रायपुर: परंपरागत कृषि छोड़ बीज उत्पादक बने किसान, आय में 75 प्रतिशत का हुआ इजाफा
25 अक्टूबर 2026, रायपुर: रायपुर: परंपरागत कृषि छोड़ बीज उत्पादक बने किसान, आय में 75 प्रतिशत का हुआ इजाफा – छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के भाटापारा विकासखंड के ग्राम ढाबाडीह के किसानों ने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उन्नत बीज उत्पादन को अपनाया है। इससे किसानों की आय में लगभग 75 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। अनुबंध आधारित खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों की मदद से किसान अब बाजार के उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करते हुए बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।
ग्राम ढाबाडीह के किसान रूपेन्द्र साहू, उमा साहू, राजाराम एक्का और प्रमिला साहू पहले धान और सब्जियों की परंपरागत खेती करते थे। मौसम की मार और बाजार में फसलों के दाम में उतार-चढ़ाव के कारण उनकी आय सीमित रहती थी। इस समस्या का समाधान तलाशते हुए किसानों ने उद्यानिकी विभाग भाटापारा के अधिकारियों से संपर्क किया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने एक प्रमुख बीज कंपनी के साथ अनुबंध किया और सामूहिक रूप से 25 एकड़ क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन का काम शुरू किया।
अनुबंध आधारित खेती से बाजार के जोखिम में कमी
बीज कंपनी के साथ अनुबंध होने से किसानों को उनकी उपज के दाम पहले से निर्धारित होने का लाभ मिल रहा है। इससे बाजार भाव में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हुआ है। वहीं, आधुनिक कृषि तकनीकों और सामूहिक रूप से खेती करने से मजदूरी पर होने वाला खर्च भी घटा है। इन बदलावों का असर किसानों की आमदनी पर दिखाई दे रहा है। पहले किसान 8 हेक्टेयर में सब्जियों और 2 हेक्टेयर में धान की खेती करते थे। इस व्यवस्था में उन्हें प्रति एकड़ लगभग 1 लाख रुपये का मुनाफा होता था। अब 9 हेक्टेयर में सब्जियों की खेती के साथ बीज उत्पादन अपनाने से प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 75 हजार रुपये की बचत हो रही है। इस तरह किसानों की प्रति एकड़ आय में करीब 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फसल सुखाने के लिए मिले क्रॉप सोलर ड्रायर
किसानों को बीज उत्पादन में सुविधा देने के लिए उद्यानिकी विभाग ने दो क्रॉप सोलर ड्रायर भी उपलब्ध कराए हैं। इनकी मदद से बारिश के दौरान भी बीजों को सुखाने में सहायता मिलेगी। इससे बीज उत्पादन की प्रक्रिया को सुगम बनाने और मौसम के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी।
दूसरे किसानों के लिए बनी प्रेरणा
ढाबाडीह के किसानों की इस पहल से आसपास के ग्रामीणों और अन्य किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने की प्रेरणा मिल रही है। अब दूसरे किसान भी परंपरागत खेती के साथ-साथ उन्नत बीज उत्पादन और अनुबंध आधारित कृषि की संभावनाओं में रुचि दिखा रहे हैं। ढाबाडीह के किसानों का यह प्रयास बताता है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन व्यवस्था के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
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