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राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान: 11 और जिलों में डीबीटी-पीओएस से खाद वितरण लागू, अब किसान आईडी अनिवार्य

11 सितंबर 2026, जयपुर: राजस्थान: 11 और जिलों में डीबीटी-पीओएस से खाद वितरण लागू, अब किसान आईडी अनिवार्य – राजस्थान सरकार ने सब्सिडी वाली यूरिया खाद की बिक्री के लिए बनाई डिजिटल व्यवस्था डीबीटी-पीओएस को कोटा, झालावाड़, बारां, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, टोंक, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, हनुमानगढ़ और जालोर समेत 11 और जिलों में लागू कर दिया है। अब इन जिलों में किसान आईडी के बिना सब्सिडी वाली खाद नहीं मिलेगी।

कृषि विभाग ने यह व्यवस्था पहले राजसमंद और सिरोही जिलों में पायलट के तौर पर शुरू की थी, जहां एक लाख से ज्यादा किसानों ने 15 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की बुकिंग की। अब कुल 18 जिलों में यह सिस्टम लागू हो चुका है।

किसान आईडी से रुकेगी कालाबाजारी

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के मुताबिक, किसान को यूरिया की एक बोरी सिर्फ 267 रुपये में मिलती है, जबकि सरकार हर बोरी पर करीब 1,600 रुपये की सब्सिडी देती है। इतना बड़ा अंतर होने से खाद के औद्योगिक इस्तेमाल में डायवर्जन और कालाबाजारी का खतरा बना रहता है, जिसे रोकने के लिए डीबीटी-पीओएस सिस्टम को किसान आईडी से जोड़ा गया है।

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राज्य में अब तक 88.85 लाख किसानों की डिजिटल किसान आईडी बन चुकी है, जबकि फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य करीब 97 फीसदी पूरा हो गया है। एग्रीस्टैक के लिए राज्य सरकार ने 737 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मंजूर की है।

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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने हाल ही में एग्रीस्टैक की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा, “एग्रीस्टैक का मकसद सिर्फ डिजिटल डेटाबेस बनाना नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी जमीन, फसल और कृषि सेवाओं से जुड़ी सुविधाएं एकीकृत और आसान तरीके से मुहैया कराना है।”

विपक्ष के सवाल, विभाग बोला — नतीजे उत्साहजनक

कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस नई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि तकनीकी खराबी, सर्वर डाउन होने और घंटों लाइन में लगने के कारण कई किसान बिना खाद लिए लौट रहे हैं। कृषि विभाग का जवाब है कि पहले दो चरणों के नतीजे उत्साहजनक और सकारात्मक रहे हैं।

विभाग के मुताबिक, 15 सितंबर से जमीन के नामांतरण आवेदनों में आधार नंबर और किसान आईडी देना अनिवार्य होगा। साथ ही खरीफ 2026-27 सीजन के लिए राज्य के सभी 424 ऑनलाइन तहसीलों में डिजिटल फसल सर्वे शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

राज्य में डिजिटल फसल सर्वे का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2.36 करोड़ के लक्ष्य में से अब तक 1.89 करोड़ खेतों यानी करीब 80 फीसदी का डिजिटल सर्वे पूरा हो चुका है। इससे भविष्य में फसल बीमा, ऋण और सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ किसान आईडी और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के आधार पर सीधे किसानों तक पहुंचाना आसान होगा।

कृषि विभाग का यह भी कहना है कि डीबीटी-पीओएस व्यवस्था से खाद की बुकिंग और वितरण का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज होता है, जिससे यह पता लगाना आसान हो जाता है कि किस किसान ने कब और कितनी खाद ली। हालांकि किसानों और स्थानीय दुकानदारों की शिकायत है कि नेटवर्क और सर्वर की समस्या की वजह से पीक सीजन में बुकिंग में देरी होती है, जिसे दूर करने पर विभाग का फोकस बना हुआ है।

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