राज्य कृषि समाचार (State News)

कपास MSP 8,267 रुपये प्रति क्विंटल तय, खरगोन मंडी में नए सीजन की खरीद शुरू

11 सितंबर 2026, खरगोनकपास MSP 8,267 रुपये प्रति क्विंटल तय, खरगोन मंडी में नए सीजन की खरीद शुरू – मध्य प्रदेश की खरगोन मंडी के आनंद नगर कपास मंडी में नए सीजन 2026-27 की कपास खरीद 7 सितंबर से शुरू हो गई है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपज बेचने के लिए मोबाइल ऐप पर पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

वस्त्र मंत्रालय के कपड़ा आयुक्त कार्यालय ने 27 जुलाई 2026 के आदेश में कपास सीजन 2026-27 के लिए एमएसपी घोषित की है। मीडियम स्टेपल कपास का एमएसपी 8,267 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले साल से 557 रुपये यानी 7.22 फीसदी ज्यादा है।

लॉन्ग और एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल के दाम भी बढ़े

लॉन्ग स्टेपल कपास का एमएसपी 8,667 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है, जो 6.87 फीसदी ज्यादा है। सबसे ऊंचा दाम एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल यानी सुविन कपास को मिलेगा, जिसका एमएसपी 9,867 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि शॉर्ट स्टेपल किस्म का एमएसपी 7,767 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है।

यह एमएसपी 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी और खरीद के लिए नमी की सीमा 8 फीसदी तय की गई है। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) को इस सीजन में एमएसपी पर खरीद के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी बनाया गया है।

खरगोन मंडी में पंजीयन की तारीख और जरूरी कागजात

खरगोन कृषि उपज मंडी समिति ने किसानों से अपील की है कि वे तय तारीख से ही अपनी उपज मंडी में बिक्री के लिए लेकर आएं। मंडी में पंजीयन की प्रक्रिया 1 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगी और यह सीसीआई की मोबाइल ऐप के जरिए ही होगी।

कपास कारोबार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, सरकार ने घरेलू कपड़ा उद्योग को कच्चा माल सस्ता उपलब्ध कराने के लिए 1 जून से 30 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर सीमा शुल्क और कृषि अवसंरचना उपकर से भी छूट दी है। इसके अलावा सीसीआई को खरीद के लिए 1,718.56 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि 2026-27 से 2030-31 तक कपास उत्पादकता मिशन पर 5,659.22 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

कपास उद्योग संगठनों का कहना है कि इस साल एमएसपी में हुई बढ़ोतरी पिछले कुछ वर्षों की तुलना में सबसे ज्यादा है, जिससे किसानों को कपास की खेती की तरफ फिर आकर्षित होने में मदद मिलेगी। हालांकि कपड़ा उद्योग के एक हिस्से का मानना है कि एमएसपी बढ़ने से घरेलू कच्चे कपास की लागत बढ़ सकती है, इसलिए सरकार ने आयात शुल्क में छूट का सहारा लिया है ताकि कपड़ा मिलों को सस्ता कच्चा माल भी मिलता रहे।

खरगोन जैसे प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र में मंडी खुलने के साथ ही आसपास के गांवों से कपास की आवक शुरू हो गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे उपज को मंडी में लाने से पहले नमी का स्तर जांच लें, क्योंकि तय नमी सीमा से ज्यादा नमी वाली उपज पर एमएसपी का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

मध्य प्रदेश के साथ महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े कपास उत्पादक राज्यों में भी अगले कुछ हफ्तों में मंडियां खुलनी शुरू होंगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे सीसीआई की मोबाइल ऐप पर पंजीयन के साथ आधार कार्ड, बैंक खाता और बुवाई क्षेत्र से जुड़े दस्तावेज पहले से तैयार रखें, ताकि मंडी में उपज बेचते समय समय की बर्बादी न हो।

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