं, उनके शिष्य एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।‘गुरुजी’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. श्रॉफ को अंतिम विदाई देने उनके अनेक पूर्व छात्र भी पहुंचे और नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।

डॉ. श्रॉफ भारतीय कृषि अनुसंधान और शिक्षा जगत का अत्यंत सम्मानित नाम थे। वे कृषि महाविद्यालय, इंदौर के अधिष्ठाता (डीन) रहे। कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उन्होंने लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अनेक विद्यार्थियों तथा युवा वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन किया।

मध्यप्रदेश जलग्रहण मिशन में मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में भी उनकी विशेष पहचान रही। जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करते हुए उनका दिया नारा—“खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में”—पूरे देश में प्रसिद्ध हुआ। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि जल संरक्षण और ग्रामीण संसाधनों के संवर्धन का प्रभावी सूत्र बना।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile

आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन के क्षेत्र में डॉ. श्रॉफ का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। वे कपास की कई उन्नत किस्मों के जनक रहे और उन्होंने कपास उत्पादन को अधिक टिकाऊ तथा किसानों के लिए लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। कपास की वैज्ञानिक खेती और उसके संरक्षण को लेकर उनके शोध एवं सुझावों को देशभर में सम्मान मिला।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

डॉ. श्रॉफ जैविक एवं पारिस्थितिकी आधारित खेती के प्रबल समर्थक थे। “सदाबहार खेती” की उनकी अवधारणा में कपास और जैविक खेती को आधार बनाकर टिकाऊ कृषि व्यवस्था पर जोर दिया गया। शहरी खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने रूफ टॉप गार्डनिंग में सेमी हाइड्रोपोनिक्स का अभिनव कॉन्सेप्ट दिया। सीमित स्थान और कम पानी में पौधों के बेहतर विकास की इस पद्धति को व्यापक सराहना मिली।

कृषि विषयों पर लिखी उनकी पुस्तकें ‘सदाबहार खेती’ और ‘कपास कीट विज्ञान’ किसानों, कृषि विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय रहीं। इनमें उन्होंने खेती के टिकाऊ, व्यावहारिक और वैज्ञानिक उपायों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को मार्गदर्शन मिला। कृषक जगत द्वारा आयोजित जैविक हाट एवं किसान संगोष्ठी जैसे अनेक कार्यक्रमों में भी डॉ. श्रॉफ का मार्गदर्शन किसानों को मिलता रहा।

सरल व्यक्तित्व, गहरी वैज्ञानिक सोच और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण रखने वाले डॉ. श्रॉफ का पूरा जीवन कृषि, पर्यावरण और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। कृषि जगत में उनका योगदान और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा बने रहेंगे।
कृषक जगत परिवार की ओर से डॉ. विनोद लाल श्रॉफ को भावभीनी श्रद्धांजलि।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक प