झारखंड की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना में आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर, 90 फीसदी तक अनुदान
14 सितंबर 2026, कोडरमा: झारखंड की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना में आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर, 90 फीसदी तक अनुदान – झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत पशुपालन शुरू करने के इच्छुक ग्रामीणों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड में योजना का लाभ लेने के लिए किसानों और बेरोजगार युवाओं को 15 सितंबर 2026 तक आवेदन करना होगा।
डोमचांच प्रमुख डॉ. सत्यनारायण यादव ने कहा कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए आय का स्थायी साधन विकसित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि योजना का मकसद पशुपालन के जरिए गांवों में स्वरोजगार के मौके बढ़ाना है, ताकि बेरोजगार युवाओं को शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।
किन पशुओं के लिए मिलेगा अनुदान
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत अलग-अलग पशुपालन गतिविधियों के लिए यूनिट तय की गई हैं। गाय पालन के लिए दो या उससे अधिक गायों की यूनिट दी जाती है, जबकि बकरी विकास के तहत 8 मादा और 2 नर बकरे की यूनिट उपलब्ध कराई जाती है।
सुअर विकास योजना में 4 मादा और 1 नर सुअर, मुर्गी पालन में 400 लेयर या 500 ब्रॉयलर चूजे, बत्तख पालन में 15 चूजे और भेड़ पालन में 8 मादा तथा 2 नर भेड़ की यूनिट दी जाती है। इन सभी यूनिट पर सरकार की ओर से 75 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, यानी लाभार्थी को अपनी जेब से बहुत कम राशि खर्च करनी पड़ती है।
कैसे और कहां करें आवेदन
इच्छुक लाभार्थी डोमचांच प्रखंड के जेरूआडीह स्थित पशु अस्पताल कार्यालय से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद पात्रता की जांच की जाती है और उसके आधार पर लाभार्थियों का चयन होता है। चूंकि अंतिम तारीख नजदीक है, इसलिए विभाग ने अधिक से अधिक ग्रामीणों से जल्द आवेदन करने की अपील की है।
आवेदन के समय पहचान पत्र, निवास प्रमाण और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज साथ ले जाना जरूरी बताया गया है, ताकि चयन प्रक्रिया में देरी न हो। पशु चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक चयनित लाभार्थियों को पशु उपलब्ध कराने से पहले उनके शेड, चारे और पानी की उचित व्यवस्था की भी जांच की जाती है, ताकि पाले जाने वाले पशु स्वस्थ रहें और अनुदान का मकसद पूरा हो सके।
झारखंड के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है और एक ही फसल सीजन में सीमित आय बन पाती है। ऐसे में गाय, बकरी, सुअर, मुर्गी, बत्तख और भेड़ पालन जैसी गतिविधियां किसान परिवारों को साल भर नियमित आय देने का जरिया बनती हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार पशुधन विकास योजना के जरिए ग्रामीण युवाओं और छोटे किसानों को खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आय के दूसरे स्तंभ के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
डोमचांच प्रखंड के अलावा कोडरमा जिले के अन्य प्रखंडों और राज्य के दूसरे जिलों में भी इसी तरह की योजना क्षेत्रीय पशु चिकित्सा कार्यालयों के जरिए लागू की जा रही है। हालांकि आवेदन की प्रक्रिया और यूनिट का आकार अलग-अलग जिलों में थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए किसानों को अपने प्रखंड के पशु चिकित्सा अधिकारी से इसकी पुष्टि जरूर कर लेनी चाहिए।
गांवों में पशुपालन आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली इस तरह की योजनाएं छोटे और भूमिहीन परिवारों के लिए खासतौर पर उपयोगी होती हैं, क्योंकि उन्हें खेती की जमीन न होने पर भी नियमित आय का जरिया मिल जाता है। साथ ही, पशु चारा, दवा और उपकरण बेचने वाले स्थानीय कारोबारियों के लिए भी ऐसी योजनाएं मांग बढ़ाने का काम करती हैं। अन्य राज्यों के किसान भी अपने यहां चल रही इसी तरह की पशुधन योजनाओं की जानकारी अपने नजदीकी पशु चिकित्सा अस्पताल या जिला पशुपालन कार्यालय से ले सकते हैं।
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