राजगढ़ बनेगा लहसुन का हब, 7 जिलों के किसानों को मिलेगा खेती और बाजार का नया अवसर
05 नवंबर 2026, राजगढ़: राजगढ़ बनेगा लहसुन का हब, 7 जिलों के किसानों को मिलेगा खेती और बाजार का नया अवसर – मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में अब खेती का स्वरूप बदलने की तैयारी है। मोहनपुरा-कुंडालिया प्रेशराइज्ड सिंचाई परियोजना से खेतों तक पानी पहुंचने के बाद जिले को लहसुन उत्पादन के बड़े क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए आसपास के 6 से 7 जिलों के किसानों को भी जोड़ा जाएगा। इस पहल से राजगढ़ न केवल लहसुन उत्पादन का केंद्र बनेगा, बल्कि किसानों को उन्नत किस्मों, आधुनिक खेती और बेहतर बाजार के अवसर भी मिलेंगे।
इसी योजना को जमीन पर उतारने के लिए मंगलवार को मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना कार्यालय में उद्यानिकी कमिश्नर सौरभ कुमार सुमन ने अधिकारियों, सिंचाई परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों और निजी कंपनियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में लहसुन की खेती शुरू करने से पहले विस्तृत डीपीआर तैयार करने, किसानों को संगठित करने, आधुनिक खेती के लिए समूह बनाने, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) विकसित करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार मूल्य दिलाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, परियोजना प्रशासक श्री विकास राजोरिया, शुभंकर विश्वास, उद्यानिकी उपसंचालक वी.एस. मीणा, नीरज रेवाड़ी, संदीप दुबे सहित एलएंडटी और जैन इरिगेशन के अधिकारी मौजूद रहे।
हाइब्रिड डीपीआर से तय होगी खेती की दिशा
लहसुन क्लस्टर विकसित करने के लिए हाइब्रिड डीपीआर तैयार की जाएगी। इसके लिए एक निजी संस्था को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि एलएंडटी और जैन इरिगेशन मैदानी स्तर पर सहयोग करेंगे। इसके तहत मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना से सिंचित क्षेत्र का विस्तृत डाटा जुटाया जाएगा। इसमें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करने वाले किसानों के साथ स्वतंत्र रूप से खेती करने वाले किसानों को भी शामिल किया जाएगा। इस डाटा के आधार पर उपयुक्त क्षेत्र, किसानों की संख्या, उत्पादन क्षमता और उपलब्ध संसाधनों का आकलन होगा।
तीन महीने में तैयार होगी डीपीआर, छह महीने में किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
उद्यानिकी कमिश्नर सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना जिले के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। इतनी बड़ी सिंचाई सुविधा का लाभ केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कृषि में ग्रॉस वैल्यू एडिशन भी होना चाहिए। इसके लिए समयबद्ध तरीके से काम करना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को तीन महीने में उपयुक्त क्षेत्र का चयन कर बेहतर डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों की मजबूत नेटवर्किंग विकसित की जा सके। राजगढ़ को लहसुन का हब बनाने के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित की जाएगी। स्थानीय स्तर पर अनुभवी लोगों को जोड़ा जाएगा और एफपीओ को मजबूत किया जाएगा। अगले छह महीने में किसानों को एकजुट कर नए वित्तीय वर्ष में योजना को जमीन पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चार महीने विभागीय स्तर पर मजबूती से काम करना होगा। इसके बाद योजना को ऑटो मोड पर संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। फिलहाल राजगढ़ में इसे ट्रायल के रूप में शुरू किया जा रहा है।
किसानों को मिलेगा बायबैक ऑफर, खेत से ही खरीदी का प्रस्ताव
लहसुन की खेती को लेकर किसानों की आशंकाएं दूर करने के लिए कमिश्नर ने जैन इरिगेशन के अधिकारियों से बायबैक मॉडल पर काम करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को भरोसा दिलाया जाए कि वे लहसुन की फसल लगाएंगे तो कंपनी खेत से ही उनकी उपज खरीदेगी। इसके लिए तीन दिन के औसत मंडी भाव के आधार पर भुगतान करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि किसानों को मंडी तक उपज ले जाने और परिवहन की परेशानियों से राहत मिल सके।
कमिश्नर ने कहा कि लहसुन की खेती में जोखिम जरूर है, लेकिन इसमें अच्छी कमाई की संभावनाएं भी हैं। मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना में ऑटोमेशन आधारित सिंचाई व्यवस्था होने से किसानों को बेहतर उत्पादन का अवसर मिलेगा। किसानों का भरोसा जीतना और उनकी उपज के लिए बाजार सुनिश्चित करना इस मिशन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
7 जिलों को जोड़कर विकसित होगा बड़ा लहसुन क्लस्टर
कमिश्नर सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि राजगढ़ को केवल लहसुन उत्पादन का केंद्र नहीं बनाना है, बल्कि ऐसा क्लस्टर विकसित करना है, जहां से उन्नत किस्मों, उत्पादन की गुणवत्ता और बाजार की संभावनाओं को नई दिशा मिल सके। इस योजना में आसपास के 6 से 7 जिलों को जोड़ने की तैयारी है। उद्देश्य है कि यहां उत्पादित लहसुन को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सके।
लहसुन उत्पादन के साथ ग्रेडिंग, भंडारण और पैकेजिंग पर जोर
कमिश्नर ने कहा कि किसान पहले से लहसुन की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन अब इसकी किस्मों और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ऐसी उन्नत वैरायटी विकसित करनी होगी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग हो। इसके लिए चीन के मॉडल से सीखने और बेहतर उत्पादन तकनीक अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया। इसके तहत फसल की ग्रेडिंग, भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था तैयार की जाएगी। उनका कहना था कि केवल अच्छा उत्पादन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी मार्केटिंग पर भी काम करना होगा, ताकि राजगढ़ के लहसुन को विश्वस्तरीय बाजार में पहचान मिल सके।
एमपी में उद्यानिकी आधारित खेती ही भविष्य
कमिश्नर सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में उद्यानिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रदेश को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए उद्यानिकी आधारित खेती पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में जलगांव, पटना और नीमच सहित विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर वहां की खेती और उत्पादन व्यवस्था का अध्ययन किया गया है।
सब्सिडी नहीं, बाजार की मांग के अनुसार होगी खेती
कमिश्नर ने अधिकारियों से कहा कि किसानों का वास्तविक कल्याण केवल सब्सिडी देने से नहीं होगा, बल्कि उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप खेती के लिए तैयार करना होगा। जिस उत्पाद की जितनी मांग हो, उसी के अनुसार उत्पादन की योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। राजगढ़ लहसुन क्लस्टर का उद्देश्य भी उत्पादन, गुणवत्ता, प्रसंस्करण और बाजार को एक ही व्यवस्था से जोड़ना है। इससे किसानों को खेती के साथ-साथ अपनी उपज के बेहतर विपणन के अवसर मिल सकेंगे।
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