राजस्थान: कम बारिश वाले किसानों के लिए बाजरा-ज्वार बेहतर विकल्प, कृषि विभाग ने मिलेट्स की खेती पर दिया जोर
05 नवंबर 2026, जयपुर: राजस्थान: कम बारिश वाले किसानों के लिए बाजरा-ज्वार बेहतर विकल्प, कृषि विभाग ने मिलेट्स की खेती पर दिया जोर – कम वर्षा और सीमित सिंचाई संसाधनों वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए बाजरा और ज्वार जैसी मोटे अनाज की फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। इन फसलों को बढ़ावा देने और किसानों को इनके फायदे बताने के लिए कृषि विभाग बूंदी द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के तहत विभाग पारंपरिक फसलों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित कर रहा है।
सप्ताह के अंतर्गत बुधवार को निर्धारित ‘सतत खाद्य प्रणालियां अपनाएं’ गतिविधि के तहत श्री अन्न एवं मोटे अनाज के संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान किसानों को मिलेट्स की खेती के महत्व, उपयोगिता और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक फसलों को बढ़ावा देना, कृषि जैव विविधता का संरक्षण करना और किसानों को जलवायु अनुकूल खेती के विकल्पों से जोड़ना है।
कम पानी में भी हो सकती है बाजरा-ज्वार की खेती
कृषि विभाग के अनुसार, बाजरा और ज्वार जैसी मोटे अनाज की फसलें राजस्थान की जलवायु के अनुकूल हैं। इन फसलों को दूसरी कई फसलों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही, इनकी खेती कम उर्वरता वाली भूमि में भी की जा सकती है। इनमें कीट और बीमारियों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है। ऐसे में सीमित सिंचाई और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए ये उपयोगी विकल्प हैं।
पोषण के साथ कृषि जैव विविधता को भी मिलेगा बढ़ावा
श्री अन्न और मोटे अनाज पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इनके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने से स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मजबूती मिलेगी और पारंपरिक खाद्य फसलों के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, स्थानीय कृषि संसाधनों के उपयोग और फसल विविधीकरण से टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।
बाजरा और ज्वार की फसलों से प्राप्त चारा पशुपालन के लिए भी उपयोगी होता है। इससे खेती के साथ पशुपालन करने वाले किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। इन फसलों की कम पानी की जरूरत से जल संसाधनों के संरक्षण में मदद मिलती है। वहीं, स्थानीय जलवायु के अनुकूल फसलें अपनाने से खेती पर पर्यावरणीय दबाव भी कम किया जा सकता है।
कृषि पर्यवेक्षक मुख्यालयों पर हुई किसान गोष्ठियां
ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के तहत जिले के कृषि पर्यवेक्षक मुख्यालयों और ब्लॉक मुख्यालयों में मिलेट्स को लेकर कृषक गोष्ठियों का आयोजन किया गया। इनमें किसानों को बाजरा, ज्वार सहित अन्य मोटे अनाज की खेती के फायदे और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी भूमि, स्थानीय जलवायु और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों के अनुसार बाजरा, ज्वार सहित अन्य मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दें। साथ ही पारंपरिक फसलों और स्थानीय कृषि संसाधनों का संरक्षण करते हुए फसल विविधीकरण अपनाएं। किसान अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षकों और कृषि अधिकारियों से संपर्क कर उपयुक्त किस्मों, बुवाई के समय और फसल प्रबंधन से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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