किसानों की जेब पर कम पड़ेगा कीट नियंत्रण का खर्च, ट्रैप पर सरकार दे रही 75% सब्सिडी
03 सितंबर 2026, पटना: किसानों की जेब पर कम पड़ेगा कीट नियंत्रण का खर्च, ट्रैप पर सरकार दे रही 75% सब्सिडी – फसलों को कीटों से बचाना किसानों के लिए हर सीजन में एक बड़ी चुनौती होती है। कीटों का असर सीधे फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर पड़ता है। इससे बचाव के लिए अगर किसान लगातार रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, तो खेती की लागत भी बढ़ जाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए बिहार में किसानों को कम खर्च में कीट नियंत्रण की सुविधा देने के लिए ‘पौधा संरक्षण उत्पादन वितरण योजना’ संचालित की जा रही है।
योजना के तहत पौधा संरक्षण से जुड़ी मशीनों और कीट नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैप पर किसानों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इसका मकसद फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों पर नियंत्रण के साथ खेती का खर्च कम करना और उत्पादन बढ़ाने में मदद करना है।
तीन तरह के ट्रैप पर मिल रही सहायता
योजना के अंतर्गत किसानों को कीटों की निगरानी और नियंत्रण के लिए अलग-अलग ट्रैप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप शामिल हैं। फेरोमोन ट्रैप में ऐसे आकर्षक पदार्थ का इस्तेमाल होता है, जो विशेष प्रकार के कीटों को अपनी ओर खींचते हैं। इससे खेत में संबंधित कीटों की मौजूदगी का पता लगाने के साथ उनकी संख्या नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
स्टिकी ट्रैप में चिपचिपी सतह होती है। छोटे उड़ने वाले कीट इस सतह पर फंस जाते हैं, जिससे उनकी संख्या कम करने और खेत में उनकी स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलती है। वहीं, फ्रूट फ्लाई ट्रैप का इस्तेमाल फलों को नुकसान पहुंचाने वाली फल मक्खियों के नियंत्रण के लिए किया जाता है।
किस फसल के लिए कितनी सब्सिडी?
बिहार सरकार की ओर से अलग-अलग फसलों में लगने वाले कीटों के हिसाब से फेरोमोन ट्रैप के लिए सहायता राशि तय की गई है। धान तना छेदक, चना फली छेदक और बैंगन तना एवं फल छेदक के लिए फेरोमोन ट्रैप पर 96 रुपये प्रति सेट या अधिकतम 480 रुपये प्रति एकड़ तक सब्सिडी मिलेगी। इसी तरह मक्का में फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैप पर 162 रुपये प्रति सेट या अधिकतम 810 रुपये प्रति एकड़ तक सहायता दी जाएगी। सब्जियों में डायमंड बैक मॉथ के लिए फेरोमोन ट्रैप खरीदने पर 171 रुपये प्रति सेट या अधिकतम 855 रुपये प्रति एकड़ तक सब्सिडी का प्रावधान है। इस सहायता से किसानों को कीट नियंत्रण के लिए जरूरी सामग्री खरीदने में कम राशि खर्च करनी होगी।
रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटाने की कोशिश
योजना के जरिए किसानों को ट्रैप आधारित कीट नियंत्रण की ओर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। खेत में कीटों की निगरानी होने से किसान उनकी स्थिति के आधार पर नियंत्रण के उपाय कर सकते हैं। इससे जरूरत से ज्यादा रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कीट नियंत्रण पर होने वाला खर्च घटने और सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
ऑनलाइन करना होगा आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘पौधा संरक्षण उत्पादन वितरण योजना’ का लिंक चुनना होगा। इसके बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। आवेदन जमा होने के बाद जिला स्तर पर इसकी जांच की जाएगी। जांच में पात्र पाए जाने वाले किसानों को ही योजना के तहत सहायता का लाभ दिया जाएगा। किसान योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि या बागवानी विभाग के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
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