उत्तर प्रदेश में राज्य कृषि विकास योजना के तहत 286.46 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी
14 सितंबर 2026, लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्य कृषि विकास योजना के तहत 286.46 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी – उत्तर प्रदेश में किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र, बीज भंडारण सुविधा और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं और बेहतर तरीके से मुहैया कराने के लिए राज्य कृषि विकास योजना के तहत 286.46 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह फैसला 3 सितंबर को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति की बैठक में लिया गया।
स्वीकृत राशि में से 101.13 करोड़ रुपये पहले से चल रही परियोजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 में जारी किए जाएंगे, जबकि 185.33 करोड़ रुपये की नई परियोजनाएं इसी वित्तीय वर्ष में शुरू की जाएंगी। इस तरह कुल मिलाकर प्रदेश के कृषि ढांचे को मजबूत करने के लिए एक साथ बड़ी राशि खर्च की जाएगी।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
बैठक में स्वीकृत परियोजनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा कृषि यंत्रीकरण और आधुनिकीकरण का है, जिसके लिए 60 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। इसका मकसद किसानों तक आधुनिक कृषि मशीनें और उपकरण सुलभ दरों पर पहुंचाना है, ताकि खेती की लागत घटे और उत्पादकता बढ़े।
इसके अलावा बीज भंडारण गोदामों के निर्माण पर 54.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज समय पर और नजदीक ही उपलब्ध हो सकेंगे। मत्स्य विकास के लिए 7.91 करोड़ रुपये और कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए 8.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि बाकी राशि अन्य कृषि संबंधी परियोजनाओं पर खर्च होगी।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह फैसला
बीज भंडारण गोदाम और यंत्रीकरण जैसी बुनियादी सुविधाओं में निवेश का सीधा असर किसानों की रोजमर्रा की खेती पर पड़ता है। जिन इलाकों में गोदाम और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसी सुविधाएं होती हैं, वहां किसानों को बीज खराब होने या समय पर यंत्र न मिलने जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश के कई जिलों में किसानों को कम कीमत पर बेहतर संसाधन मिलने लगेंगे। जिन किसानों को अपने इलाके में इन योजनाओं का लाभ लेना है, उन्हें अपने जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से आगामी महीनों में शुरू होने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते रहना चाहिए।
राज्य कृषि विकास योजना केंद्र प्रायोजित योजनाओं का ही राज्य स्तरीय विस्तार है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर उन कृषि परियोजनाओं को वित्तपोषित करती हैं जो जिला स्तर पर किसानों की सबसे ज्यादा मांग वाली जरूरतों पर आधारित होती हैं। हर साल राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति जिलों से मिले प्रस्तावों की समीक्षा करके प्राथमिकता के आधार पर बजट आवंटित करती है। इस बार की बैठक में मौजूदा परियोजनाओं को जारी रखने के साथ-साथ नई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है, ताकि पिछले वर्षों में शुरू हुआ काम अधूरा न रह जाए।
कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार स्वीकृत राशि के जिलावार बंटवारे और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अब संबंधित जिला कृषि अधिकारियों को सौंपी जाएगी। आमतौर पर ऐसी परियोजनाओं के तहत खरीदे जाने वाले यंत्र और बनने वाले गोदाम किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और सहकारी समितियों के माध्यम से भी किसानों तक पहुंचाए जाते हैं, जिससे छोटे व सीमांत किसानों को भी महंगे यंत्रों तक किराए पर पहुंच मिल सके।
बीज भंडारण और यंत्रीकरण पर बड़ा निवेश सीधे तौर पर बीज कंपनियों, कृषि यंत्र निर्माताओं और कस्टम हायरिंग सेंटर संचालकों के लिए भी नए अवसर लेकर आता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि प्रधान राज्य में इस तरह की योजनाएं जमीनी स्तर पर लागू होने में समय जरूर लेती हैं, इसलिए किसानों को स्थानीय प्रशासन से लगातार संपर्क बनाए रखना फायदेमंद रहेगा।
चूंकि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है, इसलिए यहां हर साल कृषि ढांचे पर होने वाला निवेश पूरे उत्तर भारत की मंडियों और बीज-उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डालता है। किसान संगठनों का कहना है कि अगर स्वीकृत परियोजनाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो आने वाले रबी सीजन तक कई जिलों में किसानों को इसका सीधा फायदा मिलना शुरू हो सकता है।
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