राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि में रसायनों के प्रयोग में सावधानियां

लेखक: डॉ. दीपक चौहान (वैज्ञानिक कृषि अभियांत्रिकी), डॉ. मृगेन्द्र सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख), डॉ. अल्पना शर्मा (वैज्ञानिक), डॉ. बृजकिशोर प्रजापति (वैज्ञानिक), भागवत प्रसाद पंद्रे (कार्यक्रम सहायक) कृषि विज्ञान केन्द्र शहडोल, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय जबलपुर (म. प्र.)

20 अगस्त 2026, भोपाल: कृषि में रसायनों के प्रयोग में सावधानियां – किसान अपनी फसलों में कीड़ों, रोगों एवं खरपतवार नियंत्रण के लिए जहरीले रसायनो का उपयोग करता है एवं यह कीटनाशक जहरीले तथा मूल्यवान होते है। इन रसायनो के मानव शरीर में प्रवेश करने से तत्कालीन एवं दीर्घकालीन बीमारियां जो सकती है। इन जहरीले रसायनों के दुष्प्रभावों से कृषक अनभिज्ञ रहते है एवं वे इनका खेतो में प्रयोग करते समय बिना किसी सुरक्षा के करते है।

रसायन मुख्यतः शरीर की त्वचा, मुंह तथा नाक के द्वारा घोल बनाते समय, छिड़काव करते समय अथवा उपयोग के बाद शेष बचे हुए घोल को फेंकते समय संपर्क में आने से शरीर से पहुँच जाते है। इन रसायनों के संपर्क में आने से सिरदर्द, चक्कर, बेहोशी जैसे लक्षण प्रकट होने लगते है, परन्तु बार-बार इन रसायनो के संपर्क से दीर्घकालीन बीमारियां जैसे अस्थमा, माइग्रेन, दाद-खाज, उच्च रक्तचाप इत्यादि हो सकती है। रसायन की अधिक मात्रा शरीर में पहुंचने से मौत भी हो सकती है। इसलिए रसायनों के खेती में प्रयोग करते समय किसानो को सुरक्षित उपाय करना चाहिए जिससे इन जहरीले रसायनों का संपर्क सीधे मुंह, त्वचा तथा श्वांस नाली से ना हो। रसायनो के घातक प्रभाव से बचने के लिए आवश्यक होता है की उन पर लिखे हुवे निर्देशों का पालन सही तरीके से करें एवं किसी प्रकार की लापरवाही न बरते क्योकि थोड़ी भी लापरवाही बहुत बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

रसायनो के प्रयोग से पहले सावधानियां

सर्वप्रथम किसानों को फसलों के शत्रु कीटों की पहचान कर लेना चाहिए, यदि पहचान संभव नहीं है तो स्थानीय स्तर पर उपस्थित कृषि विशेषज्ञ से कीट की पहचान करवा कर कीट के अनुरूप कीटनाशी का क्रय करना चाहिए।

  • कीटनाशक का प्रयोग तभी करना चाहिए जब कीट द्वारा आर्थिक नुकसान की क्षति निम्न स्तर की सीमा से अधिक हो गयी हो।
  • कीट को मारने का सही तरीका एवं समय का ध्यान रखना चाहिए।
  • कीटनाशकों के विषाक्ता को प्रदर्शित करने के लिए कीटनाशक के डिब्बे पर तिकोने आकार का हरा, नीला, पीला एवं लाल रंग का निशान बना होता है। सबसे पहले लाल निशान वाले कीटनाशी का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योकि लाल निशान के कीटनाशी समस्त स्तनधारियों पर सबसे अधिक नुकसान करते है। लाल निशान वाले कीटनाशी की अपेक्षा पीले रंग के निशान वाले कीटनाशी कम तथा पीले रंग के कीटनाशी की अपेक्षा नीले रंग के निशान वाले कम नुकसान पहुंचते है। सबसे कम नुकसान हरे रंग के निशान वाले कीटनाशी से होता है।
  • कीटनाशक खरीदते समय हमेशा उसके उत्पादन की तिथि एवं उपयोग की अंतिम तिथि को अवश्य पढ़ लेना चाहिए ताकि पुरानी दवाई को खरीदने से बचा जा सके क्योकि पुरानी दवा कम अथवा नहीं के बराबर असरदार हो सकती है, जिससे आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।
  • कीटनाशक के पैकिंग के साथ एक उपयोग करने के लिए निर्देशिका पुस्तिका अथवा लीफलेट को ध्यानपूर्वक पड़ना आवश्यक है, जिससे उपयोग का तरीका तथा मात्रा प्रयोग की जा सकती है।
  • कीटनाशकों का भण्डारण हमेशा साफ सुथरी, हवादार एवं सूखे स्थान पर करना चाहिए।
  • यदि अलग- अलग समूहों के कीटनाशकों का प्रयोग करना हो तो एक के बाद दूसरे का प्रयोग करना चाहिए।
  • ऐसे कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिसके प्रयोग से पत्तों में रासायनिक अम्ल बनता हो।

रसायनो के प्रयोग से करते समय सावधानियां

  • शरीर को पूरी तरह से बचाने के लिये ऐसे कपडे पहने जो पूरी तरह से शरीर को ढक सके जिससे यदि कीटनाशक रसायन कपड़ो पर लग जाये तो उसे बदला जा सकता है एवं हाथो में रबर के दस्ताने अवश्य पहनना चाहिए तथा मुँह पर मास्क लगा लेना चाहिए एवं आँखों की सुरक्षा के लिए चश्मा लगा लेना चाहिए।
  • बहुत जहरिये कीटनाशी को प्रयोग करते समय अकेले कार्य नहीं करना चाहिए एक या दो व्यक्तियों को खेत के बाहर मौजूद रहना चाहिए आपातकाल में जल्द मदद मिल सके।
  • कीटनाशी को मिलाने के लिए लकड़ी के डंडे का प्रयोग करना चाहिए तथा घोल को ढककर रखना चाहिए ताकि उसे छोटे बच्चे एवं कोई पशु धोके में पी न ले।
  • कीटनाशी छिड़कने वाले को छिड़काव की पूरी जानकारी होनी चाहिए तथा उसके शरीर पर कोई घाव नहीं होना चाहिए तथा छिड़काव के समय चलने वाली हवा से बचना चाहिए।
  • कीटनाशी का घोल बनाते समय किसी बच्चे या अन्य आदमी या जानवर को पास में नहीं रहने देना चाहिए।
  • दवा के साथ मिली हुई प्रयोग पुस्तिका को अच्छे से पड़ कर उसके अनुसार कार्य करना चाहिए।
  • कीटनाशक का छिड़काव करने के पश्च्यात त्वचा को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए।
  • छिड़काव के समय साफ पानी की पर्याप्त मात्रा पास में रखनी चाहिए।
  • कीटनाशी मिलते समय जिस दिशा से हवा का बहाव हो रहा हे उसी दिशा में खड़े होकर कीटनाशी को मिलाना चाहिए।
  • कीटनाशी का धुंआ सांस के द्वारा शरीर के अंदर नहीं जाने देना चाहिए।
  • एक बार जितनी आवश्यकता हो उतना ही कीटनाशी ले जाना चाहिए।
  • कीटनाशक छिड़कने वाले यंत्र की जाँच कर लेनी चाहिए, यदि यंत्र सही काम नहीं कर रहा हो तो उसकी मरम्मत कर लेना चाहिए तथा नोजल को कभी भी मुँह से खोलने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
  • तरल कीटनाशियों को सावधानीपूर्वक मशीन में डालना चाहिए एवं यह ध्यान रखना चाहिए की किसी भी प्रकार मुंह, कान, नाक, आँख आदि में रसायन न जाए। यदि गलती से ऐसा हो तो तुरंत साफ पानी से बार बार प्रभावित अंग को धोना चाहिए।
  • कीटनाशी का प्रयोग करते समय किसी प्रकार का धूम्रपान या कोई खान-पान नहीं करना चाहिए।
  • कीटनाशी का प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए की कीटनाशी की मात्रा पूरी तरह से पानी में घुल गयी हो।
  • हवा के विपरीत दिशा में खड़े होकर छिड़काव या बुरकाव करना चाहिए।
  • छिड़काव के लिए उपयुक्त समय सुबह या सायंकाल का होना चाहिए यथा यह ध्यान रखना चाहिए की हवा की गति 7 किमी प्रति घंटा से कम ही होनी चाहिए तथा तापमान 21 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास रहना सर्वोत्तम होता है।
  • फूल आने पर फसलों पर कम से कम छिड़काव करना चाहिए और यदि छिड़काव करना हो तो हमेशा सायंकाल में ही छिड़काव करना चाहिए, जिससे मधुमक्खियां रसायन से प्रभावित न हो।
  • कीटनाशकों का व्यक्ति पर प्रभाव दिखने लगे तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाए साथ ही कीटनाशी का डिब्बा भी लेकर जाना चाहिए।

रसायनो के प्रयोग के बाद सावधानियां

  • बचे हुए घोल को कभी भी पम्प में नहीं छोड़ना चाहिए।
  • खली डिब्बे को किसी अन्य काम में नहीं लेना चाहिए बल्कि उसे नष्ट कर देना चाहिए।
  • कीटनाशी के छिड़काव के समय प्रयोग में लाये गए कपडे, बर्तन को अच्छी तरह से धोकर रखना चाहिए।
  • जिस भी कीटनाशक का प्रयोग करें उसका सम्पूर्ण विवरण लिखकर रख लेना चाहिए।
  • बचे हुए कीटनाशक की शेष मात्रा को सुरक्षित स्थान पर भंडारित कर देना चाहिए।
  • पम्प को अच्छी तरह से साफ करके सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।
  • कीटनाशी के कागज या प्लास्टिक को यदि जलाना हो तो उसके धुंए के पास नहीं खड़ा होना चाहिए।
  • कीटनाशी के छिड़काव के बाद अच्छी तरह से स्नान करके दूसरे वस्त्र पहनना चाहिए।
  • कीटनाशी छिड़काव के बाद छिड़के गए खेत में किसी व्यक्ति एवं जानवर को नहीं जाने देना चाहिए।
  • कीटनाशी छिड़काव के बाद छः घंटे तक वर्षा नहीं होना चाहिए। यदि वर्षा हो जाये तो पुनः छिड़काव करना चाहिए।
  • अंतिम छिड़काव एवं फसल की कटाई ता तुड़ाई के समय दवा में बताये अंतराल का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।

विष का प्राथमिक उपचार

सभी प्रकार की सावधानी रखने के उपरांत भी यदि कोई व्यक्ति इन कीटनाशकों का शिकार हो जाये तो निम्नलिखित सावधानियां अपनानी चाहिए।

  • रोगी के शरीर से विष को अति शीघ्र निकलने का प्रयास करना चाहिए।
  • विषमार दवा का तुरंत प्रयोग करना चाहिए।
  • रोगी को तुरंत पास के किसी अस्पताल या डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
  • यदि जहर खा लिया हो तो एक ग्लास गुनगुने पानी में दो चम्मच नमक का घोल मिला कर उलटी करनी चाहिए।
  • यदि व्यक्ति ने विष सूंघ लिया हो तो रोगी को शीघ्र खुले स्थान पर ले जाना चाहिए, शरीर के कपडे ढीले कर देना चाहिए, यदि दौरे पड़ रहे हो तो अँधेरे स्थान पर के जाना चाहिए।
  • यदि साँस लेने परेशानी हो रही हो तो रोगी को पेट के सहारे लिटाकर उसकी बाँहों को सामने की और फैला लें एवं रोगी की पीठ को हल्के हल्के सहलाते हुए दबाएं तथा कत्रिम श्वांस का प्रबंध करना चाहिए।

इस प्रकार उपरोक्त सावधानियां को ध्यान में रखते हुए यदि कीटनाशियों का प्रयोग किया जाए तो इनसे होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से बचा जा सकता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture